
कर्नाटक : कांग्रेस के प्रभावशाली नेता सतीश जारकीहोली और उनके परिवार से जुड़े लोगों तक प्रवर्तन निदेशालय की जांच का दायरा पहुंचने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। बताया जा रहा है कि जारकीहोली के जीजा मंजूनाथ से शुरू हुआ मामला अब परिवार के अन्य सदस्यों तक पहुंच गया है। इस कार्रवाई के बाद सतीश जारकीहोली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा और ईडी के तलाशी अभियान के तरीके पर सवाल उठाए।
सतीश जारकीहोली ने कहा कि उनकी संपत्तियों पर चलाया गया तलाशी अभियान राजनीतिक कारणों से प्रेरित हो सकता है अथवा उन पर लगाए गए आरोपों से इसका संबंध हो सकता है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को जिन दस्तावेजों की आवश्यकता थी उन्हें सामान्य नोटिस जारी करके भी हासिल किया जा सकता था। ऐसी स्थिति में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाने की जरूरत क्यों पड़ी यह सवाल पैदा करता है।
जारकीहोली ने स्पष्ट किया कि उन्होंने ईडी अधिकारियों के साथ जांच में सहयोग किया है। अधिकारियों की ओर से पूछे गए सभी सवालों के जवाब दिए गए हैं। जिन विषयों के बारे में उनके पास तत्काल पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी उनके लिए उन्होंने कुछ समय मांगा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उन्हें कोई नोटिस जारी किया जाता है तो वह उसका जवाब देंगे।
कांग्रेस नेता ने इस मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका होने की आशंका भी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि इसके पीछे ‘बड़ी मछलियां’ शामिल हो सकती हैं। ईडी की कार्रवाई ने उनके मन में संदेह पैदा किया है। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया और न ही अपनी आशंका के समर्थन में कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की।
सतीश जारकीहोली ने कहा कि जांच एजेंसी को कानून के अनुसार अपना काम करने का अधिकार है लेकिन इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता होनी चाहिए। उन्होंने तलाशी अभियान के समय और तरीके को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि दस्तावेज हासिल करने के लिए पहले नोटिस देने का विकल्प अपनाया जा सकता था। यदि उनसे आधिकारिक रूप से जानकारी मांगी जाती तो वह जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए तैयार थे।
ईडी की कार्रवाई के बाद मामला राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस से जुड़े नेता इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बता सकते हैं जबकि विपक्ष इस कार्रवाई के आधार पर सरकार और सत्तारूढ़ दल से जवाब मांग सकता है। हालांकि जांच एजेंसी की ओर से मामले के सभी तथ्यों और तलाशी में मिली सामग्री के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
सतीश जारकीहोली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि वह जांच से पीछे नहीं हट रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने जो भी प्रश्न पूछे उनका जवाब दिया गया है। कुछ सवाल ऐसे थे जिनकी जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं थी इसलिए उनका उत्तर देने के लिए समय मांगा गया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विधिवत नोटिस मिलने पर वह जवाब प्रस्तुत करेंगे।
परिवार के सदस्यों तक जांच का दायरा पहुंचने की खबर ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। जारकीहोली के जीजा मंजूनाथ से संबंधित विषय के बाद पिता-पुत्र और बेटी का नाम भी चर्चा में आया है। हालांकि संबंधित लोगों पर लगे आरोपों और मामले में उनकी भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
ईडी आमतौर पर आर्थिक अपराधों और धनशोधन से संबंधित मामलों में जांच करती है। किसी स्थान पर तलाशी लिए जाने का अर्थ अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं होता। तलाशी और पूछताछ जांच की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने और एजेंसी द्वारा मांगे गए दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। इस मामले में भी आगे की कार्रवाई उपलब्ध दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
जारकीहोली की ओर से तलाशी को संभावित रूप से राजनीति से प्रेरित बताए जाने के बाद केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर पुरानी राजनीतिक बहस फिर तेज हो सकती है। विपक्षी दलों द्वारा कई बार आरोप लगाया जाता रहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जाता है। दूसरी तरफ जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई को कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई प्रक्रिया बताती हैं।
इस मामले में जारकीहोली ने कोई सीधा आरोप लगाने के बजाय संभावना और संदेह जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित हो सकती है या फिर यह उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित हो सकती है। उनके इस बयान से साफ है कि वह ईडी की कार्रवाई की आवश्यकता और उसके पैमाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
जांच के दौरान एजेंसी संबंधित संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण कर सकती है। यदि किसी जानकारी में अंतर मिलता है तो संबंधित लोगों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। जारकीहोली ने कहा है कि वह अपने पास उपलब्ध जानकारी अधिकारियों को देंगे और नोटिस जारी होने पर नियमानुसार जवाब दाखिल करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपने समर्थकों और जनता के सामने यह संदेश देने का प्रयास किया कि वह जांच में सहयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने ईडी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर मामले के राजनीतिक पहलू को भी सामने रखा। अब जांच एजेंसी के अगले कदम और कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।
सतीश जारकीहोली कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके और परिवार के सदस्यों से जुड़ी ईडी की कार्रवाई का राज्य की राजनीति पर असर पड़ना स्वाभाविक है। विपक्ष इस मामले को कांग्रेस सरकार के खिलाफ मुद्दा बना सकता है जबकि कांग्रेस अपने नेता के बचाव में एजेंसी की कार्रवाई पर सवाल उठा सकती है।
फिलहाल जारकीहोली ने अपने खिलाफ किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार करने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि वह अधिकारियों के प्रश्नों का जवाब देते रहेंगे। मामले की वास्तविक स्थिति ईडी की आधिकारिक रिपोर्ट, भविष्य में जारी होने वाले नोटिस और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट हो सकेगी।





