कर्नाटक

DK सरकार को सिद्धारमैया की नसीहत गारंटी योजनाओं पर दिया बड़ा संदेश

Ratna Netam
10 Sept 2026 8:08 PM IST
DK सरकार को सिद्धारमैया की नसीहत गारंटी योजनाओं पर दिया बड़ा संदेश
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बेंगलुरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री **डीके शिवकुमार** की सरकार ने गुरुवार को अपने कार्यकाल के 100 दिन पूरे कर लिए। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य **सिद्धारमैया** ने शिवकुमार सरकार के कामकाज की तारीफ करते हुए उसे “सही दिशा” में आगे बढ़ने वाली सरकार बताया। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने सरकार के सामने कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक और नीतिगत अपेक्षाएं भी रख दीं। सिद्धारमैया ने साफ संदेश दिया कि कांग्रेस ने चुनाव के समय जनता से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा किया जाए और गरीबों के लिए शुरू की गई गारंटी योजनाओं को किसी भी दबाव या आलोचना के कारण कमजोर न होने दिया जाए।
सिद्धारमैया का यह बयान ऐसे समय आया है जब कर्नाटक कांग्रेस के भीतर सत्ता संतुलन, सामाजिक न्याय और सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं। हाल के दिनों में सिद्धारमैया ने पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर अपनी सक्रियता बढ़ाई है। ऐसे में डीके सरकार के 100 दिन पूरे होने पर उनकी तारीफ के साथ दी गई सलाह को सामान्य राजनीतिक संदेश के साथ-साथ कांग्रेस के अंदर चल रहे समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से किसी बड़े टकराव का संकेत नहीं दिया है।
सिद्धारमैया ने दिया DK सरकार को ‘गुड सर्टिफिकेट’
100 दिन पूरे होने पर सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार सरकार को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि सरकार सही रास्ते पर आगे बढ़ रही है और राज्य के विकास तथा गरीबों के हितों को ध्यान में रखकर काम किया जा रहा है।
लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि 100 दिन पूरे होने को केवल जश्न के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह सरकार के लिए अपनी जिम्मेदारियों और जनता से किए वादों को याद करने का अवसर भी है।
सिद्धारमैया ने सरकार को चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने और गरीबों के हित में चल रही योजनाओं को मजबूती से आगे बढ़ाने की सलाह दी।
यह बयान राजनीतिक रूप से इसलिए अहम है क्योंकि कांग्रेस सरकार की कई प्रमुख गारंटी योजनाएं सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री रहते शुरू हुई थीं। अब डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार उन्हें आगे बढ़ा रही है।
गारंटी योजनाएं बंद नहीं होनी चाहिए
सिद्धारमैया के संदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कांग्रेस की गारंटी योजनाओं को लेकर रहा।
उन्होंने सरकार को सलाह दी कि आलोचनाओं के बावजूद गरीब और मध्यम वर्ग से जुड़ी गारंटी योजनाओं को जारी रखा जाना चाहिए। इन योजनाओं ने कांग्रेस की चुनावी राजनीति में बड़ी भूमिका निभाई थी और सिद्धारमैया इन्हें पार्टी के सामाजिक कल्याण मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
डीके शिवकुमार सरकार भी इन योजनाओं को जारी रखने की बात कर रही है। 100 दिन पूरे होने पर सरकार ने गारंटी योजनाओं के लाभार्थियों के साथ संवाद का कार्यक्रम रखा। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि नेतृत्व बदलने के बावजूद सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में निरंतरता बनी हुई है।
घोषणापत्र के सभी वादे पूरे करने पर जोर
सिद्धारमैया ने केवल मौजूदा योजनाओं को जारी रखने की बात नहीं की बल्कि कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में किए गए बाकी वादों को भी पूरा करने पर जोर दिया।
