कर्नाटक

अडानी-शिवकुमार मुलाकात पर सियासत गरम, CMO की चुप्पी से उठे सवाल

Kavita2
25 Aug 2026 11:05 AM IST
अडानी-शिवकुमार मुलाकात पर सियासत गरम, CMO की चुप्पी से उठे सवाल
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बेंगलुरु। उद्योगपति गौतम अडानी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच रविवार को हुई मुलाकात ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अडानी ने बेंगलुरु के सदाशिवनगर स्थित मुख्यमंत्री के आवास पर शिवकुमार से मुलाकात की। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान या तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा नहीं किए जाने के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अडानी एंटरप्राइजेज बेंगलुरु के प्रस्तावित हेब्बल-सिल्क बोर्ड टनल रोड प्रोजेक्ट के दोनों पैकेजों के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी यानी L1 बिडर बन चुकी है। करीब 16.75-17 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की अनुमानित सरकारी लागत करीब 17,698 करोड़ रुपये थी, जबकि अडानी एंटरप्राइजेज की बोली करीब 22,267 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि, अभी इस परियोजना का ठेका अंतिम रूप से आवंटित नहीं हुआ है।

CMO की चुप्पी बनी चर्चा का विषय

मुख्यमंत्री कार्यालय आमतौर पर मुख्यमंत्री की प्रमुख मुलाकातों, खासकर बड़े उद्योगपतियों और महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडलों से होने वाली बैठकों की तस्वीरें और जानकारी सार्वजनिक करता है। लेकिन अडानी के साथ हुई मुलाकात को लेकर CMO के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर कोई पोस्ट नहीं किया गया।

इस असामान्य चुप्पी को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केवल सोशल मीडिया पर जानकारी साझा नहीं किए जाने के आधार पर मुलाकात के उद्देश्य या उसमें हुई बातचीत को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय और शिवकुमार के करीबी सूत्रों ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया है। शिवकुमार ने भी कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद यह अडानी की उनसे पहली मुलाकात थी।

टनल रोड प्रोजेक्ट के बीच मुलाकात

अडानी और शिवकुमार की मुलाकात का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि अडानी समूह की कंपनी बेंगलुरु टनल रोड परियोजना में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनी है।

प्रस्तावित टनल रोड हेब्बल से सिल्क बोर्ड के बीच यातायात दबाव कम करने के उद्देश्य से बनाई जानी है। लेकिन परियोजना पहले से ही लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और इसकी व्यवहार्यता को लेकर विवादों में है। बीजेपी के कुछ नेताओं ने परियोजना पर सवाल उठाए हैं और इसकी प्रक्रिया को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्यमंत्री और अडानी के बीच हुई बातचीत में टनल रोड परियोजना का मुद्दा उठा था या नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों में इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

मुलाकात सामने आने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है। विपक्ष ने कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर पर अडानी समूह को लेकर अपनाए जाने वाले रुख और कर्नाटक में मुख्यमंत्री की अडानी से मुलाकात के बीच कथित विरोधाभास को मुद्दा बनाया है।

बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर ‘डबल स्टैंडर्ड’ अपनाने का आरोप लगाया है। उनका तर्क है कि एक तरफ कांग्रेस राष्ट्रीय राजनीति में अडानी को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाती रही है, वहीं कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री की उद्योगपति से मुलाकात हो रही है।

बीजेपी इस मुलाकात को टनल रोड परियोजना से जोड़कर भी सवाल उठा रही है। विपक्ष का कहना है कि जब अडानी समूह की कंपनी परियोजना की सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी है, तब मुख्यमंत्री और उद्योगपति के बीच मुलाकात की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

कांग्रेस का बचाव

वहीं, कांग्रेस सरकार की ओर से मुलाकात को लेकर सफाई भी सामने आई है। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि अडानी राज्य सरकार के लिए एक कारोबारी/ठेकेदार की भूमिका में हैं और टेंडर प्रक्रिया पर किसी तरह का प्रभाव नहीं डाला गया है। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत हुई है।

सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि किसी उद्योगपति से मुख्यमंत्री की मुलाकात को अपने आप में राजनीतिक या अनियमित गतिविधि नहीं माना जा सकता। राज्य सरकार निवेश और रोजगार के अवसरों के लिए उद्योग जगत के साथ संवाद करती रहती है।

अडानी की बोली पर भी नजर

मुलाकात ऐसे वक्त हुई है जब टनल रोड परियोजना की बोली को लेकर सरकार के सामने महत्वपूर्ण फैसला है। अडानी एंटरप्राइजेज की 22,267 करोड़ रुपये की बोली राज्य सरकार के शुरुआती अनुमान से करीब 4,600 करोड़ रुपये अधिक है। इसलिए सरकार को परियोजना की लागत और वित्तीय व्यवहार्यता पर भी विचार करना होगा।

इसके अलावा, परियोजना को पर्यावरणीय प्रभाव और बेंगलुरु के महत्वपूर्ण हरित क्षेत्रों पर संभावित असर को लेकर भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार के सामने राजनीतिक, वित्तीय और पर्यावरणीय तीनों पहलुओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

मुलाकात की जानकारी क्यों नहीं हुई सार्वजनिक?

फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा CMO की सोशल मीडिया चुप्पी को लेकर है। आम तौर पर ऐसी मुलाकातों की जानकारी सार्वजनिक होने के बावजूद इस बैठक का आधिकारिक डिजिटल रिकॉर्ड सामने नहीं आया। यही वजह है कि विपक्ष ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।

हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया गया है और उपलब्ध जानकारी में यह पुष्टि नहीं है कि टनल रोड टेंडर को लेकर दोनों के बीच कोई बातचीत हुई। इसलिए इस मुलाकात को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवालों और तथ्यात्मक रूप से पुष्ट जानकारी के बीच अंतर करना जरूरी है।

कुल मिलाकर, अडानी-शिवकुमार मुलाकात ने कर्नाटक में टनल रोड परियोजना, कांग्रेस के अडानी को लेकर रुख और सरकारी पारदर्शिता को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार टनल रोड की महंगी बोली पर क्या फैसला लेती है और क्या आने वाले दिनों में इस मुलाकात के बारे में कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आती है।

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