कर्नाटक

बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट पर बयानबाज़ी तेज, MLA बालकृष्ण ने किया बचाव

Kavita2
20 May 2026 11:16 AM IST
बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट पर बयानबाज़ी तेज, MLA बालकृष्ण ने किया बचाव
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के मगादी से विधायक एच.सी. बालकृष्ण ने बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट का जोरदार बचाव करते हुए कहा है कि इस परियोजना के लिए अधिसूचित की गई जमीन को पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के कार्यकाल के दौरान ‘रेड ज़ोन’ घोषित किया गया था। उनके इस बयान के बाद परियोजना को लेकर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

विधायक बालकृष्ण ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है और इसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस टाउनशिप प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकांश किसान इसके पक्ष में हैं और विकास कार्यों को लेकर सकारात्मक रुख रखते हैं।

स्थानीय किसानों की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कथित रूप से “ज़हरीले हालात” के कारण किसान अपनी फसलें बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। साथ ही, कई किसानों को अपनी जमीन बेचने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

बालकृष्ण के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत किसान इस परियोजना के लिए अपनी जमीन देने को तैयार हैं, जबकि केवल 30 प्रतिशत लोग ही इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि विरोध करने वाला एक छोटा वर्ग है, जबकि अधिकांश किसान विकास के पक्ष में हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव आएगा। उनके अनुसार, इस परियोजना के तहत कावेरी नदी का पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे जल संकट की समस्या काफी हद तक कम हो सकेगी।

इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में एक हवाई अड्डे के निर्माण की योजना भी शामिल है, जो भविष्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।

हालांकि, इस परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर मतभेद बने हुए हैं। कुछ किसान और स्थानीय लोग जमीन अधिग्रहण और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंतित हैं, जबकि समर्थक इसे विकास और रोजगार का अवसर मान रहे हैं।

कुल मिलाकर, बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर जारी विवाद अब और गहरा होता दिख रहा है, जहां एक ओर इसे विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर किसानों की सहमति और प्रभाव को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

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