उनका संदेश है कि सरकार की सफलता का मूल्यांकन केवल नई परियोजनाओं या 100 दिन की उपलब्धियों से नहीं बल्कि इस आधार पर भी होना चाहिए कि चुनाव से पहले जनता से किए गए वादों में कितने पूरे हुए।
यही वजह है कि उनकी सलाह को डीके शिवकुमार सरकार के लिए राजनीतिक रोडमैप की तरह भी देखा जा रहा है।
सरकार के सामने अब कल्याणकारी योजनाओं के साथ बुनियादी ढांचा, निवेश, रोजगार, किसानों और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर एक साथ आगे बढ़ने की चुनौती है।
100 दिन पर सरकार ने खोला योजनाओं का पिटारा
डीके शिवकुमार सरकार ने 100 दिन पूरे होने से ठीक पहले कई नई योजनाओं और फैसलों को मंजूरी दी।
इनमें पिछड़े जिलों में रोजगार पैदा करने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन देने की योजना प्रमुख है। सरकार ने 10 पिछड़े जिलों में प्रत्येक नई नौकरी पैदा करने पर नियोक्ता को **2,500 रुपये प्रति माह**, अधिकतम 24 महीने तक सहायता देने की योजना मंजूर की है। इसके लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
इसके अलावा सरकार ने भूमिहीन लोगों के लिए प्रत्येक जिले में **50 हजार मुफ्त आवासीय प्लॉट** देने का फैसला किया है। पूरे राज्य में करीब 15.5 लाख प्लॉट चरणबद्ध तरीके से बांटने की योजना है।
इन घोषणाओं को डीके सरकार अपने 100 दिन के सामाजिक और रोजगार केंद्रित एजेंडे के रूप में पेश कर रही है।
किसानों के लिए ‘मुख्यमंत्री नेगिला योगी’ योजना
सरकार ने किसानों के लिए भी बड़ा फैसला किया है।
‘मुख्यमंत्री नेगिला योगी’ योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों की ऐसी कृषि भूमि को दोबारा खेती के योग्य बनाने की कोशिश होगी जो संसाधनों की कमी के कारण खाली पड़ी है।
योजना की शुरुआत 31 तालुकों में पायलट आधार पर की जाएगी। तीन एकड़ तक जमीन वाले पात्र किसानों को ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी के जरिए मुफ्त जुताई की सुविधा देने की योजना है। शुरुआती प्रावधान करीब **152.28 करोड़ रुपये** का है। सफल होने पर इसे राज्य के अन्य तालुकों तक बढ़ाया जा सकता है।
सरकार का अनुमान है कि इस पहल से लाखों छोटे किसानों को फायदा पहुंचाने की क्षमता है।
छात्र संघ चुनाव भी होंगे बहाल
100 दिन के मौके पर लिए गए फैसलों में कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव दोबारा शुरू करने का निर्णय भी शामिल है।
2026-27 शैक्षणिक सत्र से उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र संघ चुनाव कराने की मंजूरी दी गई है। प्रस्तावित छात्र संघ में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव और कार्यकारिणी सदस्य होंगे। महिलाओं के प्रतिनिधित्व का भी प्रावधान रखा गया है।
सरकार का कहना है कि छात्र संगठनों को सीधे राजनीतिक दलों के फ्रंट के रूप में काम करने से रोकने की व्यवस्था होगी, हालांकि व्यक्तिगत छात्र राजनीतिक संगठनों के सदस्य हो सकते हैं।
सिद्धारमैया ने फिर उठाया सामाजिक न्याय का एजेंडा
डीके सरकार के 100 दिन पूरे होने की राजनीतिक चर्चा को सिद्धारमैया की हालिया सक्रियता से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
कुछ दिन पहले ही उन्होंने जाति सर्वेक्षण लागू करने और दलितों, पिछड़े वर्गों तथा अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाकर **75 प्रतिशत** करने की मांग की थी। उनका कहना था कि अलग-अलग समुदायों को उनकी आबादी के अनुपात में अवसर मिलने चाहिए।
सिद्धारमैया लंबे समय से AHINDA—यानी अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित समुदायों—की राजनीति का प्रमुख चेहरा रहे हैं।
मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद कुछ समय तक अपेक्षाकृत कम सक्रिय दिखाई देने वाले सिद्धारमैया ने अब सामाजिक न्याय से जुड़े कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है।
यही वजह है कि उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर कांग्रेस के अंदर नए समीकरणों की चर्चा भी चल रही है।
क्या कांग्रेस में नहीं है ‘ऑल इज वेल’?
