कर्नाटक

SIR नोटिस पाने वाले बुजुर्गों को राहत, घर पर करा सकेंगे वोटर वेरिफिकेशन

Kavita2
16 Sept 2026 10:42 AM IST
SIR नोटिस पाने वाले बुजुर्गों को राहत, घर पर करा सकेंगे वोटर वेरिफिकेशन
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बेंगलुरु। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत सुनवाई का नोटिस पाने वाले वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी सुविधा दी गई है। ऐसे बुजुर्ग मतदाता जिन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया है, वे निर्धारित केंद्र पर जाने के बजाय अपने घर पर सत्यापन कराने का विकल्प चुन सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) संबंधित मतदाता के घर पहुंचकर जरूरी दस्तावेजों और विवरण का सत्यापन कर सकेंगे।

यह सुविधा खास तौर पर उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें उम्र, चलने-फिरने में परेशानी या अन्य व्यावहारिक कारणों से सुनवाई केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है। घर पर सत्यापन की सुविधा मिलने से उन्हें मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने में आसानी होगी।

SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग नहीं होने और विवरण में गड़बड़ी जैसे मामलों की जांच के लिए बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक ऐसे मामलों में कुल 43.81 लाख नोटिस जारी किए गए हैं।

12.56 लाख मामलों की सुनवाई पूरी

15 सितंबर तक कम से कम 12.56 लाख मामलों की सुनवाई पूरी की जा चुकी है। इसका मतलब है कि नोटिस जारी किए गए मामलों के एक बड़े हिस्से में अभी प्रक्रिया पूरी की जानी बाकी है। अधिकारियों के सामने आने वाले दिनों में शेष मामलों की सुनवाई और सत्यापन पूरा करने की चुनौती है।

SIR से जुड़ी अंतिम सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित है। ऐसे में चुनाव अधिकारियों के पास लंबित मामलों को निपटाने के लिए सीमित समय बचा है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर पर सत्यापन का विकल्प उपलब्ध होने से प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने में भी मदद मिल सकती है।

घर पहुंचेंगे AERO और ERO

नई सुविधा के तहत सुनवाई का नोटिस पाने वाले पात्र वरिष्ठ नागरिक घर पर सत्यापन का विकल्प चुन सकते हैं। इसके बाद संबंधित AERO या ERO उनके घर जाकर मतदाता की पहचान और रिकॉर्ड से जुड़े आवश्यक विवरण की जांच करेंगे।

अधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों को देखकर यह सत्यापित करेंगे कि मतदाता की ओर से दी गई जानकारी और मतदाता सूची में मौजूद विवरण सही हैं या उनमें किसी सुधार की आवश्यकता है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल सुनवाई केंद्र तक नहीं पहुंच पाने के कारण किसी वरिष्ठ नागरिक को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

क्यों जारी किए गए लाखों नोटिस?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान मतदाता सूची में दर्ज नामों और संबंधित विवरणों की जांच की जा रही है। पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग नहीं होने वाले मामलों के अलावा नाम, उम्र, पता या अन्य विवरण में विसंगति पाए जाने पर सत्यापन की आवश्यकता पड़ सकती है।

इन्हीं श्रेणियों से जुड़े मामलों में 43.81 लाख नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है। नोटिस जारी होने का मतलब अपने आप मतदाता सूची से नाम हटना नहीं है। संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज या जानकारी उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाता है।

सुनवाई इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अधिकारियों के सामने जानकारी और दस्तावेज प्रस्तुत होने के बाद रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित मामले पर आगे का निर्णय लिया जाता है।

वरिष्ठ नागरिकों को नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर

सुनवाई की प्रक्रिया में वरिष्ठ नागरिकों के सामने सबसे बड़ी समस्या संबंधित कार्यालय या केंद्र तक पहुंचने की हो सकती है। विशेष रूप से अधिक उम्र के लोगों के लिए लंबी दूरी तय करना और सुनवाई का इंतजार करना मुश्किल हो सकता है।

घर पर सत्यापन की व्यवस्था इसी परेशानी को कम करने की दिशा में कदम है। इससे बुजुर्ग मतदाता अपने निवास पर ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी करा सकेंगे।

हालांकि घर पर सत्यापन का विकल्प चुनने की प्रक्रिया और इसके लिए आवश्यक सूचना किस माध्यम से संबंधित अधिकारी को देनी होगी, इस संबंध में मतदाताओं को अपने नोटिस और स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी का पालन करना चाहिए।

12 अक्टूबर तक चलेगी सुनवाई

SIR के तहत सुनवाई की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर निर्धारित की गई है। 15 सितंबर तक 12.56 लाख मामलों की सुनवाई पूरी होने के बाद अब शेष मामलों को निर्धारित समय में निपटाने पर जोर रहेगा।

निर्वाचन अधिकारियों के लिए लाखों मामलों का सत्यापन बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसमें प्रत्येक मामले के दस्तावेज और रिकॉर्ड की जांच करनी होती है। ऐसे में घर पर सत्यापन जैसे विकल्प से उन मामलों को निपटाने में सहायता मिल सकती है, जिनमें संबंधित मतदाता उम्र के कारण केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

नोटिस मिलने पर उसे नजरअंदाज न करें

SIR के तहत नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे उसमें दिए गए निर्देशों को ध्यान से देखें। यदि रिकॉर्ड में किसी तरह की विसंगति बताई गई है तो उससे संबंधित उपलब्ध दस्तावेज तैयार रखना उपयोगी होगा।

वरिष्ठ नागरिक यदि घर पर सत्यापन का विकल्प चुनते हैं तो उन्हें संबंधित अधिकारियों के सामने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं। वहीं अन्य मतदाताओं को निर्धारित सुनवाई प्रक्रिया के अनुसार अपना पक्ष रखना होगा।

किसी भी अनजान व्यक्ति को मूल दस्तावेज सौंपने या OTP, बैंक विवरण जैसी असंबंधित निजी जानकारी देने से बचना चाहिए। निर्वाचन संबंधी प्रक्रिया के लिए केवल अधिकृत अधिकारियों और आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करना सुरक्षित रहेगा।

मतदाता सूची की शुद्धता पर जोर

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज विवरणों का सत्यापन करना और रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को दूर करना है। इसी प्रक्रिया के तहत पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग नहीं होने और अन्य गड़बड़ियों वाले मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं।

15 सितंबर तक 12.56 लाख सुनवाई पूरी होने के बाद अब नजर बाकी मामलों पर है। अंतिम सुनवाई 12 अक्टूबर को होनी है। इस बीच वरिष्ठ नागरिकों को घर पर सत्यापन का विकल्प मिलने से उन्हें राहत मिलने के साथ निर्वाचन अधिकारियों को भी लंबित मामलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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