कर्नाटक
SIR मुद्दे पर गरमाई राजनीति: चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर शिवकुमार का प्रदर्शन
Tara Tandi
2 Oct 2026 11:26 AM IST

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बेंगलुरु: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को बेंगलुरु में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने मांग की कि 'फॉर्म 7' आवेदनों के ज़रिए योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की कथित साज़िश की जांच हो और इस मामले में आपराधिक केस दर्ज किया जाए।
शिवकुमार अपने कई कैबिनेट सहयोगियों और विधायकों के साथ गांधीनगर स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय पहुंचे और कार्रवाई की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा।
इसके बाद उन्होंने कार्यालय की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन किया और कहा कि जब तक आपराधिक केस दर्ज नहीं किया जाता और मामले की गंभीरता से जांच के आदेश नहीं दिए जाते, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
इस मौके पर मंत्री के.जे. जॉर्ज, के.एच. मुनियप्पा, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, बी.जेड. ज़मीर अहमद खान, बसवराज रायरेड्डी, बायराथी सुरेश, शिवराज तंगदागी, विजयानंद कशप्पनवर, के.एन. बालकृष्ण, रिज़वान अरशद, यतींद्र सिद्धारमैया, अजय सिंह, शिवलिंगेगौड़ा, पुत्तरंगशेट्टी और टी. रघुमूर्ति मौजूद थे।
सांसद जी.सी. चंद्रशेखर और विधायक कोना रेड्डी, काम्पली गणेश, भरत रेड्डी व अन्य ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
धरने से पहले मीडिया से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और सरकार उसके अधिकार का सम्मान करती है।
उन्होंने आरोप लगाया, "हमने राज्य में हो रही अनियमितताओं के बारे में बताया है। उन्होंने अपनी आंखों से सबूत देखे हैं।" उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी नेताओं ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की है और अनुरोध किया है कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए और उनके द्वारा जमा किए गए आवेदन वापस कर दिए जाएं।
शिवकुमार ने दावा किया कि बल्लारी के दो विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 13,000 'फॉर्म 7' आवेदन जमा किए गए थे और बाद में उन्हें वापस ले लिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विजयपुरा में (बबलेश्वर निर्वाचन क्षेत्र को छोड़कर) लगभग 13,000 आवेदन जमा किए गए थे और बाद में उन्हें इस अनुरोध के साथ वापस ले लिया गया कि कोई कार्रवाई न की जाए। उन्होंने कहा, "हमने मैसूरु, बेलगावी और भालकी निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े दस्तावेज़ और वीडियो सौंपे हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि अधिकारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया है और शुक्रवार तक का समय मांगा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग ने संबंधित डिप्टी कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी है।
उन्होंने कहा, "अगर उन्हें हमारे द्वारा सौंपे गए सबूतों पर भरोसा नहीं है, तो वे रिपोर्ट मंगवा लें। जब तक गंभीर जांच के आदेश नहीं दिए जाते, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।"
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि मतदाताओं को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित करने की कोशिश की गई है और इन कथित अनियमितताओं के पीछे जो लोग हैं, उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ गंभीर अपराध किया है।
उन्होंने आरोप लगाया, "उन्होंने मतदाताओं के वोट देने के अधिकार को छीनने की कोशिश की है। यह वोट की चोरी है।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मंत्रियों के प्रतिनिधित्व वाले निर्वाचन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिशें की गईं।
उन्होंने कहा, "आज अन्य मामलों के लिए कैबिनेट की बैठक तय थी। हालांकि, राज्य के मतदाताओं के वोटिंग अधिकारों की रक्षा करना किसी भी अन्य चीज़ से ज़्यादा ज़रूरी है। यह ज़िम्मेदारी मुझ पर है।"
शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग का पूरा सहयोग किया है।
उन्होंने आरोप लगाया, "इसके बावजूद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल ने ऐसी साजिश रची है।"
चिलुमे संगठन से जुड़े पिछले विवाद का ज़िक्र करते हुए शिवकुमार ने कहा कि अब फॉर्म 7 आवेदनों के संबंध में भी इसी तरह की अनियमितताओं का आरोप लगाया जा रहा है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इन अनियमितताओं के पीछे एक बड़ा नेटवर्क है और दावा किया कि EPIC नंबर सहित मतदाताओं के डेटा तक पहुंच बनाई गई है।
उन्होंने आरोप लगाया, "हमें खुद अपने परिवार के सदस्यों के EPIC नंबर नहीं पता हैं, लेकिन इन लोगों के पास EPIC नंबर के ज़रिए सारी जानकारी है। सभी 224 निर्वाचन क्षेत्रों में 10,000 से 20,000 वोट हटाने की साजिश रची गई थी।"
शिवकुमार ने कहा कि इस मुद्दे ने पूरे देश का ध्यान खींचा है और दोहराया कि जब तक चुनाव आयोग कार्रवाई शुरू नहीं करता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
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