कैबिनेट विवाद पर शिवकुमार सख्त, कहा- कोई पार्टी से बड़ा नहीं

बेंगलुरु : कर्नाटक में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। मंत्री पद से वंचित कई वरिष्ठ नेताओं और विधायकों ने नाराजगी जाहिर की है, जिससे पार्टी नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। इस बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि पार्टी अनुशासन से बड़ा कोई व्यक्ति नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि कोई विधायक इस्तीफा देना चाहता है तो वह उसका इस्तीफा कुछ ही मिनटों में स्वीकार कर लेंगे।
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब सोमवार को हुए कैबिनेट विस्तार में 20 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कई कांग्रेस विधायक और नेता असंतुष्ट हैं तथा कुछ ने खुलकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की है। हालांकि शिवकुमार ने कहा कि हर किसी को एक साथ मंत्री बनाना संभव नहीं है और सभी नेताओं को धैर्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन दोनों को संतुलित तरीके से चलाना उनकी प्राथमिकता है।
डीके शिवकुमार ने नाराज नेताओं को समझाने के लिए अपने राजनीतिक जीवन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि उनके साथ भी कई बार ऐसा हुआ जब उन्हें अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं मिली, लेकिन उन्होंने कभी पार्टी नहीं छोड़ी। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री एस. बंगारप्पा और धरम सिंह को भी शुरुआत में अवसर नहीं मिला था, लेकिन बाद में वे राज्य के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने कहा कि राजनीति में धैर्य और संगठन के प्रति निष्ठा सबसे महत्वपूर्ण होती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य के विभिन्न बोर्डों और निगमों का जल्द पुनर्गठन किया जाएगा। सबसे पहले पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को इन संस्थाओं में जिम्मेदारियां दी जाएंगी, उसके बाद असंतुष्ट विधायकों से चर्चा कर उन्हें भी उचित अवसर देने का प्रयास किया जाएगा। उनका कहना था कि पार्टी सभी नेताओं का सम्मान करती है और किसी की उपेक्षा नहीं की जाएगी।
इधर, सरकार के कामकाज को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त मंत्रियों को अगले ही दिन से सूखा प्रभावित जिलों का दौरा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि सभी मंत्री संबंधित जिलों में जाकर अधिकारियों के साथ राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करें तथा यह सुनिश्चित करें कि प्रभावित लोगों तक सरकारी सहायता समय पर पहुंचे। सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज करने पर है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के भीतर असंतोष कम करने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी और एचसी बालकृष्ण को विधायक कृष्णप्पा को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन दोनों नेता उनसे मुलाकात तक नहीं कर सके। इससे यह संकेत मिला कि कुछ नाराज विधायक फिलहाल पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाए हुए हैं।
विजयनगर विधानसभा क्षेत्र में भी असंतोष देखने को मिला। वहां कांग्रेस पदाधिकारियों ने विधायक कृष्णप्पा को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलने के विरोध में अपने इस्तीफे सौंप दिए। इसके साथ ही महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी जोर पकड़ने लगा है। कांग्रेस विधायक नयना मोटम्मा ने सवाल उठाया कि पार्टी की पांच महिला विधायक होने के बावजूद किसी को भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था।
इसी बीच संदूर की विधायक अन्नपूर्णा तुकाराम ने अपने पिता के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की। वहीं कांग्रेस विधायक एसआर श्रीनिवास ने मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज होकर कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि एक साधारण किसान के बेटे के लिए राजनीति में आगे बढ़ना आसान नहीं है और बिना प्रभावशाली समर्थन के अवसर मिलना मुश्किल हो गया है।
हालांकि सभी असंतुष्ट नेता टकराव के रास्ते पर नहीं हैं। बेलूर गोपालकृष्ण ने पहले इस्तीफा देने की चेतावनी दी थी, लेकिन मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और पार्टी के साथ बने रहने की घोषणा की। कांग्रेस नेतृत्व को उम्मीद है कि बातचीत और संगठनात्मक जिम्मेदारियां देकर बाकी नाराज नेताओं को भी जल्द मना लिया जाएगा। फिलहाल कैबिनेट विस्तार के बाद पैदा हुआ असंतोष कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है और आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।





