कर्नाटक

लालबाग से नहीं गुजरेगी प्रस्तावित टनल रोड सरकार तलाश रही नया रास्ता

Kavita2
11 Sept 2026 11:48 AM IST
लालबाग से नहीं गुजरेगी प्रस्तावित टनल रोड सरकार तलाश रही नया रास्ता
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बेंगलुरु : बेंगलुरु में प्रस्तावित टनल रोड परियोजना को लेकर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि टनल रोड के निर्माण के लिए ऐतिहासिक लालबाग की जमीन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। परियोजना के लिए अब वैकल्पिक मार्गों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि नया रास्ता कौन-सा होगा इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

सरकार का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में पार्क की पांच प्रतिशत जमीन को इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने वाला विवादित विधेयक वापस लिया गया था। इस विधेयक को लेकर पर्यावरण प्रेमियों, नागरिक संगठनों और विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई थी। लोगों को आशंका थी कि इसके लागू होने से शहर के पार्कों और हरित क्षेत्रों की जमीन विकास परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

विधेयक वापस लेने के बाद अब सरकार ने लालबाग की जमीन को भी टनल रोड परियोजना से बाहर रखने का भरोसा दिया है। परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि प्रस्तावित टनल रोड के लिए लालबाग की जमीन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की ओर से कुछ वैकल्पिक रास्ते सुझाए गए हैं लेकिन अभी किसी भी मार्ग को अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है।

मंत्री के बयान से लालबाग के संरक्षण को लेकर चिंतित लोगों को बड़ी राहत मिली है। लालबाग बेंगलुरु के सबसे प्रमुख हरित क्षेत्रों और ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में दुर्लभ पेड़-पौधे मौजूद हैं। यह शहर के पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। टनल रोड परियोजना में इसकी जमीन इस्तेमाल होने की आशंका से पर्यावरण संगठनों में नाराजगी थी।

सरकार ने फिलहाल लालबाग की जमीन इस्तेमाल नहीं करने की स्थिति स्पष्ट कर दी है लेकिन वैकल्पिक मार्ग को लेकर चर्चा जारी है। सूत्रों के अनुसार टनल रोड को दूसरी दिशा से ले जाने के लिए कई विकल्पों का अध्ययन किया जा रहा है। इनमें राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान यानी निम्हांस की जमीन का एक हिस्सा शामिल बताया जा रहा है।

इसके अलावा विल्सन गार्डन के पास स्थित कब्रिस्तान वाली जगह और लालबाग रोड से होकर टनल बनाने की संभावनाओं पर भी विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि ये सभी विकल्प शुरुआती स्तर पर बताए जा रहे हैं। किसी भी स्थान या मार्ग को परियोजना के लिए अंतिम रूप नहीं दिया गया है। सरकार को तकनीकी व्यवहार्यता, यातायात पर प्रभाव, जमीन की उपलब्धता और पर्यावरणीय पहलुओं का अध्ययन करने के बाद फैसला करना होगा।

निम्हांस की जमीन के इस्तेमाल का विकल्प चुने जाने पर स्वास्थ्य संस्थान की जरूरतों और भविष्य की विस्तार योजनाओं को ध्यान में रखना होगा। यह संस्थान देश के प्रमुख चिकित्सा और अनुसंधान केंद्रों में शामिल है। इसलिए उसकी जमीन का कोई हिस्सा अधोसंरचना परियोजना के लिए लेने से पहले संस्थान के अधिकारियों सहित सभी संबंधित पक्षों से परामर्श आवश्यक होगा।

विल्सन गार्डन के पास कब्रिस्तान वाली जगह से टनल ले जाने की संभावना भी संवेदनशील मानी जा रही है। धार्मिक और सामाजिक महत्व वाली जमीन के इस्तेमाल से स्थानीय समुदायों की भावनाएं जुड़ी हो सकती हैं। सरकार को किसी निर्णय से पहले कानूनी स्थिति, जमीन के स्वामित्व और स्थानीय लोगों की राय पर विचार करना होगा। इस विकल्प को लेकर भी फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

लालबाग रोड से टनल का मार्ग निकालने के विकल्प के लिए यातायात और तकनीकी परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन जरूरी होगा। यह इलाका शहर के व्यस्त हिस्सों में शामिल है। निर्माण कार्य शुरू होने की स्थिति में आसपास के यातायात, व्यापार और आवासीय क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। इसलिए परियोजना के निर्माण चरण के लिए भी अलग ट्रैफिक प्रबंधन योजना की आवश्यकता होगी।

प्रस्तावित टनल रोड परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरु में बढ़ती यातायात समस्या को कम करना बताया जा रहा है। शहर की प्रमुख सड़कों पर रोजाना भारी जाम लगता है। तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या ने मौजूदा सड़क व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। सरकार टनल रोड के माध्यम से वाहनों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

इस परियोजना को लेकर सरकार के सामने पर्यावरण संरक्षण और यातायात सुधार के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। एक तरफ शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए नई सड़क अधोसंरचना की आवश्यकता है तो दूसरी तरफ लालबाग जैसे महत्वपूर्ण हरित क्षेत्र को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों का कहना है कि किसी भी बड़े निर्माण से पहले उसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव का व्यापक आकलन होना चाहिए।

पार्क की पांच प्रतिशत जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति देने वाले विधेयक को वापस लेने के बाद सरकार के नए फैसले को जनभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। विवादित विधेयक के सामने आने के बाद लोगों ने आशंका जताई थी कि सार्वजनिक पार्कों का क्षेत्र धीरे-धीरे दूसरी परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार द्वारा विधेयक वापस लेने और लालबाग की जमीन नहीं लेने की घोषणा से फिलहाल इन आशंकाओं को कम करने का प्रयास हुआ है।

लालबाग केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि बेंगलुरु की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक, स्थानीय नागरिक और प्रकृति प्रेमी पहुंचते हैं। शहर के घने निर्माण और बढ़ते प्रदूषण के बीच लालबाग जैसे हरित क्षेत्र लोगों को स्वच्छ हवा और खुला वातावरण उपलब्ध कराते हैं। यही वजह है कि इससे जुड़ी किसी भी विकास योजना पर व्यापक प्रतिक्रिया होती है।

अब परियोजना का भविष्य नए मार्ग के चयन पर निर्भर करेगा। सरकार को यह तय करना होगा कि कौन-सा विकल्प तकनीकी रूप से संभव, आर्थिक रूप से व्यावहारिक और पर्यावरण की दृष्टि से कम नुकसानदायक है। इसके साथ जमीन अधिग्रहण, सुरक्षा, यातायात और स्थानीय समुदायों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।

परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के बयान से इतना साफ हो गया है कि टनल रोड लालबाग की जमीन से होकर नहीं निकाली जाएगी। वैकल्पिक मार्गों पर अध्ययन और चर्चा जारी रहेगी। अंतिम निर्णय होने के बाद ही परियोजना की दिशा और इससे प्रभावित होने वाले क्षेत्रों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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