
Karnataka कर्नाटक: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में वोटों की गिनती के दौरान “आपराधिक साजिश” की गई है। उन्होंने दावा किया कि योग्य वोटों को जानबूझकर अमान्य कर दिया गया और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार राजेगौड़ा के पक्ष में डाले गए 255 वैध वोटों को गलत तरीके से डिसक्वालिफाई कर दिया गया। उनके अनुसार, जब वोटों की गिनती हुई, उस समय राज्य में BJP की सरकार थी, और उसी दौरान मतगणना प्रक्रिया में अनियमितताएं की गईं।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बैलेट पेपर के साथ छेड़छाड़ की गई और यह पूरी घटना एक संगठित “क्रिमिनल साजिश” का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सिद्धारमैया ने यह भी स्पष्ट किया कि श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र के चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के वोट का सम्मान होना चाहिए और किसी भी तरह की गड़बड़ी स्वीकार नहीं की जा सकती।
इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर फिर से शुरू हो गया है। BJP की ओर से फिलहाल इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर बहस तेज हो गई है।
इसी दौरान पत्रकारों ने उनसे रेलवे विभाग के प्रमोशन एंट्रेंस एग्जाम को कन्नड़ भाषा में कराने को लेकर सवाल पूछा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परीक्षा केंद्र सरकार द्वारा आयोजित की जाती है, इसलिए राज्य सरकार इसमें सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति केंद्र सरकार के कन्नड़ भाषा और स्थानीय अभ्यर्थियों के प्रति रवैये को दर्शाती है। सिद्धारमैया ने संकेत दिया कि क्षेत्रीय भाषाओं को उचित सम्मान मिलना चाहिए और परीक्षाओं में स्थानीय भाषा के उपयोग पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी गड़बड़ी के आरोप और भाषा नीति से जुड़े बयान राज्य और केंद्र के बीच राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकते हैं।
फिलहाल श्रृंगेरी मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है और यह मामला आने वाले दिनों में अदालत में पहुंच सकता है। इस विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है, जहां चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।





