
बेंगलुरु। कर्नाटक में प्रवर्तन निदेशालय की जांच और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली को डी.के. शिवकुमार मंत्रिमंडल से तत्काल हटाने की मांग की है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे मंत्री को जांच पूरी होने तक पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने मांग की कि ईडी की जांच पूरी होने और आरोपों से बेगुनाह साबित होने तक जारकीहोली को कैबिनेट से बाहर रखा जाए।
आर. अशोक ने इस मामले को पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र से जोड़ते हुए कहा कि बीजेपी अब सरकार के ‘दूसरे विकेट’ का इंतजार कर रही है। उनके इस बयान का आशय मंत्रिमंडल से दूसरे मंत्री के इस्तीफे या हटाए जाने से है। बीजेपी का दावा है कि ईडी की ओर से सामने आए बयान ने पीडब्ल्यूडी मंत्री की भूमिका और सरकारी ठेकों से जुड़े कथित धन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विपक्ष के नेता ने कहा कि इतने गंभीर आरोपों का सामना करने वाला कोई भी मंत्री जांच के दौरान अपने संवैधानिक पद पर नहीं रह सकता। उनके अनुसार पद पर बने रहने से जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले में राजनीतिक बचाव करने के बजाय मंत्री को पद से हटाकर जांच पूरी होने दी जाए।
आर. अशोक ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की जनता के पैसे को विदेश में किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन और सरकारी ठेकों से जुड़ी राशि के कथित दुरुपयोग का मामला बेहद गंभीर है। यदि किसी मंत्री पर इस तरह के आरोप सामने आते हैं तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह तत्काल जवाबदेही तय करे।
बीजेपी नेता ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए इसे राहुल गांधी की कथित ‘एटीएम सरकार’ बताया। उन्होंने कहा कि ईडी के बयान के बाद राज्य सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं। आर. अशोक का आरोप है कि पीडब्ल्यूडी के ठेकों से एकत्र किए गए पैसे को विदेश में सोने की खदानों से जुड़े निवेश में लगाया गया।
उन्होंने दावा किया कि मंत्री सतीश जारकीहोली पर पीडब्ल्यूडी कॉन्ट्रैक्ट से कथित तौर पर जुटाई गई राशि को विदेश में गोल्ड माइनिंग के लिए इस्तेमाल करने के आरोप हैं। हालांकि ये आरोप विपक्ष और ईडी से जुड़ी सामने आई जानकारी के आधार पर लगाए गए हैं। इनकी अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
बीजेपी ने सवाल उठाया कि यदि पीडब्ल्यूडी ठेकों से जुड़ी राशि विदेश में निवेश किए जाने की आशंका सामने आई है तो सरकार को इस पर तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए। पार्टी का कहना है कि यह मामला केवल किसी एक मंत्री तक सीमित नहीं है बल्कि विभागीय ठेकों की पारदर्शिता और सार्वजनिक धन की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
विपक्ष के नेता ने कहा कि ईडी की जांच पूरी होने तक जारकीहोली का पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री को अपना पक्ष रखने और जांच में सहयोग करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए, लेकिन निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्हें कैबिनेट से हटाया जाना आवश्यक है। आरोपों से मुक्त होने की स्थिति में उनके बारे में आगे फैसला लिया जा सकता है।
आर. अशोक ने पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र के मामले का उल्लेख करते हुए कांग्रेस सरकार पर दबाव बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने संकेत दिया कि बीजेपी अब एक और मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद कर रही है। ‘दूसरे विकेट’ वाले बयान के माध्यम से उन्होंने दावा किया कि सरकार के अन्य मंत्रियों पर भी जांच का दायरा बढ़ सकता है।
कर्नाटक की राजनीति में ‘एटीएम सरकार’ शब्द का इस्तेमाल विपक्ष की ओर से कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार और धन संग्रह के आरोप लगाने के लिए किया जा रहा है। आर. अशोक ने इसी राजनीतिक आरोप को दोहराते हुए कहा कि ईडी से जुड़ी जानकारी ने बीजेपी के आरोपों को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से भी इस मामले पर जवाब मांगा।
बीजेपी का कहना है कि पीडब्ल्यूडी राज्य के महत्वपूर्ण विभागों में शामिल है और इसके माध्यम से बड़ी संख्या में सार्वजनिक निर्माण कार्य तथा सरकारी ठेके संचालित होते हैं। ऐसे विभाग के मंत्री पर वित्तीय अनियमितता से जुड़े आरोप लगना सरकार की जवाबदेही का विषय है। पार्टी ने मांग की कि पीडब्ल्यूडी से जुड़े संबंधित ठेकों और वित्तीय लेनदेन की पूरी जांच होनी चाहिए।
आर. अशोक ने कहा कि राज्य की जनता कर और अन्य माध्यमों से सरकार को पैसा देती है ताकि उसका उपयोग विकास कार्यों में हो। ऐसे धन के कथित रूप से विदेश में निजी निवेश के लिए इस्तेमाल होने का आरोप गंभीर चिंता पैदा करता है। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि आरोपों में उल्लिखित राशि का स्रोत क्या था और उसका पीडब्ल्यूडी ठेकों से कोई संबंध था या नहीं।
विपक्ष की मांग है कि सरकार मंत्री को पद से हटाकर यह संदेश दे कि जांच को प्रभावित करने की कोई कोशिश नहीं होगी। बीजेपी नेताओं का कहना है कि मंत्री पद पर मौजूद व्यक्ति के पास प्रशासनिक अधिकार और विभागीय प्रभाव होता है। इसलिए जांच के दौरान पद पर बने रहने से निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा हो सकता है।
दूसरी ओर आरोपों पर सतीश जारकीहोली अथवा राज्य सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आई है। मंत्री का पक्ष सामने आने के बाद ही उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों और विपक्ष की मांग पर सरकार की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल बीजेपी ने इस मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक जवाबदेही से जोड़ते हुए सरकार पर हमला तेज कर दिया है।
ईडी की जांच अभी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। इसलिए मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांचाधीन माना जा रहा है। किसी भी व्यक्ति की दोषसिद्धि अदालत और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होती है। बीजेपी ने भी अपनी मांग में कहा है कि जांच पूरी होने और मंत्री के बेगुनाह साबित होने तक उन्हें कैबिनेट से बाहर रखा जाए।
इस विवाद के बाद कर्नाटक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है। बीजेपी इस मामले को विधानसभा के भीतर और बाहर उठा सकती है। वहीं कांग्रेस सरकार के सामने मंत्री का बचाव करने या जांच पूरी होने तक कोई प्रशासनिक फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है।
फिलहाल आर. अशोक के बयान ने सतीश जारकीहोली और पीडब्ल्यूडी ठेकों से जुड़े कथित धन के मामले को प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। विपक्ष मंत्री को हटाने पर अड़ा है और सरकार से तत्काल जवाब मांग रहा है। अब सभी की नजर ईडी की आगे की जांच और कांग्रेस सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।





