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कर्नाटक में सूखे का भीषण संकट, गदग के खेतों में पड़ी दरारें

Kavita2
28 Oct 2026 11:22 AM IST
कर्नाटक में सूखे का भीषण संकट, गदग के खेतों में पड़ी दरारें
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गदग। कर्नाटक में इस साल मानसून की बेरुखी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य के गदग जिले में सूखे के कारण कृषि गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल होम्बला गांव में किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। जनवरी 2026 से इलाके में पर्याप्त और नियमित बारिश नहीं होने के कारण खेत सूख गए हैं और फसलें खराब हो रही हैं। कई किसानों ने खेती बंद कर अपनी जमीन खाली छोड़ दी है। कुछ किसान मिट्टी की नमी बचाने के लिए खेतों में रेत और छोटे पत्थर बिछा रहे हैं। लगातार तीसरे साल प्राकृतिक परिस्थितियों की मार झेल रहे किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। होम्बला निवासी किसान प्रकाश अन्नगेरी ने चार एकड़ जमीन पर मलेशियाई शरीफा और नारियल की खेती में हजारों रुपये लगाए थे, लेकिन इस साल सूखे ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब किसानों ने राज्य और केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता तथा फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।

होम्बला गांव में सूखे से खेत हुए वीरान

गदग जिले का होम्बला गांव इस वर्ष सूखे से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। गांव और आसपास के इलाकों में लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं हुई है।

कई खेतों में फसलें सूख चुकी हैं, जबकि कुछ किसानों ने नुकसान की आशंका को देखते हुए खेती का काम रोक दिया है।

पानी की कमी से जमीन की ऊपरी सतह तेजी से सूख रही है। ऐसे में किसानों के सामने मिट्टी की नमी बनाए रखने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

कुछ किसानों ने अपने खेतों की ऊपरी परत पर रेत और छोटे पत्थर फैलाए हैं। उनका मानना है कि यदि बारिश होती है तो इस उपाय से मिट्टी में नमी कुछ समय तक बनी रह सकती है।

हालांकि, लंबे समय तक बारिश नहीं होने पर ऐसे उपाय भी पर्याप्त साबित नहीं होते।

चार एकड़ खेत में लगाई थी मलेशियाई शरीफा और नारियल की फसल

गदग निवासी प्रकाश अन्नगेरी की कहानी इलाके के कई किसानों की परेशानियों को सामने लाती है।

प्रकाश के पास होम्बला गांव में चार एकड़ कृषि भूमि है। वह पिछले दो वर्षों से अपने भाइयों के सहयोग से यहां मलेशियाई शरीफा और नारियल की खेती कर रहे हैं।

उन्होंने अच्छी पैदावार की उम्मीद में पौधे लगाने और उनके रखरखाव पर हजारों रुपये खर्च किए।

लेकिन इस वर्ष बारिश की कमी ने उनकी योजनाओं को प्रभावित कर दिया है।

प्रकाश का कहना है कि लगातार सूखे के कारण खेती का काम रोकना पड़ा है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश होती है तो कुछ फसलों को बचाने की संभावना बन सकती है।

उनके अनुसार, बोरवेल की सुविधा वाले किसानों को भी पानी की कमी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

दो साल ज्यादा बारिश, तीसरे साल सूखे ने तोड़ी कमर

प्रकाश अन्नगेरी और आसपास के किसानों की परेशानी केवल इस वर्ष तक सीमित नहीं है।

वर्ष 2024 और 2025 में इलाके में सामान्य से अधिक बारिश हुई थी। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा था।

इन दोनों वर्षों में किसानों को जलभराव से फसलें खराब होने के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

अब वर्ष 2026 में स्थिति बिल्कुल उलट हो गई है। इस बार पर्याप्त बारिश नहीं होने से पौधे सूख रहे हैं और खेती मुश्किल हो गई है।

लगातार तीन वर्षों से मौसम की विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रहे किसानों के लिए खेती में निवेश की रकम निकालना भी चुनौती बन गया है।

किसानों का कहना है कि कभी अत्यधिक बारिश और कभी भीषण सूखे से उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।

सरकारी नौकरी छोड़ खेती में आए थे प्रकाश

प्रकाश अन्नगेरी पहले कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम में चालक के रूप में काम करते थे।

कोविड महामारी के बाद उन्होंने पूर्णकालिक खेती करने का फैसला किया।

शुरुआत में उन्होंने बैंगन, टमाटर और दूसरी सब्जियों की खेती की। लगभग तीन वर्ष पहले अच्छी पैदावार मिलने से उनका उत्साह बढ़ा।

