
मैसूर (कर्नाटक): कर्नाटक के प्रसिद्ध मैसूर दशहरा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। विजयादशमी के दिन निकलने वाली ऐतिहासिक जंबू सवारी के लिए इस साल शामिल होने वाले हाथियों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जंबू सवारी मैसूर दशहरा उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होती है, जिसमें सजे-धजे हाथियों का भव्य जुलूस निकाला जाता है।
इस वर्ष दशहरा उत्सव सामान्य वर्षों की तुलना में कुछ देर से आयोजित होने के कारण हाथियों के चयन की प्रक्रिया में भी देरी हुई है। हालांकि, प्रशासन ने अब तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है।
हाई पावर कमेटी की बैठक से पहले शुरू हुआ चयन
अधिकारियों के अनुसार, दशहरा हाई पावर कमेटी की बैठक शुक्रवार को होने की संभावना है। इस बैठक में उत्सव की तैयारियों, कार्यक्रमों और व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे।
बैठक से पहले ही दशहरा जंबू सवारी में शामिल होने वाले हाथियों की पहचान और चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वन विभाग के अधिकारी हाथियों के स्वास्थ्य, उम्र, व्यवहार और जुलूस में भाग लेने की क्षमता जैसे विभिन्न पहलुओं की जांच कर रहे हैं।
जंबू सवारी में हाथियों की होती है अहम भूमिका
मैसूर दशहरा की जंबू सवारी सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। इस भव्य जुलूस में मुख्य हाथी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, जो स्वर्ण हौदे को लेकर चलता है।
हर साल वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम ऐसे हाथियों का चयन करती है, जो शारीरिक रूप से मजबूत हों और बड़ी भीड़, शोर और लंबे जुलूस के दौरान शांत रह सकें।
हाथियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
चयन प्रक्रिया के दौरान हाथियों के स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। पशु चिकित्सकों की टीम हाथियों की शारीरिक जांच करती है और यह सुनिश्चित करती है कि वे जंबू सवारी जैसी बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह फिट हैं।
इसके अलावा हाथियों के प्रशिक्षण, उनके पिछले अनुभव और भीड़ के बीच उनके व्यवहार का भी मूल्यांकन किया जाता है।
दशहरा उत्सव की तैयारियों में तेजी
मैसूर दशहरा देश-विदेश में प्रसिद्ध है और हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक इसे देखने पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से सुरक्षा, यातायात, पर्यटकों की सुविधाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।
जंबू सवारी को देखने के लिए हजारों लोग मैसूर पहुंचते हैं। इस दौरान महल परिसर से लेकर जुलूस के पूरे मार्ग को विशेष रूप से सजाया जाता है।
देर से होने के कारण बदला कार्यक्रम
अधिकारियों के अनुसार, इस बार दशहरा उत्सव की तारीखों में बदलाव के कारण तैयारियों का समय भी प्रभावित हुआ है। आमतौर पर हाथियों के चयन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया पहले शुरू हो जाती है, लेकिन इस साल यह प्रक्रिया कुछ देर से शुरू हुई।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि समय पर सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी और दशहरा उत्सव परंपरागत भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा।
पर्यटकों को आकर्षित करता है मैसूर दशहरा
मैसूर दशहरा कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। रोशनी से जगमगाता मैसूर पैलेस, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जंबू सवारी इस उत्सव को खास बनाते हैं।
हर साल देश-विदेश से पर्यटक इस ऐतिहासिक आयोजन को देखने आते हैं। प्रशासन का प्रयास रहता है कि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिले और परंपरा भी पूरी गरिमा के साथ निभाई जाए।
चयन के बाद शुरू होगा प्रशिक्षण
हाथियों के अंतिम चयन के बाद उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें उन्हें जुलूस के माहौल, संगीत, भीड़ और मार्ग की परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाता है।
वन विभाग और दशहरा आयोजन समिति मिलकर हाथियों की देखभाल और प्रशिक्षण की पूरी व्यवस्था करती है।
मैसूर दशहरा की जंबू सवारी के लिए हाथियों के चयन की शुरुआत के साथ ही इस साल के भव्य आयोजन की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। अब सभी की नजरें हाई पावर कमेटी की बैठक और चुने जाने वाले दशहरा हाथियों की सूची पर टिकी हैं।





