कर्नाटक

पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट का चौंकाने वाला खुलासा

Kavita2
7 Nov 2026 12:03 PM IST
पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट का चौंकाने वाला खुलासा
x

बेंगलुरु। कर्नाटक में पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राज्य सरकार की ओर से कराए गए प्रयोगशाला परीक्षण में पेट्रोल के कुछ नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित सीमा से काफी अधिक पाई गई है। जांच में एक नमूने में एथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक दर्ज की गई। यह आंकड़ा भारत में लागू E20 मानक के तहत निर्धारित अधिकतम 20 प्रतिशत की सीमा से काफी ज्यादा है। इस खुलासे के बाद पेट्रोल की गुणवत्ता, ईंधन की शुद्धता और वाहन चालकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की व्यवस्था को E20 के नाम से जाना जाता है। इसके तहत पेट्रोल में अधिकतम 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का प्रावधान है। सरकार की ओर से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देने का उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है। लेकिन कर्नाटक में सामने आए लैब टेस्ट के नतीजों ने ईंधन की गुणवत्ता की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लैब टेस्ट में 31.2 प्रतिशत तक मिली एथेनॉल की मात्रा

राज्य सरकार की ओर से कराए गए प्रयोगशाला परीक्षण में पेट्रोल के नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक पाई गई। जांच के दौरान एक नमूने में एथेनॉल की मात्रा 31.2 प्रतिशत तक दर्ज की गई।

यह मात्रा E20 मानक के तहत निर्धारित 20 प्रतिशत की अधिकतम सीमा से 11.2 प्रतिशत अंक अधिक है। इस अंतर ने मामले को गंभीर बना दिया है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितने पेट्रोल पंपों से नमूने लिए गए थे और कितने नमूनों में निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल पाया गया। इसी तरह संबंधित पेट्रोल पंपों और तेल कंपनियों की पहचान भी सामने नहीं आई है।

जांच रिपोर्ट के विस्तृत विवरण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह समस्या किसी विशेष क्षेत्र या प्रतिष्ठान तक सीमित है अथवा व्यापक स्तर पर सामने आई है।

क्या है E20 पेट्रोल का मानक?

E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है, जिसमें 20 प्रतिशत तक एथेनॉल और शेष हिस्सा पेट्रोल होता है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।

भारत में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देने के पीछे कई आर्थिक और पर्यावरणीय उद्देश्य हैं। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार करने और जीवाश्म ईंधन के विकल्प विकसित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, एथेनॉल की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। E20 के लिए तैयार वाहनों और ईंधन प्रणालियों को निर्धारित मिश्रण के हिसाब से डिजाइन किया जाता है।

ऐसे में यदि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है, तो ईंधन की गुणवत्ता और वाहन के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

वाहनों के इंजन पर पड़ सकता है असर

पेट्रोल में निर्धारित मात्रा से अधिक एथेनॉल होने की स्थिति में वाहनों के प्रदर्शन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा घनत्व कम होता है। इसलिए अधिक मात्रा में एथेनॉल मिश्रित ईंधन इस्तेमाल होने पर वाहन के माइलेज में बदलाव आ सकता है।

इसके अलावा वाहन के इंजन, फ्यूल पाइप, सील और अन्य हिस्सों की अनुकूलता भी महत्वपूर्ण होती है।

विशेष रूप से पुराने वाहनों में अधिक एथेनॉल वाले ईंधन के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है। हालांकि, किसी वाहन को कितना नुकसान होगा, यह उसके इंजन की तकनीक, ईंधन प्रणाली और निर्माता की निर्धारित अनुकूलता पर निर्भर करता है।

इसलिए केवल एक लैब रिपोर्ट के आधार पर सभी वाहनों को नुकसान होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

पेट्रोल की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था पर सवाल

कर्नाटक में सामने आए इस मामले ने पेट्रोल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।

पेट्रोल पंपों पर बेचे जाने वाले ईंधन को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होना चाहिए। इसके लिए नमूनों की जांच और आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी महत्वपूर्ण होती है।

यदि किसी पेट्रोल नमूने में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई जाती है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि ऐसा किस स्तर पर हुआ।

क्या पेट्रोल की आपूर्ति के दौरान मिश्रण की मात्रा में गड़बड़ी हुई, क्या भंडारण के दौरान कोई समस्या आई या फिर वितरण व्यवस्था में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया? इन सवालों का जवाब विस्तृत जांच से ही मिल सकता है।

इसके साथ ही यह भी जरूरी होगा कि जिन नमूनों में अधिक एथेनॉल पाया गया है, उनकी दोबारा जांच कर रिपोर्ट की पुष्टि की जाए।

तेल कंपनियों और पेट्रोल पंपों की जवाबदेही होगी अहम

इस मामले में आगे की जांच के दौरान तेल कंपनियों और पेट्रोल पंपों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। पेट्रोल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन, मिश्रण, परिवहन, भंडारण और वितरण के प्रत्येक स्तर पर निर्धारित मानकों का पालन जरूरी है।

यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इसके अलावा यह भी पता लगाना होगा कि जिन पेट्रोल नमूनों में 31.2 प्रतिशत तक एथेनॉल पाया गया, वे किन स्थानों से एकत्र किए गए थे और संबंधित ईंधन की आपूर्ति कहां से हुई थी।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में किसी कंपनी या पेट्रोल पंप को दोषी घोषित नहीं किया गया है। इसलिए जांच के अंतिम निष्कर्ष आने तक किसी विशेष प्रतिष्ठान की भूमिका को लेकर दावा करना जल्दबाजी होगी।

पेट्रोल उपभोक्ताओं के बीच बढ़ सकती है चिंता

इस खुलासे के बाद पेट्रोल खरीदने वाले वाहन चालकों के मन में भी ईंधन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। आमतौर पर उपभोक्ता पेट्रोल पंप से मिलने वाले ईंधन की गुणवत्ता की स्वयं जांच नहीं कर सकते।

ऐसे में सरकारी एजेंसियों और संबंधित कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे ईंधन की गुणवत्ता की नियमित जांच करें और मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल कदम उठाएं।

वाहन चालकों को भी अपने वाहन निर्माता की ओर से निर्धारित ईंधन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

अब जांच रिपोर्ट और कार्रवाई पर नजर

कर्नाटक में पेट्रोल के नमूनों में 31.2 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलने का मामला ईंधन गुणवत्ता की निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। E20 मानक के तहत अधिकतम 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की सीमा निर्धारित है। ऐसे में लैब टेस्ट में सामने आया आंकड़ा सामान्य स्थिति से काफी अलग है।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक कैसे पहुंची और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

राज्य सरकार की विस्तृत जांच, नमूनों की पुष्टि और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई से ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल इस खुलासे ने पेट्रोल की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं को मिलने वाले ईंधन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

Next Story