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Gadag गदग: कर्नाटक के ऐतिहासिक गांव लक्कुंडी में पुरातात्विक महत्व को और उजागर करने के लिए राज्य सरकार ने उत्खनन कार्य का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। यह कदम हाल ही में हुई उन महत्वपूर्ण खोजों के बाद उठाया गया है, जिन्होंने इस क्षेत्र को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
सरकार का उद्देश्य इस ऐतिहासिक स्थल को एक प्रमुख विरासत केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके तहत लक्कुंडी में बड़े पैमाने पर पुरातात्विक खुदाई और खोज कार्य जारी है, ताकि क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर को सामने लाया जा सके।
इस चरण में सरकार ने एक सप्ताह के भीतर लगभग 2000 कलाकृतियों को सामने लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन कलाकृतियों में प्राचीन मूर्तियां, स्थापत्य अवशेष और ऐतिहासिक संरचनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रमाण मिलने की संभावना जताई जा रही है।
इसके साथ ही सरकार ने दीर्घकालिक योजना के तहत वर्ष 2026 के अंत तक बड़े स्तर पर विरासत संरचनाओं को उजागर करने का लक्ष्य रखा है। योजना के अनुसार, कम से कम 50 सीढ़ीदार कुएं और 50 प्राचीन मंदिरों को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
लक्कुंडी क्षेत्र पहले से ही अपनी ऐतिहासिक और स्थापत्य धरोहर के लिए जाना जाता है। यहां पाई जाने वाली संरचनाएं चालुक्य काल की वास्तुकला और संस्कृति को दर्शाती हैं, जो इसे पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती हैं।
पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में अभी भी कई ऐतिहासिक रहस्य छिपे हो सकते हैं, जिन्हें इन खुदाई कार्यों के माध्यम से उजागर किया जा सकता है। यह खोज न केवल इतिहास को समझने में मदद करेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।
सरकार की इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि उत्खनन और संरक्षण कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह परियोजना सफल होती है, तो लक्कुंडी देश के प्रमुख विरासत स्थलों में शामिल हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी पहचान मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, लक्कुंडी में शुरू किया गया यह पुरातात्विक उत्खनन अभियान ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने और उसे दुनिया के सामने लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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