
कर्नाटक : सरकार ने प्रस्तावित कर्नाटक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूनिवर्सिटी (KAIU) को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने यूनिवर्सिटी के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से 29 सदस्यों वाली एक कंसल्टेशन कमेटी का गठन किया है।
इस कमेटी की अध्यक्षता इन्फोसिस के को-फाउंडर क्रिस गोपालकृष्णन करेंगे। कमेटी का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिक्षा, कौशल विकास और भविष्य की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करने को लेकर सुझाव देना है।
पहली बैठक में AI शिक्षा पर हुई चर्चा
कर्नाटक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूनिवर्सिटी के लिए गठित कंसल्टेशन कमेटी ने शनिवार को अपनी पहली बैठक की। बैठक में AI शिक्षा और स्किलिंग प्रोग्राम शुरू करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
कमेटी के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि यूनिवर्सिटी को केवल पारंपरिक डिग्री शिक्षा तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उद्योगों की जरूरतों के अनुसार आधुनिक और रोजगार आधारित कार्यक्रम भी शुरू किए जाने चाहिए।
सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स का प्रस्ताव
बैठक में AI से जुड़े विभिन्न स्तरों के पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया। इसमें सर्टिफिकेट कोर्स, डिप्लोमा प्रोग्राम, फिनिशिंग स्कूल, एग्जीक्यूटिव एजुकेशन और री-स्किलिंग प्रोग्राम शामिल हैं।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों, कामकाजी पेशेवरों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को AI की नई तकनीकों के लिए तैयार करना होगा।
उद्योग और शिक्षा के बीच बनेगा तालमेल
कमेटी का मानना है कि AI के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों को देखते हुए शिक्षा संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तालमेल जरूरी है।
प्रस्तावित यूनिवर्सिटी में ऐसे पाठ्यक्रम तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, जो छात्रों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकें।
क्रिस गोपालकृष्णन की भूमिका महत्वपूर्ण
इन्फोसिस के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन को तकनीकी क्षेत्र में लंबे अनुभव के लिए जाना जाता है। उनकी अध्यक्षता वाली कमेटी कर्नाटक में AI शिक्षा के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
कमेटी में शिक्षा, तकनीक और उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, ताकि यूनिवर्सिटी के लिए व्यापक और व्यावहारिक योजना तैयार की जा सके।
AI कौशल विकास पर रहेगा फोकस
कमेटी ने बैठक में AI स्किलिंग को प्राथमिकता देने पर चर्चा की। वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, वित्त और अन्य क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है।
ऐसे में युवाओं को AI आधारित कौशल उपलब्ध कराना रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।
री-स्किलिंग और एग्जीक्यूटिव शिक्षा की योजना
कमेटी ने कामकाजी पेशेवरों के लिए री-स्किलिंग प्रोग्राम शुरू करने पर भी विचार किया है। इसका उद्देश्य उन लोगों को नई तकनीकों के साथ अपडेट करना है, जो पहले से किसी क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
इसके अलावा एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम के जरिए उद्योगों में काम कर रहे अधिकारियों और प्रबंधकों को AI की जानकारी देने की योजना है।
कर्नाटक को AI हब बनाने की तैयारी
कर्नाटक पहले से ही आईटी और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है। बेंगलुरु को देश की सिलिकॉन वैली के रूप में पहचान मिली हुई है।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रस्तावित AI यूनिवर्सिटी के जरिए कर्नाटक को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी बनाया जाए।
आगे तैयार होगा विस्तृत रोडमैप
कमेटी की पहली बैठक के बाद अब आगे की बैठकों में यूनिवर्सिटी की संरचना, पाठ्यक्रम, शोध कार्यक्रम और उद्योग साझेदारी को लेकर सुझाव तैयार किए जाएंगे।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि विशेषज्ञों की सलाह से तैयार रोडमैप के आधार पर KAIU को एक आधुनिक और वैश्विक स्तर की संस्था के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
प्रस्तावित कर्नाटक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूनिवर्सिटी आने वाले समय में AI शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।





