कर्नाटक

GPS और ड्रोन सर्वे पर मचा बवाल आर अशोक का आरोप गलत माप से भेजे जा रहे दोगुने टैक्स के नोटिस

Kavita2
22 Sept 2026 11:01 AM IST
GPS और ड्रोन सर्वे पर मचा बवाल आर अशोक का आरोप गलत माप से भेजे जा रहे दोगुने टैक्स के नोटिस
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बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा विधायक आर. अशोक ने बेंगलुरु में प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) और कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अशोक का कहना है कि GPS और ड्रोन सर्वे में कथित तकनीकी गलतियों के कारण कई संपत्तियों का क्षेत्रफल वास्तविकता से अधिक दर्ज किया जा रहा है और इसके आधार पर नागरिकों को अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और जुर्माने के नोटिस भेजे जा रहे हैं। यह विपक्ष की ओर से लगाया गया आरोप है; ऐसे नोटिसों की वैधता और प्रत्येक संपत्ति के वास्तविक क्षेत्रफल का निर्धारण संबंधित रिकॉर्ड और जांच पर निर्भर करेगा।

मंगलवार को सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक ने सरकार के 'ब्रांड बेंगलुरु' अभियान पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर को बेहतर बनाने के नाम पर आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने GBA की सर्वे प्रक्रिया की समीक्षा करने और गलत नोटिसों के कारण परेशान हो रहे संपत्ति मालिकों को राहत देने की मांग उठाई।

ड्रोन सर्वे की सटीकता पर सवाल

बेंगलुरु में संपत्तियों का आकलन करने के लिए तकनीक आधारित सर्वे का इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक ड्रोन और GPS आधारित प्रक्रिया में कुछ संपत्ति मालिकों ने माप और मैपिंग को लेकर शिकायतें की हैं। एक स्थानीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शेड, छाया, छत पर मौजूद पाइप या शीट जैसी चीजों को भी कुछ मामलों में अतिरिक्त निर्माण के रूप में दर्ज किए जाने की शिकायत है।

इसी मुद्दे को लेकर आर. अशोक ने सरकार पर निशाना साधा है। उनका आरोप है कि अधिकारियों की गलतियों का आर्थिक बोझ आम नागरिकों पर नहीं डाला जाना चाहिए।

उन्होंने अपने बयान में 'ब्रांड बेंगलुरु' का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या इसका अर्थ आम आदमी से टैक्स के नाम पर ज्यादा पैसा वसूलना और उसे लगातार परेशान करना है। उनकी टिप्पणी राजनीतिक आरोप है और सरकार तथा GBA का विस्तृत पक्ष सामने आने पर पूरे विवाद की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

संपत्ति का क्षेत्रफल बढ़ने की शिकायत

विवाद का प्रमुख मुद्दा संपत्तियों के क्षेत्रफल में कथित अंतर है। प्रॉपर्टी टैक्स की गणना में संपत्ति के आकार, उसके उपयोग और अन्य निर्धारित मानकों की भूमिका होती है। इसलिए रिकॉर्ड में वास्तविक क्षेत्रफल से ज्यादा निर्माण दर्ज हो जाए तो टैक्स की राशि प्रभावित हो सकती है।

अशोक का आरोप है कि GPS और ड्रोन सर्वे के दौरान ऐसी गलतियां हुई हैं और उसके बाद नागरिकों को अधिक टैक्स जमा करने के लिए नोटिस भेजे गए।

कुछ संपत्ति मालिकों ने ऑनलाइन भी ऐसे नोटिस मिलने की शिकायत की है, जिनमें पिछले वर्षों के टैक्स को लेकर अतिरिक्त मांग की गई। हालांकि अलग-अलग मामलों में नोटिस का आधार और वास्तविक संपत्ति रिकॉर्ड अलग हो सकते हैं।

पिछले पांच वर्षों का बकाया भी मुद्दा

स्थानीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ मामलों में संपत्ति मालिकों को पिछले पांच वर्षों के कथित बकाया टैक्स के साथ ब्याज और जुर्माने की मांग का सामना करना पड़ रहा है। इससे उन लोगों में भी चिंता पैदा हुई है जो दावा करते हैं कि वे नियमित रूप से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करते आए हैं।

