कर्नाटक

बेंगलुरु में खाद्य सुरक्षा पर सवाल, 74% लोगों को रेगुलेटर पर कम या बिल्कुल भरोसा नहीं: सर्वे

Kavita2
22 Aug 2026 11:54 AM IST
बेंगलुरु में खाद्य सुरक्षा पर सवाल, 74% लोगों को रेगुलेटर पर कम या बिल्कुल भरोसा नहीं: सर्वे
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बेंगलुरु। शहर में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ हाल के दिनों में प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई किए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का खाद्य सुरक्षा नियामक की कार्यप्रणाली पर भरोसा कम है। लोकलसर्कल्स (LocalCircles) के एक सर्वे में सामने आया है कि बेंगलुरु के 2,762 निवासियों में बड़ी संख्या ने जिला और राज्य स्तर के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की प्रभावशीलता को लेकर चिंता जताई है।

सर्वे के मुताबिक, 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें जिला और राज्य FDA पर बहुत कम या बिल्कुल भी भरोसा नहीं है, जबकि 31 प्रतिशत लोगों ने नियामक पर कम भरोसा जताया। यानी कुल मिलाकर 74 प्रतिशत उत्तरदाताओं का भरोसा कम या बहुत कम रहा। इसके विपरीत केवल 23 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें खाद्य सुरक्षा नियामक पर काफी भरोसा है।

सर्वे के आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब बेंगलुरु में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, मिलावट और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई लगातार चर्चा में रही है।

कार्रवाई के बावजूद भरोसा नहीं बढ़ा

खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रशासन की ओर से समय-समय पर निरीक्षण, नमूने लेने और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इसके बावजूद सर्वे के नतीजे बताते हैं कि बड़ी संख्या में नागरिक इन कार्रवाइयों को पर्याप्त या प्रभावी नहीं मानते।

43 प्रतिशत लोगों का यह कहना कि उन्हें नियामक पर बहुत कम या बिल्कुल भरोसा नहीं है, खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता की ओर इशारा करता है। वहीं 31 प्रतिशत लोगों का कम भरोसा जताना भी बताता है कि बड़ी आबादी नियामक तंत्र से बेहतर निगरानी और अधिक प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।

सिर्फ 23 प्रतिशत को काफी भरोसा

सर्वे में केवल 23 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें जिला और राज्य FDA पर काफी भरोसा है। यह आंकड़ा खाद्य सुरक्षा नियामक के प्रति जनता के भरोसे और कार्रवाई के बीच संभावित अंतर को दिखाता है।

शहर में बड़ी संख्या में रेस्टोरेंट, होटल, कैफे, स्ट्रीट फूड विक्रेता और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। उपभोक्ता चाहते हैं कि बाजार में उपलब्ध खाद्य सामग्री सुरक्षित हो और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ समय पर कार्रवाई की जाए।

उपभोक्ताओं के लिए खाद्य सुरक्षा अहम

बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में लोग रोजाना बड़ी संख्या में बाहर का खाना खाते हैं। कामकाजी आबादी, छात्रों और दूसरे शहरों से आने वाले लोगों की बड़ी संख्या के कारण रेस्टोरेंट और खाद्य कारोबार का दायरा लगातार व्यापक है।

ऐसे माहौल में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि उपभोक्ताओं को यह विश्वास नहीं है कि खाद्य सुरक्षा मानकों की निगरानी प्रभावी ढंग से हो रही है, तो इससे नियामक संस्थाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि सिर्फ कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है। लोगों को यह भी महसूस होना चाहिए कि निरीक्षण नियमित हैं, नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई होती है और दोषी कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रभाव जमीन पर दिखाई देता है।

पारदर्शिता और नियमित जांच की जरूरत

खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ स्तर पर अक्सर नियमित निरीक्षण, नमूनों की वैज्ञानिक जांच और कार्रवाई की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करने पर जोर दिया जाता है। उपभोक्ताओं को यदि यह जानकारी उपलब्ध हो कि किन प्रतिष्ठानों की जांच हुई, किन उत्पादों के नमूने लिए गए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर क्या कार्रवाई हुई, तो इससे भरोसा बढ़ सकता है।

बेंगलुरु में खाद्य कारोबार की बड़ी संख्या को देखते हुए नियामक एजेंसियों के सामने मानव संसाधन और निगरानी का भी दबाव रहता है। ऐसे में तकनीक आधारित निगरानी और जोखिम के आधार पर निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं भी उपयोगी हो सकती हैं।

हाल की सख्ती के बीच सामने आया सर्वे

सर्वे का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बेंगलुरु में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर हाल ही में प्रशासनिक सख्ती देखने को मिली है। इसके बावजूद अगर बड़ी संख्या में लोग नियामक पर कम भरोसा जताते हैं, तो यह संकेत है कि कार्रवाई और जनता के अनुभव के बीच अभी अंतर मौजूद है।

लोगों की अपेक्षा केवल छापेमारी या जुर्माने तक सीमित नहीं है। वे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित निगरानी, शिकायतों पर तेजी से प्रतिक्रिया और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई चाहते हैं।

सर्वे ने खड़े किए कई सवाल

लोकलसर्कल्स के सर्वे में सामने आए आंकड़े खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। 2,762 लोगों की राय में 43 प्रतिशत को बहुत कम या बिल्कुल भरोसा नहीं होना और 31 प्रतिशत का कम भरोसा जताना बताता है कि नियामक संस्थाओं के सामने जनता का विश्वास हासिल करने की चुनौती बड़ी है।

सिर्फ 23 प्रतिशत लोगों का काफी भरोसा जताना यह भी संकेत देता है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई को लेकर सकारात्मक धारणा अभी सीमित है।

हालांकि, सर्वे में सामने आए ये आंकड़े नागरिकों की धारणा को दर्शाते हैं और इन्हें नियामक की वास्तविक कार्यक्षमता का प्रत्यक्ष माप नहीं माना जा सकता। फिर भी यह प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण संकेत जरूर है कि खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी और उनके परिणाम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना जरूरी है।

भरोसा बहाल करना बड़ी चुनौती

बेंगलुरु में खाद्य सुरक्षा को लेकर नागरिकों का भरोसा मजबूत करने के लिए नियामक एजेंसियों को निरंतर निगरानी, त्वरित शिकायत निवारण और पारदर्शी कार्रवाई पर जोर देना होगा। खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि कारोबारियों और उपभोक्ताओं की भी साझा जिम्मेदारी है।

कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा, जबकि उपभोक्ताओं को भी संदिग्ध खाद्य उत्पादों और प्रतिष्ठानों के बारे में शिकायत दर्ज कराने के लिए उपलब्ध माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए।

फिलहाल लोकलसर्कल्स के सर्वे ने यह साफ कर दिया है कि बेंगलुरु में खाद्य सुरक्षा को लेकर सिर्फ नियमों की सख्ती ही नहीं, बल्कि नियामक व्यवस्था पर जनता का भरोसा बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। आने वाले समय में प्रशासन की निरंतर और पारदर्शी कार्रवाई ही यह तय करेगी कि लोगों का यह भरोसा मजबूत होता है या नहीं।

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