कर्नाटक

कर्नाटक HC के आदेश पर श्रृंगेरी चुनाव के पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती आज

Kavita2
2 May 2026 10:52 AM IST
कर्नाटक HC के आदेश पर श्रृंगेरी चुनाव के पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती आज
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार 2023 के श्रृंगेरी विधानसभा चुनाव में डाले गए पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती शनिवार को की जाएगी। यह प्रक्रिया कांग्रेस विधायक टी.डी. राजेगौड़ा और भाजपा के हारे हुए उम्मीदवार डी.एन. जीवराज के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले घोषित परिणाम पर पुनर्विचार की स्थिति बन सकती है।

गुरुवार को रिटर्निंग ऑफिसर और जिला कलेक्टर नागराज एन.एम. ने कोर्ट हॉल में दोनों उम्मीदवारों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और प्रक्रिया से जुड़ी तैयारियों की जानकारी दी।

जानकारी के अनुसार, 2023 के चुनाव में कुल 1,822 पोस्टल वोट डाले गए थे। इनमें से 279 वोटों को रद्द कर दिया गया था, जबकि 3 वोट NOTA के थे। शेष 1,540 वैध पोस्टल वोटों की गिनती के आधार पर टी.डी. राजेगौड़ा को 201 वोटों के मामूली अंतर से विजेता घोषित किया गया था।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा उम्मीदवार डी.एन. जीवराज ने परिणाम को चुनौती देते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि तत्कालीन चुनाव अधिकारी ने पोस्टल बैलेट की पुनर्गणना की उनकी मांग पर उचित विचार नहीं किया था।

इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि 279 पोस्टल वोटों के रद्द होने से पूरे चुनाव परिणाम पर सवाल उठते हैं और पारदर्शिता पर संदेह पैदा होता है। इसी आधार पर उन्होंने वोटों की दोबारा जांच और गिनती की मांग की थी।

मामले की सुनवाई के बाद 6 अप्रैल को हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि रद्द किए गए 279 पोस्टल वोटों की दोबारा जांच की जाए और सभी पोस्टल बैलेट की पुनर्गणना के बाद ही अंतिम परिणाम घोषित किया जाए।

इस आदेश के बाद अब शनिवार को पोस्टल बैलेट की दोबारा गिनती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिस पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि यह गिनती चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती है या फिर मौजूदा नतीजे को ही पुष्ट कर सकती है।

प्रशासन ने सभी आवश्यक सुरक्षा और पारदर्शिता के उपाय किए हैं ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सके। दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में गिनती की जाएगी।

इस मामले को राज्य की राजनीतिक और कानूनी व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें पोस्टल बैलेट की वैधता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

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