बेल्लारी: सुप्रीम कोर्ट (SC) ने संदूर मैंगनीज एंड आयरन ओर्स लिमिटेड (SMIORE) द्वारा दायर एक स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को खारिज कर दिया। इस याचिका में कंपनी ने बेल्लारी में अपनी माइनिंग लीज के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस (FC) के विस्तार हेतु कर्नाटक सरकार द्वारा लगाई गई शर्तों को चुनौती दी थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें हाई कोर्ट ने सरकार द्वारा कंपनी को जारी किए गए डिमांड नोटिस को सही ठहराया था। हाई कोर्ट ने पहले फैसला सुनाया था कि सरकार द्वारा जारी किया गया डिमांड नोटिस कानूनी रूप से वैध था और याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहत नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट ने वन संरक्षण अधिनियम के तहत लगाए गए शुल्कों और भूमि हस्तांतरण की आवश्यकताओं को भी सही ठहराया था।
याचिका खारिज होने के बाद, SMIORE को अब 714.90 हेक्टेयर की क्षतिपूर्ति वन भूमि उपलब्ध करानी होगी और वन विभाग को क्षतिपूर्ति वनीकरण शुल्क के रूप में 131.25 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।





