
बेंगलुरु। कर्नाटक में भारी बारिश और सूखे से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बताया कि कैबिनेट बैठक में नए मंत्रियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बुधवार से अपने-अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा करें और बारिश, बाढ़ तथा सूखे से प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करें। दौरे के बाद मंत्रियों को अपनी रिपोर्ट राजस्व मंत्री को सौंपनी होगी।
सोमवार रात विधान सौधा में हुई कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में राज्य के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों और समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने कावेरी क्षेत्र में सूखे की स्थिति, पानी की उपलब्धता और हालिया बारिश से पैदा हुई परिस्थितियों पर भी विचार किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक में लंबे समय से पानी की समस्या एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। हालांकि, हाल में हुई अच्छी बारिश से कुछ राहत मिली है। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण फिलहाल पानी की कमी की समस्या कुछ हद तक कम हुई है, लेकिन सूखे का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
डीके शिवकुमार ने कावेरी नदी के पानी को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की ओर से पानी छोड़ने को लेकर मांग की गई थी, लेकिन वर्तमान में कर्नाटक की ओर से काफी अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य की ओर से करीब 30,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृष्णा राजा सागर (KRS) और हेमावती बांध अभी पूरी तरह नहीं भरे हैं, हालांकि इनमें पानी की आवक बढ़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश और अन्य जल स्रोतों से आने वाले पानी के कारण आने वाले समय में जल स्थिति में और सुधार हो सकता है।
उन्होंने तुंगभद्रा नदी और अलमट्टी बांध की स्थिति का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में भी पानी का प्रवाह बढ़ा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में जल संकट की चुनौती अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
मुख्यमंत्री ने हालिया बारिश से हुए नुकसान को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि शिवमोग्गा और तीर्थहल्ली जैसे इलाकों में भारी बारिश के कारण आपदा जैसी स्थिति पैदा हुई है। कई क्षेत्रों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है और प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों में जुटना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों से विस्तृत रिपोर्ट मंगाएगी और नुकसान का आकलन करने के बाद प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
कैबिनेट बैठक में राज्य के विभिन्न हिस्सों में मौसम की स्थिति और प्रशासनिक तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रियों के क्षेत्रीय दौरे से जमीनी हालात की सही जानकारी मिलेगी और इसके आधार पर राहत कार्यों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।
सरकार की योजना है कि मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में जाकर अधिकारियों के साथ बैठक करें और प्रभावित इलाकों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करें। इसके बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की रणनीति तय करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि कर्नाटक में मानसून की स्थिति इस बार कई क्षेत्रों में राहत लेकर आई है, लेकिन कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश ने नई समस्याएं भी खड़ी कर दी हैं। ऐसे में जल प्रबंधन और आपदा प्रबंधन दोनों पर एक साथ ध्यान देना जरूरी है।
कर्नाटक में पिछले कुछ समय से जल संकट और मानसून की अनिश्चितता को लेकर चिंता बनी हुई थी। कावेरी क्षेत्र में पानी की उपलब्धता को लेकर सरकार और किसानों के बीच भी लगातार चर्चा होती रही है। अब बारिश के बाद स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन सरकार सतर्कता बरत रही है।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि बारिश से प्रभावित लोगों को जल्द सहायता मिले और सूखे की संभावित स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी की जाए। मंत्रियों के जिलों के दौरे और रिपोर्ट के बाद सरकार राहत और मुआवजे से जुड़े फैसले लेगी।





