कर्नाटक

कर्नाटक में बारिश की भारी कमी, 31 जिलों में से सिर्फ दो में सामान्य बारिश दर्ज

Kavita2
19 Aug 2026 10:47 AM IST
कर्नाटक में बारिश की भारी कमी, 31 जिलों में से सिर्फ दो में सामान्य बारिश दर्ज
x

बेंगलुरु। कर्नाटक में इस साल मानसून की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली बनी हुई है। राज्य के ज्यादातर जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, 31 जिलों में से केवल दो जिलों में ही अब तक सामान्य बारिश हुई है, जबकि कई जिलों में बारिश की कमी गंभीर स्तर तक पहुंच गई है।

18 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, मैसूरु, विजयनगर और चामराजनगर जैसे जिलों में सामान्य से आधी से भी कम बारिश दर्ज की गई है। इन जिलों में बारिश की कमी ने किसानों और आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मैसूरु जिले में सामान्य से 57 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं विजयनगर में 56 प्रतिशत और चामराजनगर में 51 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। कम बारिश के कारण खेती, जल स्रोतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

जुलाई के मुकाबले अगस्त में बिगड़े हालात

जानकारी के अनुसार, जुलाई के अंत तक कर्नाटक में चार जिले ऐसे थे, जहां सामान्य बारिश दर्ज की गई थी। सामान्य बारिश का मतलब औसत बारिश से 20 प्रतिशत अधिक या 20 प्रतिशत कम बारिश को माना जाता है।

लेकिन अगस्त के मध्य तक स्थिति बदल गई और सामान्य बारिश वाले जिलों की संख्या घटकर केवल दो रह गई। अब सिर्फ बेलगावी और बागलकोट जिले ऐसे हैं, जहां बारिश सामान्य स्तर के आसपास बनी हुई है।

बारिश की कमी वाले जिलों की संख्या बढ़ने से राज्य में सूखे जैसी स्थिति को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। हालांकि, प्रशासन और मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

किसानों पर पड़ रहा असर

कर्नाटक की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। मानसून की कमजोर स्थिति का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, वहां बुवाई और फसल की वृद्धि प्रभावित होने की संभावना है।

किसानों का कहना है कि बारिश में देरी और कमी के कारण खेतों में नमी की समस्या बढ़ रही है। कई इलाकों में किसान सिंचाई के लिए वैकल्पिक साधनों पर निर्भर हो रहे हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो कुछ जिलों में फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

जल संकट की आशंका

कम बारिश का असर केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि जल स्रोतों पर भी दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रों में तालाब, जलाशय और छोटे जल स्रोत पर्याप्त रूप से नहीं भर पाए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती है। प्रशासन को ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर जल प्रबंधन की तैयारी करने की जरूरत है।

मानसून की चाल पर टिकी नजर

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की गतिविधियां लगातार बदलती रहती हैं। कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी बाद में पूरी हो सकती है, लेकिन इसके लिए अगले कुछ सप्ताह महत्वपूर्ण होंगे।

कर्नाटक में दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रदर्शन इस साल कई क्षेत्रों में कमजोर रहा है। हालांकि, कुछ जिलों में अच्छी बारिश भी हुई है, लेकिन राज्य के बड़े हिस्से में बारिश का वितरण असमान रहा है।

प्रशासन ने शुरू की निगरानी

बारिश की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों द्वारा जल उपलब्धता, फसल स्थिति और संभावित जरूरतों की समीक्षा की जा रही है।

कृषि विभाग भी किसानों को मौसम के अनुसार खेती करने और पानी के बेहतर प्रबंधन की सलाह दे रहा है। जिन क्षेत्रों में बारिश कम हुई है, वहां किसानों को वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए कहा जा रहा है।

आगे बारिश की उम्मीद

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की स्थिति में बदलाव संभव है। आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। यदि अच्छी बारिश होती है तो कई जिलों में बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।

फिलहाल राज्य के 31 जिलों में से अधिकांश जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज होने के कारण स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बेलगावी और बागलकोट को छोड़कर बाकी जिलों में बारिश की कमी राज्य के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Next Story