
Karnataka कर्नाटक: रेणुकास्वामी मर्डर केस में जेल में बंद कन्नड़ अभिनेता दर्शन ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए दूसरी बार जमानत (बेल) की मांग की है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही 14 अगस्त 2025 को कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा दिए गए बेल आदेश को रद्द कर चुका है, जिसके बाद से मामला ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है।
अभिनेता दर्शन की नई याचिका में कहा गया है कि ट्रायल शुरू हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक गवाहों की गवाही पूरी नहीं हो सकी है। याचिका के अनुसार, कुल 273 गवाहों में से केवल 15 गवाहों का ही अब तक परीक्षण (एग्ज़ामिनेशन) पूरा हुआ है।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है, जिसके कारण ट्रायल को पूरा होने में वर्षों लग सकते हैं। इसी आधार पर दर्शन ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत देने की अपील की है।
मामले की स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट का बेल आदेश रद्द किए जाने के बाद ट्रायल शुरू हुआ था, लेकिन आठ महीने बाद भी प्रक्रिया अधूरी है। गवाहों के एग्ज़ामिनेशन में देरी को लेकर बचाव पक्ष ने चिंता जताई है और कहा है कि न्याय प्रक्रिया में अत्यधिक विलंब हो रहा है।
दर्शन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि यदि इसी तरह ट्रायल चलता रहा तो पूरी प्रक्रिया समाप्त होने में कई वर्ष लग सकते हैं। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि ट्रायल की धीमी गति के बावजूद आरोपी के रूप में उनके अधिकारों पर असर पड़ रहा है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 5 मई को निर्धारित की गई है। अदालत अब यह तय करेगी कि क्या परिस्थितियों को देखते हुए अभिनेता दर्शन को अंतरिम राहत दी जा सकती है या नहीं।
गौरतलब है कि रेणुकास्वामी मर्डर केस कर्नाटक के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक है, जिसमें कई आरोपियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और ट्रायल जारी है।
अभी तक अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के बीच गवाहों की गवाही और सबूतों को लेकर सुनवाई जारी है, लेकिन प्रक्रिया की धीमी गति ने केस की समयसीमा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मामले में आने वाला सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल आरोपी की जमानत पर असर डालेगा बल्कि ट्रायल की दिशा भी तय करेगा।





