कर्नाटक

मैसूर सम्मेलन में सिद्धारमैया का BJP और संघ पर हमला, मतदाता सूची को लेकर भी उठाए सवाल

Kavita2
29 Jun 2026 2:46 PM IST
मैसूर सम्मेलन में सिद्धारमैया का BJP और संघ पर हमला, मतदाता सूची को लेकर भी उठाए सवाल
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Karnataka कर्नाटक: पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने रविवार को मैसूर में आयोजित एसआईआर (SIR) जागरूकता सम्मेलन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने अपने संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन, मतदाता सूची में संशोधन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े विषयों पर टिप्पणी करते हुए कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने और लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की अपील की।

अपने भाषण के दौरान सिद्धारमैया ने वीर सावरकर को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सावरकर ने माफी मांगने के बाद जेल से रिहा होने का रास्ता चुना था। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग सावरकर का महिमामंडन करते हैं, क्या वे देश की रक्षा कर सकते हैं। उन्होंने संघ परिवार के नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए जाने चाहिए। सिद्धारमैया ने पूछा कि क्या डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और एम.एस. गोलवलकर ने अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा अंतिम चरण में हो सकती है, लेकिन पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं का राजनीतिक भविष्य अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सभी को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि यदि वे जागरूक नहीं रहेंगे तो इसका असर उनके राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है।

सिद्धारमैया ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का गठन वर्ष 1950 में हुआ था और देश का पहला आम चुनाव 1952 में आयोजित किया गया था। उनके अनुसार, चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची में संशोधन करता रहा है, लेकिन उसका काम केवल पात्र मतदाताओं का पंजीकरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि आयोग को संविधान के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों, विशेष रूप से वर्ष 2014 के बाद, चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। सिद्धारमैया ने दावा किया कि लोकतंत्र में वही सरकार वैध मानी जाती है जिसे जनता का बहुमत प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।

अपने संबोधन में उन्होंने देश की जनसंख्या और मतदाताओं के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की लगभग 141 करोड़ की आबादी में करीब 96 करोड़ मतदाता हैं। उनका कहना था कि कई विधानसभा और लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार बहुत कम मतों के अंतर से जीतते हैं। यदि किसी क्षेत्र में हजारों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हट जाते हैं, तो चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।

सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पारंपरिक मतदाता माने जाने वाले गरीब, किसान, मजदूर और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर किए जाने की आशंका को लेकर पार्टी चिंतित है। उन्होंने कहा कि इसी कारण कांग्रेस बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चला रही है, ताकि प्रत्येक पात्र मतदाता अपना नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित कर सके और मतदान के अधिकार का उपयोग कर सके।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों को मतदाता सूची की जांच करने और आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा करने के लिए प्रेरित करें। उनके अनुसार, लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदाता सूची में शामिल होना आवश्यक है।

हालांकि, सिद्धारमैया के इन आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। चुनाव आयोग लगातार यह कहता रहा है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार किया जाता है तथा पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाती है।

मैसूर में आयोजित इस सम्मेलन के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मतदाता जागरूकता बढ़ाना और चुनावी प्रक्रिया में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने को लेकर पार्टी की रणनीति पर चर्चा करना बताया गया। वहीं, सिद्धारमैया के भाषण के बाद उनके बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं।

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