
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के मांड्या जिले में सरकारी गर्ल्स हॉस्टलों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां रहने वाली सैकड़ों छात्राओं को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। टूटी हुई बेड, बिना दरवाज़े वाले टॉयलेट, खराब भोजन और महीनों से सैनिटरी पैड जैसी आवश्यक सुविधाओं की कमी ने हॉस्टल व्यवस्था की पोल खोल दी है।
यह मामला तब सामने आया जब उप-लोकायुक्त जस्टिस बी. वीरप्पा ने मई के अंत में प्राप्त शिकायतों के आधार पर मांड्या के चार सरकारी गर्ल्स हॉस्टलों का अचानक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने छात्राओं की स्थिति को देखकर खुद संज्ञान लेते हुए चार अलग-अलग शिकायतें दर्ज कीं।
जांच में कई चौंकाने वाली कमियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार हॉस्टलों में कंप्यूटर लैब और लाइब्रेरी जैसी बुनियादी शैक्षणिक सुविधाएं मौजूद नहीं थीं। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक किताबों की भी कमी पाई गई, जिससे छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
हॉस्टलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आईं। आरोप है कि छात्राओं को जो खाना दिया जा रहा है, वह निर्धारित पोषण मानकों के अनुरूप नहीं है। कई छात्राओं ने बताया कि भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है और कई बार खाने में साफ-सफाई का भी ध्यान नहीं रखा जाता।
निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि टॉयलेट की स्थिति बेहद खराब है। कई टॉयलेट के दरवाज़े टूटे हुए हैं और कुछ में खिड़कियों पर जाली तक नहीं लगी है। इससे सुरक्षा और स्वच्छता दोनों पर सवाल उठ रहे हैं। कई स्थानों पर बदबू और गंदगी की स्थिति भी दर्ज की गई।
सबसे गंभीर मुद्दों में से एक यह भी सामने आया कि छात्राओं को पिछले दो महीनों से सैनिटरी पैड उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जो उनकी स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ा अहम मामला है। इस लापरवाही ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
उप-लोकायुक्त की इस अचानक जांच के बाद राज्य प्रशासन में हलचल देखी जा रही है। अधिकारियों को इन कमियों को जल्द सुधारने के निर्देश दिए जाने की संभावना है।
छात्राओं और उनके परिजनों ने भी हॉस्टल की इस स्थिति पर चिंता जताई है और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा के लिए हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना गंभीर लापरवाही है।
कुल मिलाकर, मांड्या के सरकारी गर्ल्स हॉस्टलों की यह स्थिति न केवल प्रशासनिक खामियों को उजागर करती है, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।





