
Karnataka कर्नाटक: रामनगर जिले के हारोहल्ली क्षेत्र में स्थित कोलिगनहल्ली मल्टीपर्पस प्राइमरी रूरल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव सोसाइटी के सेक्रेटरी एस.सी. उमेश के खिलाफ एक केस दर्ज किया गया है। यह मामला तब सामने आया जब आरोप लगे कि उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के शक में सस्पेंड कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने एसोसिएशन के ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स और उपकरणों को वापस नहीं किया।
सोसाइटी के मौजूदा सेक्रेटरी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया कि एस.सी. उमेश ने 28 अप्रैल, 2011 से 26 फरवरी, 2026 तक एसोसिएशन में सेक्रेटरी के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल के दौरान फंड के दुरुपयोग और अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आए। इसी आधार पर सोसाइटी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 13 मार्च, 2026 को उन्हें सस्पेंड कर दिया।
हालांकि, सस्पेंशन के बाद उमेश ने एसोसिएशन को ज़रूरी दस्तावेज़ और उपकरण सौंपने में लापरवाही बरती। मौजूदा सेक्रेटरी ने बताया कि इससे एसोसिएशन के रोज़ाना प्रशासनिक कामकाज और वार्षिक ऑडिट प्रभावित हो रहे हैं। शिकायत में कहा गया कि आठ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ गायब हैं, जिनके बिना संगठन का संचालन और वित्तीय निगरानी सही ढंग से नहीं हो सकती।
एसोसिएशन के अधिकारियों का कहना है कि डॉक्यूमेंट्स के गायब होने से उनके संचालन में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई है। इनमें वित्तीय रिकॉर्ड, फंड ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेज़ और अन्य प्रशासनिक फाइलें शामिल हैं। यह भी कहा गया कि इस तरह की लापरवाही से न केवल संगठन की पारदर्शिता प्रभावित होती है, बल्कि सदस्य किसानों के हितों पर भी असर पड़ता है।
पुलिस ने शिकायत पर FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि सस्पेंड किए गए सेक्रेटरी की गतिविधियों और गायब डॉक्यूमेंट्स की स्थिति का संपूर्ण आकलन किया जाएगा। इसके अलावा, इस बात की भी जांच की जाएगी कि क्या कोई जानबूझकर दस्तावेज़ों को हटा या छिपाया गया है।
कृषि विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी इस घटना को गंभीर मान रहे हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण कोऑपरेटिव सोसाइटी में पारदर्शिता और नियमित ऑडिट बेहद जरूरी हैं, ताकि सदस्यों के फंड और संसाधनों का सही उपयोग हो सके। ऐसे मामलों से न केवल स्थानीय किसानों का भरोसा कम होता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक नियंत्रण पर भी सवाल उठते हैं।
मौजूदा सेक्रेटरी ने यह स्पष्ट किया कि सोसाइटी का संचालन प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय करके गायब दस्तावेज़ों की खोज और मामले की जांच जारी है।
इस घटना ने ग्रामीण कोऑपरेटिव संस्थाओं में प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सस्पेंड किए गए सेक्रेटरी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ संगठन की आंतरिक प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जाएगा।





