कर्नाटक

मेकेदातु प्रोजेक्ट पर शिवकुमार का जोर

Kavita2
2 Aug 2026 5:41 PM IST
मेकेदातु प्रोजेक्ट पर शिवकुमार का जोर
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कर्नाटक: कावेरी नदी जल विवाद के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रविवार को कहा कि प्रस्तावित मेकेदातु प्रोजेक्ट इस विवाद का स्थायी समाधान साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि परियोजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना चुका है और अब बिना किसी और देरी के इसके निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने सर्वदलीय बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मेकेदातु परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चले आ रहे कावेरी जल विवाद को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है।

शिवकुमार ने कहा, "मेकेदातु प्रोजेक्ट स्थायी समाधान है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपना फैसला सुना चुका है और केंद्र सरकार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दे दी है।" उन्होंने कहा कि अब इस परियोजना पर आगे बढ़ने में किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

मेकेदातु परियोजना कावेरी नदी पर प्रस्तावित एक बहुउद्देश्यीय जल परियोजना है। कर्नाटक सरकार का कहना है कि इस परियोजना से राज्य की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और जल संकट की स्थिति से निपटने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा परियोजना से बिजली उत्पादन की संभावना भी बताई जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु सहित कई क्षेत्रों में बढ़ती आबादी के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है और मेकेदातु परियोजना इस आवश्यकता को पूरा करने में मददगार हो सकती है।

कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध करता रहा है और उसका कहना है कि इससे कावेरी नदी के जल प्रवाह और उसके हिस्से के पानी पर असर पड़ सकता है। वहीं, कर्नाटक का तर्क है कि मेकेदातु परियोजना का उद्देश्य अतिरिक्त पानी का उपयोग करना और राज्य की पेयजल जरूरतों को पूरा करना है।

सर्वदलीय बैठक में कावेरी विवाद को लेकर राज्य की कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया और राज्य के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने पर जोर दिया।

बैठक के बाद शिवकुमार ने कहा कि कावेरी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्य के किसानों और आम नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आजीविका और लोगों की पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कर्नाटक अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ते अपनाता रहेगा। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय बनाकर परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी।

मेकेदातु परियोजना को लेकर कर्नाटक में लंबे समय से राजनीतिक बहस चलती रही है। राज्य के कई राजनीतिक दल और किसान संगठन इसे जरूरी परियोजना बताते रहे हैं, जबकि तमिलनाडु में इसे लेकर आपत्तियां जताई जाती रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कावेरी जल विवाद केवल तकनीकी या कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह दोनों राज्यों की राजनीति और किसानों की चिंताओं से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में मेकेदातु परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया में दोनों राज्यों के बीच संवाद और केंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

फिलहाल, कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ाने के पक्ष में है और इसे राज्य की जल सुरक्षा से जोड़कर देख रही है। अब नजर इस बात पर है कि इस परियोजना को लेकर आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और तमिलनाडु की ओर से क्या रुख अपनाया जाता है।

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