
बेंगलुरु। शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल हेब्बल में ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने के लिए बैंगलोर डेवलपमेंट अथॉरिटी (BDA) ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तैयारी तेज कर दी है। योजना के तहत मेखरी सर्कल से हेब्बल तक मिनी टनल रोड और एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। BDA जल्द ही दोनों परियोजनाओं पर काम शुरू करने की तैयारी में है।
योजना के तहत हेब्बल-एस्टीम मॉल से बैपटिस्ट हॉस्पिटल/GKVK वेटनरी कैंपस तक करीब 2.28 किलोमीटर लंबी मिनी टनल बनाई जाएगी। इसके अलावा UAS स्टाफ हॉस्टल/वेटनरी कॉलेज से मेखरी सर्कल तक 1.78 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना है। BDA का मानना है कि दोनों परियोजनाएं एक-दूसरे के साथ मिलकर इस पूरे क्षेत्र में यातायात का दबाव कम करने में मदद करेंगी।
हेब्बल और उसके आसपास के इलाके में लगातार बढ़ते वाहनों के कारण ट्रैफिक जाम बड़ी समस्या बन चुका है। व्यस्त समय के दौरान यहां वाहनों की लंबी कतारें लगने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए मिनी टनल और एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
BDA अधिकारियों ने IIT बॉम्बे की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा है कि प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर और अंडरपास एक-दूसरे के पूरक होंगे। अधिकारियों के मुताबिक दोनों परियोजनाओं को अलग-अलग देखने के बजाय एक संयुक्त यातायात समाधान के रूप में तैयार किया गया है।
मिनी टनल की लंबाई 2.28 किलोमीटर प्रस्तावित है। यह हेब्बल-एस्टीम मॉल से शुरू होकर बैपटिस्ट हॉस्पिटल/GKVK वेटनरी कैंपस तक जाएगी। इस हिस्से में वाहनों की आवाजाही को जमीन के नीचे से निकालने की योजना है, जिससे सतह पर मौजूद सड़कों पर यातायात का दबाव कम किया जा सके।
वहीं दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा 1.78 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर है। इसे UAS स्टाफ हॉस्टल/वेटनरी कॉलेज से मेखरी सर्कल तक बनाने की तैयारी है। एलिवेटेड रोड के जरिए वाहनों के एक हिस्से को मौजूदा सड़क के ऊपर से निकाला जाएगा। इससे नीचे की सड़क पर वाहनों की संख्या कम करने और ट्रैफिक की गति बेहतर करने का प्रयास होगा।
BDA के सामने हालांकि इस परियोजना को लेकर पर्यावरण से जुड़ी बड़ी चुनौती भी है। पर्यावरणविदों के साथ BJP और JDS ने हेब्बल झील और उसके आसपास मौजूद पेड़ों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।
बताया जा रहा है कि परियोजना क्षेत्र में 1,000 से ज्यादा पेड़ मौजूद हैं। ऐसे में निर्माण के दौरान इन पेड़ों पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि यातायात व्यवस्था में सुधार जरूरी है, लेकिन इसके लिए हरित क्षेत्र और पुराने पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
हेब्बल झील और आसपास का इलाका शहर के महत्वपूर्ण हरित क्षेत्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में पेड़ों की मौजूदगी के कारण परियोजना की योजना और निर्माण प्रक्रिया में पर्यावरणीय पहलुओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पर्यावरणविदों की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि इतने बड़े निर्माण कार्य के दौरान मौजूदा पेड़ों को काटने, स्थानांतरित करने या अन्य तरीके से प्रभावित करने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि परियोजना के दौरान वास्तव में कितने पेड़ों पर असर पड़ेगा, यह विस्तृत कार्ययोजना और निर्माण प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगा।
विपक्षी दल BJP और JDS ने भी इस मुद्दे को उठाया है। उनकी ओर से हेब्बल झील और आसपास के क्षेत्र में मौजूद हरियाली को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। परियोजना आगे बढ़ने के साथ पर्यावरण और यातायात सुधार के बीच संतुलन का मुद्दा महत्वपूर्ण रहने वाला है।
दूसरी तरफ BDA का जोर इस बात पर है कि हेब्बल में मौजूदा ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए अलग-अलग स्तर पर यातायात व्यवस्था तैयार करना जरूरी है। मिनी टनल के माध्यम से वाहनों को भूमिगत रास्ता मिलेगा, जबकि एलिवेटेड कॉरिडोर से वाहनों को ऊपर से निकालने की व्यवस्था होगी।
अधिकारियों के अनुसार IIT बॉम्बे की स्टडी में भी एलिवेटेड कॉरिडोर और अंडरपास को एक-दूसरे का पूरक बताया गया है। इसका मतलब है कि केवल एक परियोजना से अपेक्षित परिणाम हासिल करने के बजाय दोनों व्यवस्थाओं को एक साथ इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है।
मिनी टनल और एलिवेटेड रोड बनने के बाद इस पूरे कॉरिडोर में वाहनों के लिए अलग-अलग विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। मौजूदा सड़क पर चलने वाले ट्रैफिक का एक हिस्सा टनल और एलिवेटेड कॉरिडोर की तरफ जाने से मुख्य मार्ग पर दबाव कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
हेब्बल बेंगलुरु के महत्वपूर्ण यातायात क्षेत्रों में से एक है। यहां अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों का दबाव रहता है। ऐसे में किसी एक स्थान पर यातायात की गति धीमी होने से आसपास के दूसरे मार्गों पर भी इसका असर दिखाई देता है।
इसी वजह से BDA इस परियोजना को केवल एक नई सड़क के निर्माण के रूप में नहीं, बल्कि ट्रैफिक प्रबंधन के संयुक्त समाधान के तौर पर आगे बढ़ा रही है। 2.28 किलोमीटर की मिनी टनल और 1.78 किलोमीटर के एलिवेटेड कॉरिडोर को आपस में जोड़कर यातायात को व्यवस्थित करने की तैयारी है।
परियोजना के निर्माण के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था को संभालना भी बड़ी चुनौती होगी। जिस इलाके में काम प्रस्तावित है, वहां पहले से वाहनों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में निर्माण गतिविधियों के दौरान यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम करने की जरूरत होगी।
वहीं पर्यावरण से जुड़े सवाल परियोजना के साथ लगातार बने रहने की संभावना है। एक तरफ शहर को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने की जरूरत है तो दूसरी तरफ हेब्बल झील और उसके आसपास मौजूद 1,000 से अधिक पेड़ों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।
फिलहाल BDA हेब्बल-एस्टीम मॉल से बैपटिस्ट हॉस्पिटल/GKVK वेटनरी कैंपस तक 2.28 किलोमीटर लंबी मिनी टनल का काम शुरू करने की तैयारी में है। इसके साथ UAS स्टाफ हॉस्टल/वेटनरी कॉलेज से मेखरी सर्कल तक 1.78 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर पर भी जल्द काम शुरू करने की योजना है।
अब इस परियोजना पर नजर इसलिए भी रहेगी कि BDA ट्रैफिक जाम कम करने के लक्ष्य के साथ पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं का समाधान किस तरह करती है। मिनी टनल और एलिवेटेड रोड से हेब्बल की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी है, लेकिन परियोजना की आगे की प्रक्रिया में पेड़ों और झील के आसपास के पर्यावरण की सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दा बनी रहेगी।





