कर्नाटक

सिद्धारमैया का अंधविश्वास पर हमला, बोले- पढ़े-लिखे लोग भी मान रहे परंपराएं

Kavita2
11 July 2026 11:38 AM IST
सिद्धारमैया का अंधविश्वास पर हमला, बोले- पढ़े-लिखे लोग भी मान रहे परंपराएं
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बेंगलुरु : कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने धार्मिक मान्यताओं और अंधविश्वास को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि समाज में कई पढ़े-लिखे लोग, जिनमें डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और वैज्ञानिक भी शामिल हैं, आज भी अंधविश्वास से जुड़ी मान्यताओं का पालन करते हैं।

सिद्धारमैया ने यह टिप्पणी सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एच.एन. नागमोहन दास की पुस्तक ‘मेमोरेबल ट्रायल्स’ के विमोचन कार्यक्रम के बाद की। इस दौरान उन्होंने अपने बेटे और कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया की धार्मिक आस्था का भी जिक्र किया।

बेटे की पूजा की आदत का किया जिक्र

सिद्धारमैया ने कहा कि उनके बेटे डॉ. यतींद्र एक डॉक्टर हैं, लेकिन वह रोज पूजा करते हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद ऐसी धार्मिक गतिविधियों में विश्वास नहीं रखते, लेकिन उनके बेटे की अपनी आस्था है।

उन्होंने कहा, "मेरा बेटा डॉक्टर है, लेकिन वह हर दिन पूजा करता है। मैं ऐसा नहीं करता। मैं क्या कर सकता हूं? वह पूजा किए बिना खाना नहीं खाता या पानी नहीं पीता। यह उनका विश्वास है।"

सिद्धारमैया ने कहा कि व्यक्तिगत आस्था व्यक्ति का अपना विषय है, लेकिन उन्होंने ऐसी मान्यताओं की सामाजिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाया।

मनुवाद पर साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ परंपराएं और मान्यताएं लंबे समय से समाज में चली आ रही हैं और इन्हें मनुवादी सोच से जोड़ा जाता है।

उन्होंने कहा कि कई बार समाज में ऐसी धारणाएं बनाई गईं, जिनका असर लोगों के व्यवहार और सोच पर पड़ा। सिद्धारमैया ने कहा कि वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना जरूरी है और लोगों को तर्क के आधार पर चीजों को समझना चाहिए।

पढ़े-लिखे लोगों में भी अंधविश्वास का जिक्र

सिद्धारमैया ने कहा कि आज के दौर में भी कई शिक्षित लोग अंधविश्वास का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग भी कई बार ऐसी मान्यताओं में विश्वास करते हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि आधुनिक शिक्षा और वैज्ञानिक सोच के बावजूद समाज में ऐसी परंपराएं क्यों बनी हुई हैं।

वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की बात

अपने बयान के जरिए सिद्धारमैया ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों में तर्कसंगत सोच विकसित करना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव के लिए लोगों को सवाल पूछने और चीजों को समझने की आदत विकसित करनी चाहिए।

कार्यक्रम में कई मुद्दों पर रखी बात

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान सिद्धारमैया ने सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने न्याय व्यवस्था, समाज सुधार और विचारधारा से जुड़े विषयों पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि समाज में सुधार के लिए लोगों को जागरूक होना होगा और पुरानी मान्यताओं को तर्क की कसौटी पर परखना होगा।

बयान पर हो सकती है राजनीतिक प्रतिक्रिया

सिद्धारमैया का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कर्नाटक में धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस अक्सर तेज रहती है।

उनके इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है। कुछ लोग इसे वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने वाला बयान मान सकते हैं, जबकि कुछ इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देख सकते हैं।

आस्था और विचारधारा पर बहस

सिद्धारमैया ने अपने बयान में व्यक्तिगत आस्था और सामाजिक सोच के बीच अंतर बताया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का निजी विश्वास उसका अपना विषय है, लेकिन समाज में फैली मान्यताओं और उनके प्रभाव पर चर्चा जरूरी है।

उन्होंने अपने बेटे के उदाहरण के माध्यम से यह बताने की कोशिश की कि एक ही परिवार में भी लोगों की सोच और विश्वास अलग-अलग हो सकते हैं।

फिलहाल सिद्धारमैया के इस बयान के बाद कर्नाटक की राजनीति में नई बहस शुरू होने की संभावना है। उनका बयान धार्मिक आस्था, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक परंपराओं को लेकर चल रही बहस को फिर से सामने ले आया है।

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