कर्नाटक

चुनावी गड़बड़ी के आरोपों पर प्रियांक खड़गे का बड़ा बयान

Ratna Netam
13 Oct 2026 7:16 PM IST
चुनावी गड़बड़ी के आरोपों पर प्रियांक खड़गे का बड़ा बयान
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बेंगलुरु। कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जवाबदेही पर सवाल उठाए। खड़गे ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर भाजपा की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने से केंद्रीय नेतृत्व बच रहा है।बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए प्रियांक खड़गे ने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त गायब हैं। गृह मंत्री गायब हैं। मोदी जी गायब हैं। पहले उनसे कहिए कि उन्हें ढूंढें।"कांग्रेस नेता का यह बयान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आया है। खड़गे ने सवाल उठाया कि जब विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर मुद्दे उठा रहा है, तो संबंधित संस्थाओं और नेताओं की ओर से संतोषजनक जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा।
मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही पर उठाए सवाल
प्रियांक खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों का जवाब दिया जाना चाहिए।उनका आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान सामने आई शिकायतों पर पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की जिम्मेदारी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।इससे पहले भी खड़गे सवाल उठा चुके हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आरोप सामने आने पर केंद्र सरकार उनका बचाव क्यों कर रही है
चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर का लगाया आरोप
कांग्रेस नेता ने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।कर्नाटक में भी मतदाता सूची से नाम हटाने के कथित अनुचित आवेदनों को लेकर विवाद चल रहा है। राज्य सरकार ने कुछ मामलों में शिकायतों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराई है।भाजपा ने इन कार्रवाइयों पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार उसके कार्यकर्ताओं को राजनीतिक कारणों से निशाना बना रही है। वहीं, खड़गे का कहना है कि संबंधित शिकायतों की जांच कानून के अनुसार होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह पर भी निशाना
प्रियांक खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी पर सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता से जुड़े आरोपों पर केंद्र के शीर्ष नेतृत्व को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।खड़गे का 'गायब' होने संबंधी बयान राजनीतिक आलोचना था। इसे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या मुख्य चुनाव आयुक्त के वास्तव में लापता होने की सूचना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।उनका आरोप है कि भाजपा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का जवाब देने के बजाय विपक्ष की आलोचना कर रही है।
SIR के खिलाफ दिल्ली और बेंगलुरु में प्रदर्शन
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर दिल्ली और कर्नाटक सहित कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन हुए हैं।सोमवार, 12 अक्टूबर को दिल्ली में राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की।हालांकि चुनाव आयोग ने पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाना है।
बेंगलुरु में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की समीक्षा
बेंगलुरु में भी सोमवार को SIR के खिलाफ प्रदर्शन हुआ था। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। पुलिस पर कुछ प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोप भी लगे।प्रियांक खड़गे ने मंगलवार को घोषणा की कि पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी।उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और पुलिस को नागरिकों के इस अधिकार की रक्षा करनी चाहिए।खड़गे ने पुलिस को निर्देश दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में अनावश्यक बाधा न डाली जाए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से भी प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने की अपील की।
चुनाव आयोग और भाजपा के बीच विवाद पर कांग्रेस हमलावर
प्रियांक खड़गे लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और केंद्र सरकार के रवैये को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर आरोपों का जवाब देना संवैधानिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है।दूसरी ओर, भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती रही है। मतदाता सूची में जानबूझकर हेरफेर किए जाने के आरोप अभी प्रमाणित नहीं हुए हैं।फिलहाल SIR, चुनाव आयोग की जवाबदेही और विरोध-प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।
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