इसके बाद उन्होंने व्यावसायिक फसलों की खेती करने की योजना बनाई।

इसी उद्देश्य से उन्होंने मलेशियाई शरीफा और नारियल के पौधे लगाए।

लेकिन मौसम की अनिश्चितता के कारण उनकी योजनाएं सफल नहीं हो सकीं। पहले अत्यधिक बारिश से नुकसान हुआ और अब सूखे ने खेती को प्रभावित कर दिया।

प्रकाश के मुताबिक, खेती से बेहतर आय प्राप्त करने की उम्मीद थी, लेकिन लगातार नुकसान ने आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी है।

कर्नाटक में 55 साल का सबसे खराब मानसून

कर्नाटक में इस साल मानसून की स्थिति बेहद चिंताजनक रही है।

कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में जून से सितंबर 2026 के दौरान सामान्य से लगभग 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई।

राज्य में इस अवधि के दौरान सामान्यतः 852 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस वर्ष केवल 551 मिलीमीटर वर्षा हुई।

बताया जा रहा है कि वर्ष 1971 के बाद यह मानसून की सबसे बड़ी कमी है।

इससे पहले वर्ष 2002 में राज्य में लगभग 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी।

बारिश की इस कमी से कृषि, बागवानी और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ गया है।

गदग में 49 प्रतिशत बारिश की कमी का दावा

गदग जिले में सूखे की गंभीरता को लेकर स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चिंता जताई गई है।

सितंबर में कर्नाटक के मंत्री एचके पाटिल ने बताया था कि गदग तालुक में सामान्य से लगभग 49 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

उन्होंने दावा किया था कि जिले में बारिश की कमी के कारण लगभग 86 प्रतिशत फसलों को नुकसान पहुंचा है।

पाटिल ने राज्य सरकार से गदग तालुक को सूखा प्रभावित घोषित करने की मांग भी की थी।

उन्होंने कहा था कि किसानों की स्थिति लगातार खराब हो रही है और उन्हें तत्काल सहायता की आवश्यकता है।

हालांकि, फसल नुकसान का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा संबंधित विभागों के विस्तृत आकलन पर निर्भर करेगा।

किसानों पर कर्ज और आर्थिक संकट का दबाव

लगातार फसल नुकसान के कारण गदग जिले के किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

कई किसानों ने खेती के लिए बीज, खाद, पौधे और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदने में बड़ी रकम खर्च की थी।

लेकिन फसल खराब होने के कारण उनकी लागत भी वापस नहीं मिल पा रही है।

जिले के लक्कालकट्टी गांव में पिछले सप्ताह 53 वर्षीय किसान संगय्या कलकय्या हिरेमठ की आत्महत्या से मौत होने का मामला भी सामने आया था।

परिवार के अनुसार, किसान ने निजी और सहकारी संस्थाओं से लगभग 16 लाख रुपये का कर्ज लिया था और लगातार दो बार फसल नुकसान का सामना किया था।

इस घटना ने किसानों की आर्थिक परेशानियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, आत्महत्या की परिस्थितियों का अंतिम निर्धारण जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।

किसानों ने राज्य और केंद्र सरकार से मांगा मुआवजा

गदग जिले के प्रभावित किसानों ने राज्य और केंद्र सरकार से फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।

किसानों का कहना है कि लगातार नुकसान के कारण उनके पास अगली फसल लगाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचे हैं।

सितंबर में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गदग जिले के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था।

उन्होंने खेतों में जाकर खराब फसलों का निरीक्षण किया और किसानों से बातचीत की।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से सूखे की स्थिति का आकलन करने तथा प्रभावित तालुकों की सूची की समीक्षा करने को कहा था।

उन्होंने भरोसा दिलाया था कि निर्धारित मानदंडों के आधार पर सूखा प्रभावित क्षेत्रों को राहत देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

बारिश का इंतजार कर रहे किसान

होम्बला और आसपास के इलाकों में किसानों की उम्मीदें अब आने वाले दिनों की बारिश पर टिकी हैं।

प्रकाश अन्नगेरी सहित कई किसान चाहते हैं कि जल्द पर्याप्त बारिश हो, ताकि बची हुई फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।

हालांकि, जिन फसलों को गंभीर क्षति पहुंच चुकी है, उनकी पूरी भरपाई केवल बारिश से संभव नहीं होगी।

किसानों के सामने अगली बुवाई, सिंचाई की व्यवस्था और आर्थिक संसाधन जुटाने जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

गदग जिले में सूखे की स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अनियमित मानसून पर निर्भर खेती में किसानों के सामने जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं।

फिलहाल प्रभावित किसानों को सरकारी सहायता, पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं और फसल नुकसान के समय पर आकलन की जरूरत है।

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