
बेंगलुरु। कर्नाटक के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों की तैनाती पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में शिक्षकों के SIR ड्यूटी में लगे होने से स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा दूसरे सरकारी कार्यों में लगाने की व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए अलग कानून लाने की तैयारी कर रही है।
मधु बंगारप्पा ने शुक्रवार को कहा कि सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों की मुख्य जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाना है। लेकिन मतदाता सूची संशोधन, विभिन्न सर्वेक्षणों और दूसरे प्रशासनिक कार्यों में उनकी तैनाती होने से कक्षाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही तो विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम भी प्रभावित हो सकते हैं।
मंत्री के मुताबिक SIR से जुड़े काम के कारण शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है। स्कूलों में नियमित पढ़ाई और दूसरी शैक्षणिक गतिविधियों को जारी रखने के साथ शिक्षकों को निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को SIR कार्य से मुक्त करने के लिए चुनाव आयोग से अनुरोध किया गया था, लेकिन राज्य सरकार को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली।
राज्य सरकार अब इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित कानून का मसौदा तैयार किया गया है और उसे अन्य सरकारी विभागों की राय के लिए भेजा गया है। इसका उद्देश्य सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को SIR, जनगणना और चुनाव संबंधी गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने को नियंत्रित करना है।
प्रस्तावित व्यवस्था में गैर-शिक्षक कर्मचारियों की एक अलग सूची तैयार करने का प्रावधान सामने आया है। इसके तहत राज्य सरकार के विभागों, वैधानिक बोर्डों, निगमों, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों जैसे उपलब्ध मानव संसाधनों का इस्तेमाल पहले करने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। इन संसाधनों के उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में ही शिक्षकों की तैनाती पर विचार करने का प्रस्ताव है।
मंत्री ने कहा कि शिक्षक बच्चों की शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनका अधिकतम समय स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ रहना चाहिए। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा पहले ही कई तरह की चुनौतियों से जुड़ी होती है। यदि उपलब्ध शिक्षकों में से भी बड़ी संख्या को लंबे समय तक अन्य कार्यों में लगा दिया जाता है तो इसका असर नियमित कक्षाओं पर पड़ना स्वाभाविक है।
शिक्षकों की SIR ड्यूटी से स्कूलों में उत्पन्न स्थिति को लेकर अभिभावकों और विद्यार्थियों की ओर से भी शिकायतें सामने आने की बात मंत्री ने कही। उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण कक्षाएं ठीक तरीके से संचालित नहीं होने की शिकायतें मिली हैं। कुछ स्कूलों में दोपहर के भोजन के बाद विद्यार्थियों को घर भेजे जाने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।
बेंगलुरु के कुछ सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की SIR ड्यूटी के प्रभाव को लेकर हाल में रिपोर्ट भी सामने आई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक काइकॉन्ड्राहल्ली के एक स्कूल में आठ में से सात शिक्षक SIR कार्य में लगाए गए थे, जबकि कुछ अन्य स्कूलों में भी बड़ी संख्या में शिक्षक इस काम में तैनात थे। कर्नाटक के स्कूल शिक्षा आयुक्त विकास किशोर सुरलकर ने भी कहा था कि बेंगलुरु में करीब 15 से 20 प्रतिशत शिक्षक SIR कार्य में लगाए गए हैं और शैक्षणिक गतिविधियों पर इसका असर पड़ा है।
मधु बंगारप्पा का कहना है कि सरकार चुनाव या दूसरे आवश्यक सार्वजनिक कार्यों की जरूरत को समझती है, लेकिन स्कूल चलने के दौरान शिक्षकों को लंबे समय तक गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों में लगाना बच्चों की पढ़ाई के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। इसी वजह से सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती है जिसमें अन्य उपलब्ध सरकारी कर्मचारियों का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
मंत्री ने विभिन्न सरकारी सर्वेक्षणों में भी शिक्षकों की लगातार तैनाती की व्यवस्था पर सवाल उठाया। उनके मुताबिक जाति सर्वेक्षण और दूसरे प्रशासनिक सर्वे जैसे कार्यों के लिए बार-बार शिक्षकों पर निर्भर रहने की परंपरा में बदलाव की जरूरत है। सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य इसी समस्या का समाधान निकालना बताया जा रहा है।
यह मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब स्कूलों में परीक्षाओं से जुड़ी गतिविधियां भी चल रही हैं। मंत्री ने चिंता जताई कि अगर महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवधि में शिक्षक स्कूलों में उपलब्ध नहीं रहेंगे तो विद्यार्थियों की परीक्षा की तैयारी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने शिक्षकों की प्रभावी पढ़ाई को विद्यार्थियों के बेहतर प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण बताया।
सरकार का प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मसौदे पर विभिन्न विभागों की राय लेने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद प्रस्ताव को आगे की सरकारी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में ही देखा जा रहा है।
SIR में शिक्षकों की तैनाती का मामला केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इससे स्कूलों में उपलब्ध शिक्षकों की संख्या और विद्यार्थियों को मिलने वाले पढ़ाई के समय का सवाल भी जुड़ गया है। राज्य सरकार का पक्ष है कि बच्चों की शिक्षा प्रभावित किए बिना निर्वाचन और दूसरे सरकारी कार्यों के लिए वैकल्पिक मानव संसाधन की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
मधु बंगारप्पा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भविष्य में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने को नियंत्रित करने के लिए कानूनी व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। मसौदे पर विभागीय प्रक्रिया पूरी होने और आगे की मंजूरियों के बाद ही इसकी अंतिम रूपरेखा स्पष्ट होगी। फिलहाल SIR ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती और इससे स्कूलों की पढ़ाई पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर राज्य में चर्चा तेज हो गई है।





