
Karnataka कर्नाटक: बेंगलुरु में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता प्रदीप ईश्वर ने जेडीएस और केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि राजनीतिक रूप से उनकी पार्टी को किसी से डर नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए कुमारस्वामी से सतर्क रहने की जरूरत है।
प्रदीप ईश्वर ने अपने संबोधन में दावा किया कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में कुमारस्वामी खेमे के कई अहम नेता और विधायक संपर्क में हैं और आने वाले समय में उनके कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक गतिविधियां लगातार बदल रही हैं और कई स्तरों पर बातचीत चल रही है, जिससे भविष्य में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे हालात में कुमारस्वामी को अपनी पार्टी के विधायकों को एकजुट रखने और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी मामलों को लेकर चिंता करनी चाहिए। उनके इस बयान ने कर्नाटक की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
अपने भाषण में प्रदीप ईश्वर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी भी प्रकार की गलत संस्थाओं से सहमति नहीं दे रही है, बल्कि वे केवल सिद्धांत और राजनीतिक सिद्धांतों का उल्लेख कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने एक अलग मुद्दा उठाते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपादकीय और आधिकारिक दस्तावेजों को लेकर प्रश्न उठाया।
उन्होंने कहा कि वे कर्नाटक कांग्रेस नेता Priyank Kharge के रुख का पूरी तरह समर्थन करते हैं, जिन्होंने पहले भी आरएसएस की पारदर्शिता और संगठनात्मक रजिस्ट्रेशन को लेकर सवाल उठाए थे। प्रदीप ईश्वर ने कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे पर स्पष्टता देनी चाहिए और यदि कोई संगठन काम कर रहा है, तो उसके आधिकारिक पंजीकरण दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने चाहिए।
इस दौरान उन्होंने बीजेपी नेताओं पर भी विस्तार से चर्चा की और कहा कि पार्टी के नेता सुनील अन्ना और अशोक अन्ना लगातार राजनीतिक विचारधारा पर बयान देते हैं और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। उन्होंने प्रोडक्शन लीडर्स को सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे साहसिक हैं, तो वे आरएसएस के आधिकारिक नामांकन की प्रतिलिपि सार्वजनिक रूप से पेश करें।
प्रदीप ईश्वर के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जेडीएस और भाजपा की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।
कुल मिलाकर, यह बयान एक तरफ जहां जेडीएस और कांग्रेस के बीच संभावित राजनीतिक बदलावों की ओर संकेत करता है, वहीं दूसरी तरफ आरएसएस और विपक्षी राजनीति को लेकर एक नई बहस को भी जन्म देता है।





