
Karnataka कर्नाटक :हाईकोर्ट ने संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर पर व्यंग्यात्मक नाटक के प्रदर्शन के मामले में जैन यूनिवर्सिटी के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए केस को रद्द कर दिया है।
जी हां.. कर्नाटक हाईकोर्ट ने जैन सेंटर फॉर मैनेजमेंट के छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ दर्ज केस को यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि व्यंग्यात्मक नाटक संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत संरक्षित है। कोर्ट ने कहा है कि नाटक में दलितों पर अत्याचार करने की कोई मंशा नहीं थी।
इस मामले की सुनवाई करने वाली जस्टिस एसआर कृष्णकुमार की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केस को आगे बढ़ने देना 'कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग' होगा। 6 फरवरी को लालबाग रोड पर जैन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर मैनेजमेंट स्टडीज यूथ फेस्ट के तहत आयोजित इस नाटक ने काफी विवाद खड़ा कर दिया था। नाटक में संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर के बारे में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों ने दलित संगठनों को नाराज कर दिया था। 6 फरवरी को आरोप लगे थे कि कॉलेज के यूथ फेस्टिवल कार्यक्रम में मैड ऐड डिस्प्ले ने अंबेडकर और दलितों का अपमान किया है।
उन्होंने न केवल 'बीर अंबेडकर, डोंट टच मी, टच मी' गाना बजाकर उनका मजाक उड़ाया, बल्कि एक विवादित नाटक भी पेश किया, जिसमें पूछा गया कि 'जब आप डी-लिट हैं तो दलित क्यों हैं?' विवाद बढ़ने पर कॉलेज प्रबंधन ने बिना शर्त माफी मांगी।
इतना ही नहीं, नाटक करने वाले 6 छात्रों को अनुशासन समिति ने निलंबित भी कर दिया। इसी तरह, इस मामले में 11 फरवरी को बेंगलुरु के सिद्धपुर पुलिस स्टेशन में प्रिंसिपल समेत 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर बेंगलुरु साउथ डिवीजन के समाज कल्याण अधिकारी की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई।





