
बेंगलुरु: विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ बीजेपी नेता आर. अशोक ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से लोगों के यहां की गई छापेमारी को किसी पूरे समुदाय का अपमान नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि ED की छापेमारी से बचने के लिए जाति का सहारा लेना सही नहीं है।
शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए अशोक ने कहा, "यह सतीश जारकीहोली के विभाग पर हमला नहीं है। यह सिर्फ़ एक जांच है। इसे दलितों पर हमले के तौर पर नहीं दिखाया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि अगर वोक्कालिगा, कुरुबा और दूसरे समुदायों के नेताओं के यहां छापेमारी को पूरी जाति का अपमान माना जाए, तो ED को सिर्फ़ उन लोगों के यहां छापेमारी करनी होगी जिनकी कोई जाति नहीं है।
शिवकुमार की सरकार के 100 दिन पूरे होने पर निशाना साधते हुए अशोक ने कहा कि सरकार ने प्रचार-प्रसार पर ज़्यादा खर्च किया है। उन्होंने कहा कि किसानों और आम लोगों को शिवकुमार एक रियल एस्टेट एजेंट जैसे लगते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार में बहुत ज़्यादा कन्फ्यूजन और अव्यवस्था है और मुख्यमंत्री इससे निपटने के बजाय मंदिरों के चक्कर लगाने में व्यस्त हैं।





