
बेंगलुरु। मतदाता सूची में सुधार के लिए चल रही ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि SIR को अब ‘संघ इंटेंसिव रिविजन’ में बदल दिया गया है और इस प्रक्रिया के जरिए अनुसूचित जाति तथा अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश की जा रही है। खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि यह सब चुनाव आयोग की जानकारी में हो रहा है। ये आरोप खड़गे के राजनीतिक दावे हैं और चुनाव आयोग की जांच या अन्य आधिकारिक प्रक्रिया से इनकी पुष्टि होना बाकी है।
प्रियांक खड़गे ने SIR प्रक्रिया को लेकर BJP और RSS पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि BJP चुनाव आयोग या राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की प्रवक्ता की तरह क्यों व्यवहार कर रही है। यह टिप्पणी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिलने पर BJP की आपत्ति के संदर्भ में सामने आई।
खड़गे ने दावा किया कि राज्य सरकार ने SIR प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए निर्वाचन अधिकारियों को संस्थागत स्तर पर पूरा सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि लोगों को प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने के लिए भी सहयोग किया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें SIR के क्रियान्वयन पर आपत्ति है।
गृह मंत्री ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम बाहर होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक में 1.08 करोड़ से अधिक लोग मतदाता सूची से बाहर हुए हैं, जबकि 43.8 लाख अन्य मतदाताओं को कथित ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ को लेकर नोटिस दिए गए हैं। इन आंकड़ों को रखते हुए उन्होंने सवाल किया कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया किस आधार पर की जा रही है।
खड़गे ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया की आड़ में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक मतदाताओं का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि इन्हीं समुदायों के वोट हटाए जाने की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने SIR को ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ के बजाय ‘संघ इंटेंसिव रिविजन’ करार दिया।
हालांकि खड़गे की ओर से लगाए गए आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह एक राजनीतिक आरोप है और संबंधित मतदाता नामों के हटने के कारणों तथा प्रक्रिया की वैधता का निर्धारण आधिकारिक जांच और निर्वाचन रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकता है।
SIR को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में मतदाता सूची से नाम बाहर होने के सवाल उठने के बीच चुनाव आयोग ने भी कदम उठाया है। आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जहां SIR के बाद पात्र मतदाताओं के नाम सूची में नहीं रह गए हैं। बूथ लेवल अधिकारियों को पुराने और मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड की तुलना कर छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान करने तथा उनका पंजीकरण कराने में सहायता करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस घटनाक्रम के कारण SIR अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। विपक्षी दल मतदाता सूची में हुए बदलाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर लगातार बहस हो रही है।
प्रियांक खड़गे ने BJP की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय जाने से BJP को क्या आपत्ति है। उनके मुताबिक, यदि कांग्रेस को चुनाव आयोग की प्रक्रिया से कोई शिकायत है तो उसे संबंधित अधिकारी के सामने अपनी बात रखने का अधिकार है।
खड़गे ने कहा कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन अधिकारी से बातचीत कर रहा था। उनके मुताबिक, इस दौरान अधिकारी ने चुनाव आयोग से निर्देश लेने की बात कही थी। खड़गे ने इसी घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए BJP से सवाल किया कि वह निर्वाचन अधिकारियों की ओर से जवाब देने की स्थिति में क्यों दिखाई दे रही है।
मतदाता सूची किसी भी चुनावी प्रक्रिया का आधार होती है। किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में नहीं होने की स्थिति में उसके मतदान के अधिकार पर सीधा प्रभाव पड़ता है। दूसरी ओर निर्वाचन अधिकारियों के सामने मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अन्य कारणों से अयोग्य प्रविष्टियों को हटाकर मतदाता सूची को सही बनाए रखने की जिम्मेदारी भी होती है। इसी वजह से SIR जैसी प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं को पर्याप्त अवसर मिलना महत्वपूर्ण है।
चुनाव आयोग ने SIR के बाद छूटे हुए पात्र मतदाताओं को फिर से जोड़ने के लिए घर-घर सत्यापन सहित विशेष अभियान के निर्देश दिए हैं। आयोग के अनुसार, मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है और पात्र नागरिकों को पंजीकरण का अवसर मिलना चाहिए।
ऐसे में प्रियांक खड़गे की ओर से अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाए जाने का आरोप राजनीतिक रूप से गंभीर है, लेकिन इसके समर्थन में प्रत्येक हटाए गए नाम के कारणों और निर्वाचन रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी। फिलहाल खड़गे ने अपनी ओर से BJP, RSS और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
SIR को लेकर राजनीतिक टकराव ऐसे समय बढ़ रहा है जब मतदाता सूची में बदलाव को लेकर विपक्षी दल व्यापक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस भी मतदाता सूची में किए गए बदलावों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने सहित कई मांगें उठा चुकी है।
दूसरी ओर चुनाव आयोग की ओर से छूटे हुए पात्र मतदाताओं को शामिल करने के लिए शुरू की गई प्रक्रिया बताती है कि मतदाता सूची की दोबारा जांच और पंजीकरण का काम आगे भी जारी रहेगा। बूथ स्तर पर अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं तक पहुंचने और पात्र पाए जाने पर उनका नाम दर्ज कराने में मदद करने को कहा गया है।
फिलहाल प्रियांक खड़गे के ‘संघ इंटेंसिव रिविजन’ वाले बयान ने SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हो रही है और BJP तथा RSS चुनाव आयोग के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं। इन आरोपों की वास्तविकता का अंतिम आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड, निर्वाचन अधिकारियों की प्रक्रिया और संबंधित जांच के आधार पर ही किया जा सकेगा।





