कर्नाटक

मन की बात में निंगम्मा की सफलता को सलाम

Kavita2
31 Aug 2026 10:20 AM IST
मन की बात में निंगम्मा की सफलता को सलाम
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बेंगलुरु : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में बेंगलुरु की एक महिला स्ट्रीट वेंडर की सफलता की कहानी का जिक्र करते हुए महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की मिसाल पेश की। पीएम मोदी ने बेंगलुरु के मगाडी रोड पर इडली और डोसा बेचने वाली टी. एस. निंगम्मा की मेहनत और संघर्ष की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने निंगम्मा की कहानी को देश की उन लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बताया, जो छोटे स्तर पर अपना काम शुरू कर आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि निंगम्मा की सफलता यह दिखाती है कि सही अवसर और सरकारी योजनाओं की मदद मिलने पर मेहनत करने वाले लोग अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

हासन से बेंगलुरु तक का सफर

टी. एस. निंगम्मा मूल रूप से कर्नाटक के हासन जिले की रहने वाली हैं। बेहतर रोजगार और परिवार की आजीविका चलाने के लिए वह बेंगलुरु आईं। शुरुआत में उनके सामने कई चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने पति के साथ मिलकर एक छोटे कारोबार की शुरुआत की।

निंगम्मा और उनके पति ने बेंगलुरु के होसहल्ली मेट्रो स्टेशन के पास एक छोटे से ठेले पर इडली, डोसा और सांभर बेचना शुरू किया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने स्वाद और गुणवत्ता पर ध्यान दिया, जिससे धीरे-धीरे उनके खाने को लोगों का प्यार मिलने लगा।

उनके ठेले पर आने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी, लेकिन कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें आर्थिक मदद की जरूरत थी।

PM स्वनिधि योजना बनी सहारा

निंगम्मा के जीवन में केंद्र सरकार की माइक्रो क्रेडिट योजना ‘पीएम स्वनिधि’ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस योजना के जरिए उन्हें अपने छोटे कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता मिली।

पीएम स्वनिधि योजना का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी और छोटे दुकानदारों को बिना बड़ी आर्थिक परेशानी के अपना व्यवसाय बढ़ाने में मदद करना है। निंगम्मा ने इस योजना से मिली सहायता का उपयोग अपने फूड कार्ट को बेहतर बनाने और कारोबार को व्यवस्थित करने में किया।

आर्थिक मदद मिलने के बाद उन्होंने अपने काम करने के तरीके में कई बदलाव किए। उन्होंने कच्चे सामान को थोक में खरीदना शुरू किया, जिससे लागत कम हुई और मुनाफा बढ़ा।

ग्राहकों की पसंद के अनुसार बढ़ाया मेन्यू

निंगम्मा ने सिर्फ आर्थिक मदद पर निर्भर रहने के बजाय अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए नए तरीके अपनाए। उन्होंने ग्राहकों की पसंद को समझते हुए अपने मेन्यू में नए व्यंजन शामिल किए।

इडली, डोसा और सांभर के अलावा उन्होंने खाने की अन्य चीजों को भी जोड़ना शुरू किया। इससे ग्राहकों की संख्या बढ़ी और उनका छोटा सा ठेला धीरे-धीरे एक सफल कारोबार में बदलने लगा।

उनकी मेहनत, बेहतर प्रबंधन और ग्राहकों के प्रति समर्पण ने उनके छोटे व्यवसाय को नई पहचान दिलाई।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल

प्रधानमंत्री मोदी ने निंगम्मा की कहानी को महिला सशक्तिकरण का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और अपने दम पर सफलता हासिल कर रही हैं।

निंगम्मा की कहानी यह बताती है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी सही योजना, मेहनत और सरकारी सहायता से बड़ा रूप ले सकता है।

उन्होंने साबित किया कि आत्मनिर्भर बनने के लिए केवल बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती, बल्कि मेहनत, लगन और अवसरों का सही इस्तेमाल भी जरूरी होता है।

पीएम स्वनिधि से हजारों छोटे कारोबारियों को मदद

पीएम स्वनिधि योजना देशभर के लाखों स्ट्रीट वेंडर्स के लिए मददगार साबित हुई है। इस योजना के तहत छोटे व्यापारियों को शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे वे अपने कारोबार को दोबारा खड़ा कर सकें और उसे आगे बढ़ा सकें।

निंगम्मा की कहानी इसी योजना के प्रभाव को दिखाती है। आर्थिक सहायता मिलने के बाद उन्होंने अपने व्यवसाय को मजबूत किया और अपनी आय बढ़ाने में सफलता हासिल की।

‘मन की बात’ में मिली पहचान

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम ‘मन की बात’ में निंगम्मा का जिक्र होने के बाद उनकी कहानी देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। उनकी सफलता अब उन लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है, जो छोटे व्यवसाय के जरिए अपने परिवार की स्थिति सुधारने का सपना देखते हैं।

निंगम्मा ने साबित किया कि मेहनत, आत्मविश्वास और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उनकी कहानी आत्मनिर्भर भारत के उस संकल्प को मजबूत करती है, जिसमें छोटे कारोबारियों और आम नागरिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

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