GBA की मौजूदा ऑनलाइन प्रॉपर्टी टैक्स प्रणाली में भी डिफॉल्ट की स्थिति में ब्याज की गणना का प्रावधान दर्ज है। आधिकारिक पोर्टल पर भुगतान, रसीद और संपत्ति से जुड़ी समस्याओं के लिए संबंधित राजस्व अधिकारियों से संपर्क की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है।

ऐसे में अगर सर्वे डेटा में कोई त्रुटि होती है तो संपत्ति मालिकों के लिए उसे समय पर ठीक करवाना महत्वपूर्ण हो जाता है।

अशोक ने कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना

आर. अशोक ने इस पूरे मामले को कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि टेक्नोलॉजी के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है और गलत सर्वे के लिए नागरिकों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

अशोक ने इसे आम लोगों की जेब पर बोझ डालने वाला कदम बताते हुए सवाल उठाया कि सर्वे में गलती अगर प्रशासन की है तो उसका भुगतान संपत्ति मालिक क्यों करें।

यह पहली बार नहीं है जब बेंगलुरु में संपत्ति कर को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। इससे पहले ई-खाता और प्रॉपर्टी टैक्स व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष सरकार और नगर प्रशासन पर सवाल उठा चुका है। मार्च 2026 में भी अशोक ने विधानसभा में ई-खाता व्यवस्था और संपत्ति मालिकों की शिकायतों का मुद्दा उठाया था।

अलग 'सॉफ्टवेयर चार्ज' पर भी विवाद

इसी बीच बेंगलुरु में प्रॉपर्टी टैक्स बिल से जुड़ा एक और मुद्दा चर्चा में है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक GBA ने आवासीय संपत्तियों पर सालाना ₹200 और व्यावसायिक संपत्तियों पर ₹1,000 का 'सॉफ्टवेयर चार्ज' लगाया है। इस शुल्क को लेकर भी कुछ संपत्ति मालिकों और नागरिक समूहों ने सवाल उठाए हैं।

यह शुल्क ड्रोन सर्वे से जुड़े विवाद से अलग विषय है, लेकिन दोनों मुद्दों के एक साथ सामने आने से शहर में प्रॉपर्टी टैक्स व्यवस्था को लेकर बहस तेज हुई है।

ग्राउंड वेरिफिकेशन की उठ रही मांग

तकनीक आधारित सर्वे का उद्देश्य संपत्ति रिकॉर्ड को अधिक सटीक बनाना और टैक्स व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। लेकिन किसी संपत्ति के डिजिटल सर्वे और वास्तविक स्थिति में अंतर होने पर भौतिक सत्यापन महत्वपूर्ण हो जाता है।

स्थानीय स्तर पर यह मांग उठी है कि विवादित मामलों में केवल ड्रोन या GPS डेटा के आधार पर अंतिम टैक्स मांग तय करने के बजाय ग्राउंड लेवल पर संपत्ति की जांच की जाए।

इससे यह पता लगाया जा सकता है कि रिकॉर्ड में दर्ज अतिरिक्त निर्माण वास्तव में मौजूद है या तकनीकी सर्वे में किसी छाया, अस्थायी ढांचे अथवा दूसरे हिस्से को गलत तरीके से शामिल किया गया है।

नागरिकों की शिकायतों का समाधान बड़ी चुनौती

बेंगलुरु जैसे विशाल महानगर में लाखों संपत्तियों के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और सत्यापन बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया है। टेक्नोलॉजी इसके लिए मददगार हो सकती है, लेकिन गलत डेटा की स्थिति में नागरिकों के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।

GBA के आधिकारिक प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल पर रसीद, नाम और अन्य टैक्स संबंधी समस्याओं के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क की व्यवस्था दी गई है।

आर. अशोक के आरोपों के बाद यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है। एक तरफ विपक्ष सर्वे की कथित गलतियों को लेकर सरकार को घेर रहा है, वहीं वास्तविक स्थिति हर संपत्ति के रिकॉर्ड, सर्वे डेटा और भौतिक सत्यापन से तय होगी। विवाद का केंद्र यही है कि आधुनिक तकनीक से टैक्स व्यवस्था को अधिक सटीक बनाने की प्रक्रिया में किसी नागरिक पर गलत आकलन के कारण अतिरिक्त बोझ न पड़े।

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