यह सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है।
सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मतभेदों और शक्ति संतुलन को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से अटकलें लगती रही हैं। अब नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी ऐसी चर्चाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
हाल की रिपोर्टों के मुताबिक सिद्धारमैया अपने कुछ पुराने सहयोगियों के डीके शिवकुमार के करीब जाने से असहज बताए जाते रहे हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व ने उनके समर्थकों को सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर संतुलन बनाने की कोशिश की है।
हालांकि 100 दिन पूरे होने पर सिद्धारमैया का बयान किसी विद्रोह या खुली नाराजगी का नहीं बल्कि सरकार के समर्थन का है।
उन्होंने डीके सरकार को “सही दिशा” में बताया है। इसलिए उनकी मांगों को सीधे तौर पर सरकार के खिलाफ मोर्चा कहना तथ्यों से आगे जाना होगा।
100 दिन से पहले सिद्धारमैया से मिले थे DK
दोनों नेताओं के रिश्तों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक महत्वपूर्ण तस्वीर भी सामने आई।
डीके शिवकुमार ने सरकार के 100 दिन पूरे होने से पहले मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात की थी।
इसके बाद 100 दिन पूरे होने पर जारी प्रचार सामग्री में सिद्धारमैया की तस्वीर भी दिखाई दी। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस विज्ञापन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की तस्वीरें नहीं थीं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को स्थान दिया गया था।
इसे डीके शिवकुमार की ओर से पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने और सिद्धारमैया के योगदान को स्वीकार करने के राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
DK सरकार का फोकस इन्फ्रास्ट्रक्चर पर भी
सिद्धारमैया के कार्यकाल की पहचान बड़े पैमाने पर कल्याणकारी और सामाजिक न्याय की योजनाओं से जुड़ी रही। डीके शिवकुमार के नेतृत्व में सरकार ने इन योजनाओं को जारी रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश पर भी फोकस बढ़ाया है।
100 दिन के दौरान सरकार ने प्रशासनिक सुधार के लिए ‘प्रजा सेवा’ व्यवस्था, युवाओं से जुड़े कार्यक्रम और बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है।
इसके साथ नई टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट नीति 2026-31 को भी मंजूरी दी गई है, जिसमें पांच वर्षों में करीब **20 हजार करोड़ रुपये के निजी निवेश** को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार की रणनीति रोजगार, निवेश और सामाजिक योजनाओं के बीच संतुलन बनाने की दिखाई देती है।
एक लाख नौकरियों पर भी सरकार का फोकस
डीके शिवकुमार ने 100 दिन पूरे होने के मौके पर जनता के नाम संदेश में रोजगार को अपनी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
रिपोर्टों के मुताबिक एक लाख रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से उद्योग से जुड़ी पहल पर जोर दिया जा रहा है।
इसके अलावा पिछड़े जिलों में नई नौकरी देने वाले नियोक्ताओं को 2,500 रुपये प्रतिमाह सहायता देने का फैसला भी इसी रोजगार रणनीति का हिस्सा है।
सरकार का मानना है कि केवल सरकारी नौकरियों के भरोसे बड़े स्तर पर रोजगार पैदा करना संभव नहीं है। इसलिए निजी निवेश और उद्योगों को राज्य के अपेक्षाकृत पिछड़े इलाकों तक ले जाने पर जोर दिया जा रहा है।
सिद्धारमैया की मांग DK के लिए राजनीतिक संदेश
सिद्धारमैया ने 100 दिन पर सरकार की तारीफ जरूर की है, लेकिन उनकी सलाह में कांग्रेस की आगे की राजनीति का स्पष्ट संदेश भी छिपा है।
वह चाहते हैं कि डीके शिवकुमार की सरकार विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करे, लेकिन कांग्रेस का पारंपरिक सामाजिक न्याय और गरीब कल्याण का एजेंडा पीछे न छूटे।
गारंटी योजनाओं को जारी रखने, घोषणापत्र के वादों को पूरा करने और गरीबों के हितों को प्राथमिकता देने की उनकी सलाह इसी दिशा की ओर इशारा करती है।
इसके साथ जाति सर्वेक्षण और 75 प्रतिशत आरक्षण की उनकी हालिया मांग ने यह भी साफ कर दिया है कि वह सामाजिक न्याय के मुद्दे को कर्नाटक की राजनीति के केंद्र में बनाए रखना चाहते हैं।
आगे के 500 दिन होंगे अहम
100 दिन किसी भी सरकार के पूरे कार्यकाल का छोटा हिस्सा होते हैं। असली परीक्षा आने वाले महीनों में होगी।
डीके सरकार को नई योजनाओं को जमीन पर उतारने, गारंटी योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने, निवेश और रोजगार बढ़ाने तथा कांग्रेस के अलग-अलग सामाजिक आधारों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।
वहीं सिद्धारमैया की सक्रियता पर भी नजर रहेगी। फिलहाल उन्होंने डीके शिवकुमार को चुनौती देने के बजाय उनकी सरकार को समर्थन दिया है और उसे “सही दिशा” में बताया है। लेकिन साथ ही यह याद दिलाया है कि कांग्रेस की सरकार को चुनावी वादों, गारंटी योजनाओं और गरीबों के एजेंडे से पीछे नहीं हटना चाहिए।
इसलिए 100 दिन के मौके पर सामने आया सिद्धारमैया का संदेश दो हिस्सों में पढ़ा जा सकता है—**डीके शिवकुमार के नेतृत्व को समर्थन और साथ ही सरकार की आगे की दिशा को लेकर स्पष्ट अपेक्षाएं।** कांग्रेस में “ऑल इज वेल” है या अंदरखाने खींचतान जारी है, इसका निर्णायक प्रमाण फिलहाल नहीं है; लेकिन कर्नाटक की राजनीति में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच शक्ति संतुलन पर नजरें जरूर बनी रहेंगी।
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