
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से चल रही मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान आखिरकार समाप्त हो गई है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया आज दोपहर लोकभवन पहुंचे और उन्होंने राज्यपाल के विशेष सचिव प्रभु शंकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस तरह उनका करीब तीन साल का कार्यकाल समाप्त हो गया। इस्तीफा सौंपने के बाद वे आधिकारिक रूप से मुख्यमंत्री पद से अलग हो गए, हालांकि औपचारिक प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
बताया गया है कि उस समय राज्यपाल कर्नाटक के राज्यपाल इंदौर के दौरे पर रवाना हो चुके थे, जिसके कारण इस्तीफा सीधे उन्हें नहीं सौंपा जा सका। इसी वजह से मुख्यमंत्री ने अपना इस्तीफा राज्यपाल के विशेष सचिव को सौंपा।
हालांकि प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार, किसी भी मुख्यमंत्री का इस्तीफा तब तक औपचारिक रूप से प्रभावी नहीं माना जाता जब तक राज्यपाल स्वयं उस पर हस्ताक्षर न कर दें। इसलिए, वर्तमान स्थिति में इस्तीफा स्वीकार करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
Karnataka CM Siddaramaiah submitted his resignation to Prabhu Shankar, Special Secretary to Karnataka Governor. Governor Thaawarchand Gehlot, who is out of the state, is returning tonight.
— ANI (@ANI) May 28, 2026
(Pics: Karnataka Lok Bhavan) pic.twitter.com/QF5UYFJaoq
सूत्रों का कहना है कि राज्यपाल के आज रात करीब 7:30 बजे बेंगलुरु लौटने की संभावना है। उनके लौटने के बाद ही इस्तीफे को औपचारिक मंजूरी मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद ही कर्नाटक में नए नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
राज्य में पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति बनी हुई थी। पार्टी के भीतर विभिन्न गुटों के बीच चल रही चर्चाओं और नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच यह इस्तीफा एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
कर्नाटक की राजनीति में इस घटनाक्रम के बाद अब नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व की ओर से जल्द ही नए नाम पर निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है।
फिलहाल राज्य में कार्यवाहक व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। सरकार के कामकाज पर इसका असर न पड़े, इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी विभागों का संचालन सामान्य रूप से जारी रखा जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में राज्य में नेतृत्व परिवर्तन और नई सरकार के गठन को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।
इस बीच सभी की निगाहें राज्यपाल के निर्णय और पार्टी के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेगा।





