कर्नाटक

डीके शिवकुमार के धरने पर प्रह्लाद जोशी और सोमन्ना का हमला, कैबिनेट बैठक टालने पर उठाए सवाल

Kavita2
2 Oct 2026 10:35 AM IST
डीके शिवकुमार के धरने पर प्रह्लाद जोशी और सोमन्ना का हमला, कैबिनेट बैठक टालने पर उठाए सवाल
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बेंगलुरु। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और वी. सोमन्ना ने गुरुवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर निशाना साधते हुए उनके चुनाव आयोग के राज्य कार्यालय के सामने धरने को लेकर सवाल उठाए। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में सूखे, किसानों की परेशानियों और अन्य जनसमस्याओं पर ध्यान देने के बजाय मुख्यमंत्री ने राजनीतिक प्रदर्शन को प्राथमिकता दी।

प्रह्लाद जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री को किसानों की स्थिति, सूखे और आम लोगों की समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था। उन्होंने शिवकुमार की ओर से निर्धारित कैबिनेट बैठक रद्द कर मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सामने धरना देने के फैसले की आलोचना की। गुरुवार को शिवकुमार ने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के साथ करीब छह घंटे तक धरना दिया था।

कांग्रेस का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए कथित तौर पर फर्जी या सामूहिक Form-7 आवेदन दिए गए। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस मामले में आपराधिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विधानसभा क्षेत्रों में पहले से भरे हुए Form-7 बड़ी संख्या में जमा किए गए।

दूसरी ओर प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव अधिकारियों, बूथ लेवल एजेंटों और बूथ लेवल अधिकारियों को SIR, Form-7 और मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रियाओं की जानकारी है और चुनाव आयोग पूरे मामले की निगरानी कर रहा है। उनका तर्क था कि ऐसे में मुख्यमंत्री का धरना देना आवश्यक नहीं था।

जोशी ने कांग्रेस नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कैबिनेट बैठक टालकर धरना देना राज्य की प्राथमिकताओं से ध्यान भटकाने जैसा है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के लिए “नकली गांधी” जैसे राजनीतिक शब्दों का इस्तेमाल किया और आरोप लगाया कि पार्टी अपने राजनीतिक हितों तथा संदिग्ध मतदाताओं को बचाने के लिए माहौल बना रही है। यह टिप्पणी जोशी की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने भी इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को प्रशासनिक और जनहित से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देनी चाहिए। दोनों केंद्रीय मंत्रियों का आरोप है कि कांग्रेस SIR और मतदाता सूची के मुद्दे को लेकर अनावश्यक भय पैदा कर रही है और जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।

हालांकि कांग्रेस का पक्ष इससे अलग है। शिवकुमार का कहना है कि मुद्दा किसी पार्टी का नहीं बल्कि पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार की रक्षा का है। उन्होंने दावा किया कि कई इलाकों में बड़ी संख्या में Form-7 जमा कर मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई। कांग्रेस ने भाजपा और जेडीएस से जुड़े लोगों पर इस कथित अभियान में शामिल होने का आरोप लगाया है। भाजपा और जेडीएस इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

शिवकुमार के धरने के बाद कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अनबुकुमार ने राज्य की सभी 224 विधानसभा सीटों के चुनाव पंजीकरण अधिकारियों को निर्देश जारी किए। इसमें जानबूझकर गलत घोषणा करने वाले आवेदकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है। यह कार्रवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की संबंधित धाराओं और चुनाव नियमों के तहत जांच के बाद की जाएगी। इसके बाद कांग्रेस ने धरना समाप्त किया।

मुख्यमंत्री ने धरने के दौरान कहा था कि मतदाताओं के अधिकार की रक्षा कैबिनेट बैठक से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार राज्य सरकार इस मामले में कानूनी विकल्पों पर भी विचार करेगी। कांग्रेस ने कई जिलों से शिकायतें और कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपे हैं।

मामले में कुछ स्थानों पर एफआईआर दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। मैसूरु, बीदर और बेलगावी समेत कुछ क्षेत्रों में कथित फर्जी Form-7 आवेदन से जुड़े मामलों की जांच शुरू हुई है। चुनाव अधिकारियों ने भी जिलों से रिपोर्ट मांगी है।

इस पूरे विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में SIR को बड़ा मुद्दा बना दिया है। एक तरफ कांग्रेस का कहना है कि वह योग्य मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटने से रोकने के लिए आंदोलन कर रही है, वहीं भाजपा और जेडीएस कांग्रेस पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम और डर फैलाने का आरोप लगा रहे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले भाजपा और जेडीएस ने भी SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से शिकायत की थी। दोनों दलों ने जुलाई में आरोप लगाया था कि कुछ स्थानों पर SIR से जुड़े फॉर्म निर्धारित प्रक्रिया के बाहर भरे जा रहे हैं।

यानी SIR को लेकर अलग-अलग समय पर सत्ता और विपक्ष दोनों की ओर से सवाल उठाए गए हैं। मौजूदा विवाद खास तौर पर Form-7 के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने के कथित प्रयासों को लेकर है। Form-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति या नाम हटाने के अनुरोध के लिए किया जाता है।

प्रह्लाद जोशी ने हाल में भी विपक्ष पर चुनाव आयोग के खिलाफ बिना ठोस प्रमाण आरोप लगाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक दलों को तथ्य और सबूत सामने रखने चाहिए।

फिलहाल कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी के निर्देश के बाद कथित गलत Form-7 आवेदनों की जांच और कार्रवाई पर नजर रहेगी। कांग्रेस इसे अपने आंदोलन की पहली सफलता बता रही है, जबकि भाजपा और जेडीएस मुख्यमंत्री के धरने और कैबिनेट बैठक रद्द करने को राजनीतिक नाटक करार दे रहे हैं।

आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि कितने Form-7 आवेदन गलत पाए गए, उनके पीछे कौन लोग थे और क्या वास्तव में बड़े पैमाने पर पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हुई थी। तब तक इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी रहने की संभावना है।

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