
बेंगलुरु। कर्नाटक पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (KSPCB) से मालवल्ली के विधायक पी.एम. नरेंद्रस्वामी के हटने के बाद एक बार फिर कानूनी और तकनीकी पदों पर राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर बहस शुरू हो गई है। नरेंद्रस्वामी के पद छोड़ने से खाली हुई जगह ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है कि क्या ऐसे महत्वपूर्ण संस्थानों में नियुक्तियां योग्यता और विशेषज्ञता के आधार पर होनी चाहिए या राजनीतिक आधार पर।
जानकारी के अनुसार, पी.एम. नरेंद्रस्वामी ने फरवरी 2025 के अंत में कर्नाटक पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के पद पर जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय राज्य सरकार की ओर से नियुक्ति नियमों में बदलाव किया गया था। इन बदलावों के बाद यह सवाल उठे थे कि क्या पर्यावरण जैसे तकनीकी क्षेत्र से जुड़े संस्थान में विशेषज्ञता की शर्तों को कमजोर किया जा रहा है।
बताया गया कि सरकार ने उन नियमों में ढील दी थी, जिनमें KSPCB के पद के लिए पर्यावरण विज्ञान, पर्यावरण इंजीनियरिंग या इससे जुड़े विज्ञान विषयों में मास्टर डिग्री जैसी योग्यता को आवश्यक माना गया था। इस प्रावधान में बदलाव के बाद राजनीतिक नियुक्ति को लेकर आलोचना शुरू हुई थी।
विशेषज्ञों और पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे संस्थानों की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे संस्थान उद्योगों, पर्यावरण मानकों, प्रदूषण नियंत्रण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से जुड़े फैसले लेते हैं। इसलिए इन पदों पर तकनीकी समझ और विशेषज्ञता रखने वाले लोगों की नियुक्ति जरूरी मानी जाती है।
नरेंद्रस्वामी की नियुक्ति को लेकर भी विपक्ष और कुछ पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि पर्यावरण जैसे संवेदनशील विषय से जुड़े संस्थान में राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति की नियुक्ति से संस्थान की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, सरकार की ओर से नियुक्ति को लेकर यह तर्क दिया गया था कि प्रशासनिक अनुभव और सार्वजनिक जीवन में सक्रियता रखने वाले लोग भी ऐसे संस्थानों का नेतृत्व कर सकते हैं। सरकार का कहना था कि नियमों में बदलाव व्यापक प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।
अब नरेंद्रस्वामी के पद से हटने के बाद यह मामला फिर से चर्चा में आ गया है। राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या भविष्य में भी KSPCB जैसे तकनीकी संस्थानों में इसी तरह की नियुक्तियां जारी रहेंगी या फिर विशेषज्ञता आधारित चयन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी।
कर्नाटक पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड राज्य में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करता है। बोर्ड उद्योगों को अनुमति देने, प्रदूषण मानकों की निगरानी करने और पर्यावरण कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाता है। ऐसे में बोर्ड के शीर्ष पदों पर नियुक्ति को लेकर हमेशा से विशेष ध्यान दिया जाता रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण नियंत्रण जैसे विषयों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी जानकारी बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि निर्णय लेने वाले अधिकारियों को पर्यावरण कानूनों, प्रदूषण के प्रभाव और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की पर्याप्त समझ होनी चाहिए।
वहीं, राजनीतिक दलों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो सकती है। विपक्ष पहले से ही सरकारी संस्थानों में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाता रहा है। अब नरेंद्रस्वामी के हटने के बाद एक बार फिर यह सवाल सामने आया है कि सरकारी संस्थानों में नियुक्तियों के लिए कौन से मानक तय किए जाने चाहिए।
फिलहाल KSPCB में खाली हुए पद को लेकर आगे की प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार अब इस पद पर किसे नियुक्त करती है और क्या नियुक्ति के लिए पुराने तकनीकी मानकों को फिर से लागू किया जाता है।
यह मामला केवल एक नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थानों में विशेषज्ञता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है।





