कर्नाटक

बेंगलुरु टाउनशिप मुआवजा मामले में जांच तेज

Kavita2
6 Sept 2026 11:51 AM IST
बेंगलुरु टाउनशिप मुआवजा मामले में जांच तेज
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बेंगलुरु : कर्नाटक में प्रस्तावित ‘ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप’ परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के मुआवजे को लेकर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस अब उन लोगों की जांच कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजे का दावा करने की कोशिश की।

मामला उस समय सामने आया जब राजस्व अधिकारियों को मुआवजे के लिए जमा किए गए दो आवेदनों में कथित रूप से जाली दस्तावेज मिले। जांच के दौरान संदिग्ध मुहरों और हस्ताक्षरों की जानकारी सामने आने के बाद अधिकारियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

दो मामलों में दर्ज हुई एफआईआर

जानकारी के अनुसार, ग्रेटर बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी (GBDA) के स्पेशल लैंड एक्विजिशन ऑफिसर की शिकायत पर बिदादी पुलिस ने 3 सितंबर को दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुआवजे को हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। पुलिस अब दस्तावेजों की जांच कर रही है और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

मुआवजे के दावों की जांच के दौरान खुलासा

ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इस दौरान प्रभावित जमीन मालिकों और अन्य संबंधित लोगों की ओर से मुआवजे के लिए आवेदन जमा किए जा रहे हैं।

राजस्व अधिकारियों ने जब इन दावों की जांच शुरू की तो कुछ दस्तावेजों में अनियमितताएं मिलीं। जांच में कथित तौर पर नकली मुहरों और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई गई।

इसके बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को इसकी जानकारी दी।

पुलिस कर रही दस्तावेजों की जांच

बिदादी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और इनके जरिए मुआवजा हासिल करने की कोशिश किस स्तर तक पहुंची।

जांच के दौरान संबंधित विभागों से दस्तावेजों की पुष्टि कराई जा रही है। इसके अलावा आवेदन करने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर

बड़ी विकास परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान मुआवजा प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। सरकार और संबंधित एजेंसियां यह सुनिश्चित करने की कोशिश करती हैं कि वास्तविक जमीन मालिकों और पात्र लोगों को ही इसका लाभ मिले।

ऐसे में फर्जी दस्तावेजों के जरिए मुआवजा लेने की कोशिशों को प्रशासन गंभीरता से ले रहा है।

परियोजना से जुड़े मामलों पर नजर

ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप को शहर के विस्तार और विकास से जुड़ी बड़ी परियोजना माना जा रहा है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में दस्तावेजों और दावों की जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया को नियमों के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सके।

दोषियों पर होगी कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले में सबूत जुटाने और संबंधित लोगों से पूछताछ की प्रक्रिया जारी है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह की धोखाधड़ी केवल दो आवेदनों तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।

प्रशासन हुआ सतर्क

मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग और विकास प्राधिकरण के अधिकारी भी सतर्क हो गए हैं। मुआवजे से जुड़े अन्य आवेदनों की भी जांच की जा सकती है ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।

फिलहाल ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना से जुड़े मुआवजा दावों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला जांच के अधीन है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

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