
बेंगलुरु : कर्नाटक सरकार ने राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने जानकारी दी है कि प्रदेश में करीब 72 हजार सरकारी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिल सके।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने यह बात डिवीजन-लेवल प्रोग्रेस रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में बेंगलुरु साउथ, बेंगलुरु अर्बन, बेंगलुरु रूरल, कोलार, तुमकुरु, चिक्कबल्लापुर, शिवमोग्गा, दावणगेरे और चित्रदुर्ग जिलों से जुड़े विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों की समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी विभागों में रिक्त पदों को जल्द भरने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की उपलब्धता जरूरी है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रिया शुरू की है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता रहने से युवाओं का विश्वास मजबूत होगा और योग्य उम्मीदवारों को उचित अवसर मिलेगा।
डीके शिवकुमार ने सभी जिला कलेक्टरों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। अधिकारियों को परीक्षा व्यवस्था की निगरानी मजबूत करने और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षाओं में धोखाधड़ी और किसी अन्य व्यक्ति के स्थान पर परीक्षा देने यानी इम्पर्सनेशन जैसी घटनाओं को रोकना बेहद जरूरी है। इसके लिए राज्य सरकार सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर काम कर रही है। कैमरों की निगरानी से परीक्षा केंद्रों पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए और परीक्षा संचालन में शामिल सभी कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में देरी से युवाओं को परेशानी होती है, इसलिए सभी विभाग समयबद्ध तरीके से भर्ती पूरी करने की दिशा में काम करें।
बैठक में मुख्यमंत्री ने केवल भर्ती प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि विभिन्न जिलों में चल रहे विकास कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकारी विभागों में मानव संसाधन की कमी दूर करना जरूरी है। बड़ी संख्या में पदों पर भर्ती होने से सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।
कर्नाटक में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से कई विभागों में पद खाली होने के कारण कामकाज प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।
सरकार का जोर केवल अधिक संख्या में नियुक्तियां करने पर नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने पर भी है। प्रश्न-पत्र लीक और परीक्षा में नकल जैसी घटनाएं प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं। ऐसे में सीसीटीवी निगरानी और सख्त सुरक्षा उपायों को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन से कहा कि वे भर्ती परीक्षाओं के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा बनाए रखना सरकार और प्रशासन की संयुक्त जिम्मेदारी है।
राज्य सरकार की इस पहल से जहां सरकारी विभागों में कर्मचारियों की कमी दूर होने की उम्मीद है, वहीं बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की संभावना भी बढ़ी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि भर्ती प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है और इसे कितनी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाता है।
कुल मिलाकर, कर्नाटक सरकार ने 72 हजार पदों पर भर्ती की तैयारी के साथ रोजगार और प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के निर्देशों के बाद परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए भी नई तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।





