कर्नाटक

बेंगलुरु में पार्किंग शुल्क पर बवाल, सरकार वापस ले सकती है प्रस्ताव

Kavita2
26 Oct 2026 11:17 AM IST
बेंगलुरु में पार्किंग शुल्क पर बवाल, सरकार वापस ले सकती है प्रस्ताव
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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में घरों के सामने वाहन पार्क करने पर सालाना शुल्क लगाने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर विवाद बढ़ गया है। ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के प्रस्तावित पार्किंग नियम-2026 में आवासीय संपत्तियों के सामने पार्किंग के लिए सालाना 25 हजार से 40 हजार रुपये तक शुल्क वसूलने का प्रावधान किया गया था। हालांकि जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के कड़े विरोध के बाद राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर रही है। शहरी विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार, अंतिम नियमों से इस विवादित प्रावधान को हटाया जा सकता है। बीटीएम लेआउट के विधायक और मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने भी शुरुआत में ही सरकार से इस नीति की समीक्षा करने का आग्रह किया था।

घर के सामने पार्किंग पर सालाना शुल्क का प्रस्ताव

बेंगलुरु में वाहनों की पार्किंग व्यवस्था को नियंत्रित करने के उद्देश्य से प्रस्तावित जीबीए पार्किंग नियम-2026 का मसौदा तैयार किया गया था।

इस मसौदे में आवासीय संपत्तियों के सामने वाहन खड़ा करने पर सालाना शुल्क लगाने का प्रावधान शामिल था।

प्रस्ताव के अनुसार, मकान मालिकों को अपने भूखंड के आकार के आधार पर शुल्क देना पड़ सकता था।

इसकी राशि 25 हजार रुपये से लेकर 40 हजार रुपये सालाना तक निर्धारित करने का प्रस्ताव था।

हालांकि यह व्यवस्था अभी प्रस्तावित मसौदे का हिस्सा है। इसे अंतिम रूप देकर लागू किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

अब विरोध के बाद सरकार इस प्रावधान को हटाने पर विचार कर रही है।

25 हजार से 40 हजार रुपये तक देना पड़ सकता था शुल्क

प्रस्तावित पार्किंग नीति के अनुसार, आवासीय भूखंडों के आकार के आधार पर शुल्क की अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की जानी थीं।

इसके तहत मकान मालिकों को घर के सामने पार्किंग के लिए हर साल 25 हजार से 40 हजार रुपये तक का भुगतान करना पड़ सकता था।

इतनी बड़ी राशि का सालाना शुल्क लगाने के प्रस्ताव से लोगों में नाराजगी सामने आई।

नागरिकों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता था, विशेष रूप से उन परिवारों के लिए जिनके पास वाहन रखने की पर्याप्त निजी पार्किंग व्यवस्था नहीं है।

हालांकि प्रस्तावित शुल्क किन-किन भूखंड श्रेणियों पर लागू होना था, इसका पूरा विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

जनता के विरोध के बाद सरकार कर रही समीक्षा

शहरी विकास विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित नियमों के खिलाफ बड़ी संख्या में आपत्तियां सामने आई हैं।

आम जनता के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी इस व्यवस्था का विरोध किया है।

इसके बाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारी विवादित प्रावधान की समीक्षा कर रहे हैं।

शहरी विकास विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, जनता की ओर से कई आपत्तियां मिलने के बाद इस नियम पर दोबारा विचार किया जा रहा है।

अधिकारी ने संकेत दिया कि अंतिम पार्किंग नियमों से घरों के सामने पार्किंग पर सालाना शुल्क लगाने वाला प्रावधान हटाया जा सकता है।

हालांकि सरकार ने अभी इसे वापस लेने का अंतिम आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है।

मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने भी जताई थी आपत्ति

बीटीएम लेआउट विधानसभा क्षेत्र के विधायक और मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने प्रस्तावित पार्किंग नीति पर शुरुआत में ही सवाल उठाए थे।

उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।

रामलिंगा रेड्डी का यह रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि प्रस्ताव के खिलाफ केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधि भी सामने आए हैं।

इससे सरकार पर नीति की समीक्षा करने का दबाव बढ़ा है।

हालांकि मंत्री ने प्रस्ताव के किन-किन बिंदुओं पर विस्तृत आपत्ति दर्ज कराई थी, इसका पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है।

आम नागरिकों पर बढ़ सकता था आर्थिक बोझ

घर के सामने पार्किंग के लिए सालाना शुल्क लगाने के प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर आवासीय संपत्तियों के मालिकों पर पड़ सकता था।

यदि यह नियम लागू होता, तो संबंधित मकान मालिकों को हर साल निर्धारित राशि का भुगतान करना पड़ता।

25 हजार से 40 हजार रुपये तक का शुल्क कई परिवारों के मासिक बजट पर भी असर डाल सकता था।

