
कर्नाटक : मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार को BJP नेताओं और बूथ-लेवल एजेंटों यानी BLA के खिलाफ दर्ज मामलों का बचाव करते हुए कहा कि यदि किसी ने गलत आधार पर मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी।
प्रियांक खड़गे ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग गंभीर मामला है और यदि कोई व्यक्ति चुनावी प्रक्रिया में गलत तरीके से हस्तक्षेप करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, “जब वे फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, तो क्या हम उन्हें भारत रत्न दें? अगर आप देश के कानून का उल्लंघन करते हैं, तो क्या आप उम्मीद करते हैं कि आपके खिलाफ केस दर्ज नहीं होंगे?”
गृह मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कर्नाटक में फॉर्म-7 के जरिए कथित तौर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश के आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में BJP से जुड़े कुछ नेताओं और बूथ-लेवल एजेंटों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।
प्रियांक खड़गे ने कहा कि राज्य सरकार किसी भी व्यक्ति के खिलाफ केवल राजनीतिक आधार पर कार्रवाई नहीं कर रही है, बल्कि जहां भी कानून के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं, वहां पुलिस को जांच करने का अधिकार है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति गलत आधार पर किसी मतदाता का नाम हटवाने की कोशिश करता है, तो उसे एक साल तक की सजा हो सकती है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया से छेड़छाड़ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर मामला है और इसे सामान्य गलती के रूप में नहीं देखा जा सकता।
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम पर आपत्ति जताने या किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए किया जाता है। यह प्रक्रिया उन मामलों के लिए बनाई गई है, जहां मतदाता की मृत्यु हो गई हो, वह स्थायी रूप से किसी दूसरे क्षेत्र में चला गया हो या उसका नाम गलत तरीके से सूची में दर्ज हो।
हालांकि कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया गया और ऐसे मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए, जो अब भी अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में रह रहे हैं।
इसी विवाद के बीच जयनगर सहित कुछ विधानसभा क्षेत्रों में BJP से जुड़े बूथ-लेवल एजेंटों और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायतें दर्ज की गई हैं। आरोप है कि हजारों मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फर्जी या गलत फॉर्म-7 आवेदन दिए गए।
गृह मंत्री ने इन मामलों में पुलिस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यदि जांच में गलत काम करने के सबूत मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई स्वाभाविक है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि इस मामले में जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है। पत्रकारों द्वारा विशेष जांच दल यानी SIT बनाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर प्रियांक खड़गे ने इससे इनकार नहीं किया।
उनका कहना था कि यदि जांच में यह सामने आता है कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग बड़े स्तर पर और संगठित तरीके से किया गया है, तो आगे की कार्रवाई के लिए उपयुक्त जांच व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
SIT की संभावना को लेकर उनका बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि राज्य सरकार इस मामले में विशेष जांच दल बनाती है, तो जांच का दायरा केवल व्यक्तिगत शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे नेटवर्क और प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा सकती है।
जांच के दौरान यह पता लगाया जा सकता है कि फॉर्म-7 आवेदन किसने भरे, किसके निर्देश पर जमा किए गए, किन मतदाताओं को निशाना बनाया गया और क्या किसी संगठित तरीके से बड़ी संख्या में आवेदन जमा किए गए।
इसके अलावा डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, लॉगिन डिटेल और आवेदन जमा करने से जुड़े अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।
कर्नाटक में फॉर्म-7 को लेकर विवाद पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे को चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकार से जोड़कर उठा रही है। दूसरी ओर BJP नेताओं का आरोप है कि सरकार राजनीतिक बदले की भावना से उनके कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है।
प्रियांक खड़गे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति निर्दोष है, तो जांच में यह सामने आ जाएगा, लेकिन केवल राजनीतिक पहचान के आधार पर किसी को जांच से छूट नहीं मिल सकती।
मतदाता सूची लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है। किसी भी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटना उसके मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से फॉर्म-7 जैसे आवेदनों की जांच और सत्यापन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
गृह मंत्री ने संकेत दिया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है और इसके लिए यदि कठोर कार्रवाई की जरूरत पड़ी तो सरकार पीछे नहीं हटेगी।
फिलहाल फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर दर्ज मामलों की जांच जारी है। आने वाले दिनों में जांच में और नाम सामने आ सकते हैं और यदि बड़े स्तर पर गड़बड़ी के प्रमाण मिले तो SIT गठन का रास्ता भी खुल सकता है।
इस पूरे विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में एक नया टकराव पैदा कर दिया है। अब नजर इस बात पर है कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और सरकार विशेष जांच दल बनाने का फैसला करती है या नहीं।





