कर्नाटक

CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की सिद्धारमैया ने उठाई मांग, राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील

Kavita2
26 Sept 2026 4:00 PM IST
CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की सिद्धारमैया ने उठाई मांग, राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील
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बेंगलुरु। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। शनिवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज और उसकी स्वायत्तता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मामले में हस्तक्षेप की मांग भी की।

सिद्धारमैया ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उससे स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा पारदर्शी तरीके से चुनाव कराने की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग को केंद्र सरकार की इच्छा के मुताबिक काम करने के बजाय संविधान के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। ये आरोप कांग्रेस और सिद्धारमैया की ओर से लगाए गए हैं।

फ्रीडम पार्क में आयोजित प्रदर्शन चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद के बीच हुआ। कांग्रेस ने हाल के दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं।

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

सिद्धारमैया ने अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग के सदस्य संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ काम करते पाए जाते हैं तो इसकी जांच और जवाबदेही तय होनी चाहिए।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग दोहराते हुए उनके कामकाज की जांच कराने की बात कही। सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि यदि जांच में नियमों या कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

हालांकि सिद्धारमैया की ये मांगें राजनीतिक बयान और आरोप हैं। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किसी आपराधिक उल्लंघन के सिद्ध होने की जानकारी इन रिपोर्टों में नहीं दी गई है।

चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर उठाए सवाल

सिद्धारमैया ने कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक आयोग को किसी सरकार या राजनीतिक दल के प्रभाव से अलग रहकर संविधान के तहत अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया। उनका कहना था कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में भी तय संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि में एक मीडिया रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े विभिन्न निर्णयों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। यह रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हुआ।

फ्रीडम पार्क में कांग्रेस का प्रदर्शन

कर्नाटक कांग्रेस ने शनिवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सवाल उठाए तथा मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही तय करने की मांग की।

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े कुछ फैसले पर्याप्त आंतरिक सहमति के बिना लिए गए।

प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेताओं ने इसे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बताया।

SIR को लेकर चल रहा विवाद

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा इससे जुड़े प्रशासनिक फैसलों को लेकर कांग्रेस समेत विपक्ष के कई नेताओं ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की है।

हालिया विवाद तब और बढ़ गया जब आयोग के दो अन्य सदस्यों की कथित लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने और हटाने, मतदाता सूची डेटाबेस तथा SIR प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों का उल्लेख किया गया।

कांग्रेस ने इसी विवाद को लेकर देशव्यापी विरोध कार्यक्रम भी आयोजित किए। दिल्ली, पटना, जम्मू, कोलकाता, पंजाब और असम समेत कई स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे या हटाए जाने की मांग की।

सिद्धारमैया पहले भी उठा चुके हैं मुद्दा

सिद्धारमैया ने इससे पहले भी इस मामले को लेकर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की थी। 23 सितंबर को उन्होंने एक बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और चुनाव आयोग के कामकाज की जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने आयोग के भीतर कथित मतभेदों को गंभीर बताते हुए संस्थागत जवाबदेही की बात कही थी।

अब फ्रीडम पार्क में हुए प्रदर्शन के दौरान उन्होंने एक बार फिर वही मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए उनके फैसलों में निष्पक्षता और पारदर्शिता जरूरी है।

CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया

मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संविधान में विशेष प्रक्रिया निर्धारित है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। यानी केवल राष्ट्रपति के स्तर पर सीधे पद से हटाने का सामान्य प्रावधान नहीं है; इसके लिए संसद से जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया आवश्यक होती है।

इसी विवाद के बीच विपक्ष की ओर से संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव लाने की चर्चा भी सामने आई है। कांग्रेस सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि विपक्ष इस संबंध में दोनों सदनों में नोटिस देने की तैयारी कर रहा है।

फिलहाल सिद्धारमैया और कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोप और कार्रवाई की मांग राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं। फ्रीडम पार्क के प्रदर्शन के बाद चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

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