कर्नाटक

राहुल की FIR पर प्रियांक खड़गे ने दिल्ली पुलिस को घेरा

Kavita2
22 Aug 2026 2:40 PM IST
राहुल की FIR पर प्रियांक खड़गे ने दिल्ली पुलिस को घेरा
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बेंगलुरु। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने शनिवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को दिल्ली के एक पुलिस थाने में कथित तौर पर करीब आठ घंटे तक धरने पर बैठने की स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि किसी वरिष्ठ विपक्षी नेता को प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए इतना लंबा इंतजार करना पड़ता है, तो इससे आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में खड़गे ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी को अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए घंटों थाने में बैठना पड़ा। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति कानून व्यवस्था और नागरिकों की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

‘जब सब जानते हैं तो अज्ञात के खिलाफ FIR क्यों’

प्रियांक खड़गे ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किसने किया, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद प्राथमिकी में अज्ञात लोगों का उल्लेख किया जाना सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में शिकायतकर्ता को प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए लगातार आठ घंटे तक पुलिस स्टेशन में बैठना पड़े, तो यह व्यवस्था की गंभीर समस्या को दर्शाता है।

मंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेताओं के साथ ऐसी स्थिति पैदा होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। उनके मुताबिक, जब एक प्रमुख राजनीतिक नेता को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस के सामने इतना समय बिताना पड़ता है, तो आम नागरिकों के सामने आने वाली मुश्किलों की कल्पना की जा सकती है।

आम नागरिकों की स्थिति पर उठाया सवाल

खड़गे ने अपने बयान में आम नागरिकों की समस्याओं को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक के साथ पुलिस कार्रवाई या प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल जैसी स्थिति पैदा होती है, तो उसे अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए किस तरह की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता होगा, इस पर विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को शिकायत दर्ज कराने के लिए राजनीतिक या प्रभावशाली व्यक्ति के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होनी चाहिए। पुलिस थाने में शिकायत प्राप्त करना और कानून के अनुसार कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है।

मंत्री ने कहा कि यदि केवल शिकायत दर्ज कराने के लिए राहुल गांधी के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ती है, तो यह व्यवस्था पर सवाल उठाता है। उनके अनुसार, आम नागरिक को भी उसी तरह अपनी शिकायत दर्ज कराने और न्याय की प्रक्रिया शुरू कराने का अधिकार मिलना चाहिए।

पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विवाद

राहुल गांधी से जुड़े इस मामले में प्रदर्शनकारियों पर कथित पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा सामने आया है। पैलेट गन का इस्तेमाल पहले भी कई मौकों पर विवाद का विषय रहा है। इसके इस्तेमाल को लेकर मानवाधिकार और सुरक्षा संबंधी चिंताएं उठती रही हैं।

प्रियांक खड़गे ने इसी संदर्भ में कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान लोगों पर ऐसी कार्रवाई की गई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने पुलिस से संबंधित मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके मुताबिक, किसी भी शिकायत को केवल इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि शिकायतकर्ता आम नागरिक है।

दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल

मंत्री के बयान का केंद्र दिल्ली पुलिस की भूमिका रही। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसी शिकायतकर्ता को एफआईआर दर्ज कराने के लिए इतने लंबे समय तक पुलिस स्टेशन में क्यों बैठना पड़ा।

खड़गे ने कहा कि पुलिस का काम नागरिकों की शिकायत सुनना और कानून के अनुसार कार्रवाई करना है। अगर किसी शिकायत को दर्ज कराने में ही घंटों लग जाएं तो इससे लोगों में पुलिस व्यवस्था के प्रति भरोसा कमजोर हो सकता है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही महत्वपूर्ण है। नागरिकों को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी राजनीतिक दबाव या सिफारिश की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक बहस

राहुल गांधी के प्रदर्शन और एफआईआर से जुड़े इस घटनाक्रम ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। विपक्षी दल अक्सर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि सरकार और पुलिस की ओर से सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े निर्णयों का बचाव किया जाता रहा है।

प्रियांक खड़गे ने अपने बयान के जरिए इस मुद्दे को व्यापक नागरिक अधिकारों से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मामला केवल राहुल गांधी का नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि किसी आम व्यक्ति की शिकायत पुलिस किस तरह दर्ज करती है और उस पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।

शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया पर बहस

मंत्री ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस स्टेशन आम नागरिकों के लिए न्याय की प्रक्रिया का पहला पड़ाव होता है। वहां शिकायत दर्ज कराने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित अधिकारी मामले को गंभीरता से लेंगे और पैलेट गन के कथित इस्तेमाल की जांच करेंगे। साथ ही, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का भी समाधान किया जाना चाहिए।

प्रियांक खड़गे का बयान ऐसे समय आया है जब राहुल गांधी से जुड़े प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। उनके बयान ने इस विवाद को एक बार फिर नागरिकों के अधिकार, पुलिस की जवाबदेही और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के मुद्दे से जोड़ दिया है।

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