कर्नाटक
'चुनाव का तरीका कोई भी हो, जीतेगी BJP', शोभा करंदलाजे ने विपक्ष को दिया जवाब
Ratna Netam
29 Oct 2026 7:36 PM IST

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तुमकुरु : 29 अक्टूबर 2026। देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और बैलेट पेपर से चुनाव कराने को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कांग्रेस और विपक्षी इंडिया गठबंधन पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव चाहे बैलेट पेपर से कराए जाएं या ईवीएम से, भारतीय जनता पार्टी की जीत तय है। हाल ही में विभिन्न राज्यों में हुए विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों के परिणामों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से मतदान होने के बावजूद भाजपा और उसके सहयोगी दलों को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। उन्होंने इन परिणामों को विपक्ष के ईवीएम संबंधी आरोपों का जवाब बताया।
कर्नाटक के तुमकुरु में गुरुवार को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी इंडिया गठबंधन लंबे समय से देश में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय मतपत्रों के माध्यम से मतदान कराया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने हाल के विधान परिषद चुनावों के परिणामों का हवाला देते हुए विपक्ष की इस मांग पर सवाल उठाए।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल में हुए विधान परिषद चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से संपन्न हुए थे। इन चुनावों में वरीयता आधारित मतदान प्रणाली का इस्तेमाल किया गया था। इसके बावजूद कई निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के उम्मीदवारों को जीत मिली। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि चुनाव में मतदान का तरीका बदलने मात्र से मतदाताओं की राजनीतिक पसंद नहीं बदल जाती।
कर्नाटक की चारों सीटों पर NDA की जीत का किया जिक्र
शोभा करंदलाजे ने कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा और जनता दल सेक्युलर गठबंधन की सफलता का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जबकि एनडीए उम्मीदवारों ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की।कर्नाटक में 23 अक्टूबर को हुए विधान परिषद चुनावों के परिणाम 27 अक्टूबर को घोषित किए गए। इनमें भाजपा ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि उसकी सहयोगी जनता दल सेक्युलर ने एक सीट अपने नाम की।पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एसवी संकनूर, दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से केएम सुरेश सोमेश्वर और उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से शशिल जी. नमोशी ने भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की। वहीं, बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जनता दल सेक्युलर के एपी रंगनाथ विजयी रहे।इन परिणामों को लेकर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा का दावा है कि राज्य में सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस का चारों सीटों पर हारना उसके लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका है। हालांकि, इन निर्वाचन क्षेत्रों में केवल निर्धारित पात्रता वाले स्नातक और शिक्षक मतदाता ही मतदान करते हैं।
'बैलेट पेपर से चुनाव हुए, फिर भी भाजपा जीती'
शोभा करंदलाजे ने दावा किया कि कर्नाटक के अलावा अन्य राज्यों के विधान परिषद चुनावों में भी भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया है। उन्होंने महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के नतीजों का उल्लेख करते हुए कहा कि बैलेट पेपर से होने वाले चुनावों में भी मतदाताओं का समर्थन भाजपा को मिल रहा है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विपक्षी दल बार-बार चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं, लेकिन हालिया चुनाव परिणाम उनके दावों के विपरीत हैं। उनके मुताबिक, भाजपा को मिल रहा समर्थन किसी एक मतदान प्रणाली तक सीमित नहीं है।उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को ईवीएम के विरोध के बजाय जनता के बीच जाकर अपना जनाधार मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। करंदलाजे का दावा था कि पार्टी की जीत के पीछे मतदाताओं का भरोसा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी कांग्रेस पर साधा निशाना
विधान परिषद चुनाव परिणामों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस पर टिप्पणी की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि इन चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया था।प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए पार्टी को चुनावी परिणामों की समीक्षा करने का संदेश दिया। भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया और दावा किया कि कांग्रेस की चुनावी हार का कारण केवल मतदान की तकनीक नहीं हो सकती।भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी को बैलेट पेपर से होने वाले चुनावों में भी अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिला। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि मतदाताओं का समर्थन प्राप्त करने के लिए राजनीतिक दलों को लगातार जनता के बीच काम करना पड़ता है।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने दी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की चुनौती
दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा नेताओं के बयानों पर पलटवार किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि भाजपा को बैलेट पेपर से चुनाव कराने में कोई समस्या नहीं है, तो लोकसभा चुनाव भी मतपत्रों के माध्यम से कराए जाने चाहिए।खड़गे ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल चुनावी पारदर्शिता तथा मतदान प्रक्रिया में जनता के विश्वास से जुड़े सवाल लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर विपक्ष की मांगों का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया।कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि विधान परिषद के सीमित मतदाता वर्ग वाले चुनावों की तुलना सीधे लोकसभा या विधानसभा के आम चुनावों से नहीं की जा सकती। पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपनी मांग दोहराई है।
चार राज्यों की 28 सीटों पर हुए चुनाव
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की कुल 28 सीटों के लिए चुनाव कराए गए। इनमें स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने कई महत्वपूर्ण सीटों पर जीत दर्ज की।कांग्रेस को महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सफलता मिली। वहीं, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बिहार में अन्य दलों तथा निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी सीटें जीतीं।इन परिणामों से स्पष्ट है कि अलग-अलग राज्यों में मतदाताओं ने विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को समर्थन दिया। हालांकि, भाजपा ने अपने प्रदर्शन को कांग्रेस के ईवीएम संबंधी आरोपों के जवाब के रूप में प्रस्तुत किया है।
ईवीएम बनाम बैलेट पेपर पर जारी है राजनीतिक बहस
भारत में ईवीएम और बैलेट पेपर को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस चल रही है। विपक्ष के कुछ दलों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं का विश्वास बढ़ाने के लिए बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग की है।दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि विपक्ष चुनाव में हार मिलने के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर सवाल उठाता है। पार्टी के नेताओं का तर्क है कि बैलेट पेपर से हुए विधान परिषद चुनावों में भी कांग्रेस को कई स्थानों पर हार का सामना करना पड़ा है।हालांकि, किसी चुनाव में एक दल की जीत या हार अपने आप में किसी मतदान प्रणाली की तकनीकी विश्वसनीयता को सिद्ध या खारिज नहीं करती। चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता का आकलन नियमों, सुरक्षा उपायों, पारदर्शिता और स्वतंत्र जांच के आधार पर किया जाता है।फिलहाल केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। भाजपा विधान परिषद चुनावों के नतीजों को अपने पक्ष में मिले समर्थन का संकेत बता रही है, जबकि कांग्रेस चुनावी पारदर्शिता और बैलेट पेपर की अपनी मांग पर कायम है।
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