कर्नाटक

बिजनेस चलाना बड़ी चुनौती: डीके शिवकुमार

Kavita2
2 Sept 2026 3:48 PM IST
बिजनेस चलाना बड़ी चुनौती: डीके शिवकुमार
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बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मौजूदा दौर में कारोबार चलाने और रोजगार पैदा करने को बेहद चुनौतीपूर्ण काम बताते हुए कहा कि उद्यमियों को आर्थिक दबाव से लेकर बैंकिंग प्रक्रियाओं तक कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कारोबार शुरू करना जितना मुश्किल है, उसे लगातार आगे बढ़ाना और लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है। राज्य सरकार उद्यमियों और व्यापारिक संगठनों के साथ मजबूती से खड़ी है।

डी.के. शिवकुमार बेंगलुरु में 'उबंटू कंसोर्टियम ऑफ वुमन एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन्स' की ओर से आयोजित 'टुगेदर वी ग्रो' के पांचवें संस्करण और 'इंटरनेशनल वुमन एंटरप्रेन्योरशिप डे' के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में महिला उद्यमियों और विभिन्न व्यावसायिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवकुमार ने अपने बचपन से जुड़ा एक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने कहा कि वह अपने अंकल की देखरेख में बड़े हुए और उनसे कारोबार तथा जीवन की आर्थिक चुनौतियों के बारे में काफी कुछ सीखा। उन्होंने बताया कि उनके अंकल अपने अनुभवों के आधार पर अक्सर आर्थिक दबाव को लेकर एक बात कहा करते थे।

शिवकुमार ने कहा, “जब मैं छोटा था तो मेरे अंकल कहते थे कि अगर तुम सौ चप्पलें भी खा लो तो गुजारा हो सकता है, लेकिन बहुत सारा पैसा नहीं खा सकते।” उन्होंने कहा कि उनके अंकल अपने अनुभव से यह समझाते थे कि जिंदगी और कारोबार में आर्थिक चुनौतियों, मुश्किल परिस्थितियों और वित्तीय दबाव को संभालना आसान नहीं होता।

उन्होंने मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि कारोबार के लिए लोन लेना भी आसान प्रक्रिया नहीं है। बैंक ऋण देते समय कई तरह के दस्तावेज मांगते हैं और उद्यमियों को पूरी प्रक्रिया के दौरान कई औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है। कारोबार में पहले से मौजूद आर्थिक दबाव के बीच वित्तीय जरूरतों को पूरा करना उद्यमियों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन जाता है।

शिवकुमार ने कहा कि किसी भी व्यवसाय को सफलतापूर्वक चलाने के पीछे केवल पूंजी ही नहीं बल्कि लगातार मेहनत, धैर्य और जोखिम उठाने की क्षमता भी जरूरी होती है। उद्यमी अपनी पूंजी और समय लगाने के साथ-साथ कई लोगों की आजीविका की जिम्मेदारी भी उठाता है।

उन्होंने कहा कि नौकरी करना और रोजगार उपलब्ध कराना दोनों अलग-अलग तरह की जिम्मेदारियां हैं। एक उद्यमी जब कारोबार स्थापित करता है तो वह केवल अपने लिए आय का जरिया तैयार नहीं करता, बल्कि कई परिवारों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करता है। ऐसे में एक एम्प्लॉयर के रूप में काम करना तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण होता है।

कार्यक्रम में महिला उद्यमिता पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं का कारोबार और उद्योग के क्षेत्र में आगे आना आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। महिला उद्यमियों के सामने कई बार सामान्य व्यावसायिक चुनौतियों के साथ सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी होती हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में महिलाएं नए उद्यम स्थापित कर रही हैं और रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं।

'टुगेदर वी ग्रो' जैसे आयोजनों को महिला उद्यमियों के बीच नेटवर्किंग, अनुभव साझा करने और नए व्यावसायिक अवसर तलाशने के महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाली महिला उद्यमियों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और अपने व्यवसाय को विस्तार देने का अवसर मिलता है।

शिवकुमार ने अपने संबोधन में उद्यमियों को भरोसा दिलाया कि सरकार व्यापार और उद्योग जगत की समस्याओं को समझती है। उन्होंने कहा कि सरकार FKCCI जैसे संगठनों के साथ खड़ी है और उद्योग तथा कारोबार के विकास के लिए सहयोग देने को तैयार है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास में छोटे और मध्यम कारोबारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने से लेकर बाजार में नई सेवाएं और उत्पाद उपलब्ध कराने तक उद्यमियों का योगदान व्यापक होता है। इसलिए कारोबार के अनुकूल वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।

शिवकुमार के मुताबिक, उद्यमियों की सफलता का फायदा केवल किसी एक व्यक्ति या कंपनी को नहीं मिलता, बल्कि इसका असर पूरे आर्थिक तंत्र पर पड़ता है। नया व्यवसाय शुरू होने पर रोजगार बढ़ता है, बाजार में मांग पैदा होती है और दूसरी छोटी इकाइयों को भी काम मिलता है। इस कारण उद्यमिता को प्रोत्साहित करना आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उद्यमियों को वित्तीय संसाधनों तक आसान पहुंच की जरूरत है। कारोबार शुरू करने या विस्तार करने के लिए पूंजी सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक होती है। ऐसे में बैंकिंग प्रक्रियाओं और जरूरी दस्तावेजों को लेकर आने वाली व्यावहारिक समस्याएं कारोबारियों पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

महिला उद्यमियों के कार्यक्रम में शिवकुमार का यह बयान ऐसे समय आया है जब स्टार्टअप, छोटे उद्योग और स्वरोजगार को आर्थिक विकास तथा रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। सरकारें भी महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों पर जोर दे रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान शिवकुमार ने कारोबार की चुनौतियों को अपने निजी अनुभवों से जोड़ते हुए उद्यमियों के संघर्ष को रेखांकित किया। उन्होंने साफ किया कि व्यवसाय चलाना केवल लाभ कमाने का माध्यम नहीं, बल्कि जोखिम और जिम्मेदारियों से भरी प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा कि कारोबार चलाना, रोजगार पैदा करना और एक नियोक्ता बनना आसान नहीं है। इसके बावजूद जो लोग जोखिम उठाकर नए व्यवसाय शुरू करते हैं और दूसरों को रोजगार देते हैं, उनका आर्थिक विकास में अहम योगदान है। सरकार ऐसे उद्यमियों और उद्योग संगठनों के साथ सहयोग जारी रखेगी।

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