विशेष रूप से ऐसे लोगों के लिए परेशानी बढ़ सकती थी, जो लंबे समय से अपने घरों के सामने उपलब्ध स्थान पर वाहन खड़े करते रहे हैं।

हालांकि सार्वजनिक सड़क पर पार्किंग का अधिकार और निजी संपत्ति पर वाहन खड़ा करने का अधिकार अलग-अलग कानूनी विषय हैं।

इसलिए किसी भी पार्किंग व्यवस्था में सड़क की उपलब्धता, यातायात सुरक्षा और स्थानीय नियमों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।

बेंगलुरु में पार्किंग की समस्या बड़ी चुनौती

बेंगलुरु देश के प्रमुख महानगरों में शामिल है।

शहर में बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और सीमित सड़क स्थान के कारण पार्किंग प्रबंधन एक महत्वपूर्ण शहरी चुनौती बना हुआ है।

कई आवासीय इलाकों में सड़क किनारे वाहन खड़े होने से यातायात प्रभावित हो सकता है।

आपातकालीन वाहनों की आवाजाही और पैदल यात्रियों की सुविधा भी पार्किंग व्यवस्था से जुड़ी होती है।

ऐसे में शहर के लिए व्यवस्थित पार्किंग नीति तैयार करना आवश्यक है।

हालांकि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करते समय नागरिकों की आर्थिक स्थिति और व्यावहारिक कठिनाइयों का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण होता है।

सार्वजनिक आपत्तियों को मिल रहा महत्व

प्रस्तावित जीबीए पार्किंग नियम-2026 पर आई आपत्तियों के बाद विभागीय समीक्षा शुरू होना महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

किसी भी सार्वजनिक नीति का मसौदा तैयार करने के बाद नागरिकों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया लेना प्रशासनिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

इससे नीति के संभावित प्रभावों को समझने और आवश्यक सुधार करने में मदद मिलती है।

बेंगलुरु के मामले में घरों के सामने पार्किंग शुल्क का प्रस्ताव सबसे अधिक विवादित प्रावधानों में शामिल हो गया है।

अब विभाग इस पर पुनर्विचार कर रहा है।

हालांकि अन्य प्रस्तावित पार्किंग नियमों में भी बदलाव होंगे या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

अंतिम नियमों से हट सकता है विवादित प्रावधान

शहरी विकास विभाग के अधिकारी के अनुसार, वरिष्ठ स्तर पर पार्किंग शुल्क संबंधी प्रावधान की समीक्षा चल रही है।

संभावना जताई गई है कि अंतिम अधिसूचना में घरों के सामने पार्किंग पर सालाना शुल्क लगाने की व्यवस्था शामिल नहीं की जाएगी।

यदि ऐसा होता है, तो प्रस्तावित 25 हजार से 40 हजार रुपये तक के सालाना शुल्क से संबंधित मकान मालिकों को राहत मिल सकती है।

हालांकि यह अभी संभावित निर्णय है।

सरकार की ओर से अंतिम नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किस प्रावधान को बरकरार रखा गया है और किसे हटाया गया है।

पार्किंग व्यवस्था में संतुलन बनाने की चुनौती

शहर में पार्किंग नियमों का उद्देश्य यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और उपलब्ध सार्वजनिक स्थानों का उचित उपयोग सुनिश्चित करना होता है।

लेकिन ऐसी नीतियों को लागू करते समय नागरिकों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का भी आकलन जरूरी है।

बेंगलुरु में प्रस्तावित सालाना शुल्क के विरोध ने इसी चुनौती को सामने रखा है।

एक ओर शहर में पार्किंग व्यवस्था सुधारने की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर लोगों की आपत्तियों को भी ध्यान में रखना होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य रूप से किसी भी शहरी पार्किंग नीति में स्पष्ट नियम, उचित शुल्क निर्धारण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन महत्वपूर्ण होता है।

सरकारी फैसले का इंतजार

फिलहाल बेंगलुरु में घरों के सामने पार्किंग के लिए सालाना शुल्क लगाने की प्रस्तावित व्यवस्था पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

शहरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस प्रावधान की समीक्षा कर रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के विरोध के बाद इसे अंतिम नियमों से हटाए जाने की संभावना बढ़ गई है।

मंत्री रामलिंगा रेड्डी पहले ही सरकार से पुनर्विचार करने की मांग कर चुके हैं।

अब शहर के मकान मालिकों और वाहन चालकों की नजर सरकार की अंतिम अधिसूचना पर रहेगी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि 25 हजार से 40 हजार रुपये तक का पार्किंग शुल्क अभी लागू नहीं हुआ है। यह प्रस्तावित नियमों का हिस्सा था, जिसे विरोध के बाद वापस लिए जाने की संभावना है। अंतिम फैसला सरकार की आधिकारिक अधिसूचना से स्पष्ट होगा।

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