
बेंगलुरु। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के जेल में बंद एक्टिविस्ट और जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को “राष्ट्रवादी” बताने वाले बयान से नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। हरिप्रसाद ने यह टिप्पणी बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में खालिद पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा विरोध किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए की। स्क्रीनिंग फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
विवाद की शुरुआत NLSIU में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Prisoner No. 626710 is Present’ की प्रस्तावित स्क्रीनिंग से हुई। फिल्म निर्माता ललित वचानी की यह डॉक्यूमेंट्री खालिद की गिरफ्तारी और लंबे समय से जारी प्री-ट्रायल हिरासत पर केंद्रित है। विश्वविद्यालय के छात्र संगठन से जुड़ी इकाई ने इसकी स्क्रीनिंग की योजना बनाई थी।
ABVP ने इस कार्यक्रम का विरोध करते हुए स्क्रीनिंग रद्द करने की मांग की। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। विश्वविद्यालय के मुताबिक स्क्रीनिंग को रद्द नहीं बल्कि फिलहाल टाला गया है।
हरिप्रसाद बोले- उमर खालिद राष्ट्रवादी हैं
मंगलवार को इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए बी.के. हरिप्रसाद ने उमर खालिद को “राष्ट्रवादी” बताया। उन्होंने ABVP की आलोचना करते हुए कहा कि संगठन को खालिद के बारे में टिप्पणी करने का नैतिक अधिकार नहीं है।
हरिप्रसाद ने नाथूराम गोडसे का जिक्र करते हुए ABVP पर भी तीखा राजनीतिक हमला किया। उनका बयान सामने आने के बाद विवाद डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग से आगे बढ़कर कांग्रेस और ABVP के बीच राष्ट्रवाद को लेकर राजनीतिक बहस में बदल गया।
हरिप्रसाद की टिप्पणी उनका राजनीतिक आकलन है। उमर खालिद से जुड़े आपराधिक मामले अदालत में विचाराधीन हैं और उनके खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं हुआ है।
ABVP ने किया पलटवार
हरिप्रसाद के बयान पर ABVP ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। संगठन के बेंगलुरु सचिव अभिनंदन मिर्जी ने कांग्रेस नेता के बयान पर सवाल उठाते हुए उमर खालिद से जुड़े पुराने विवादों और आरोपों का उल्लेख किया।
ABVP ने सवाल किया कि कांग्रेस नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह हरिप्रसाद के बयान से सहमत है। संगठन ने खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का विरोध जारी रखते हुए इसे विश्वविद्यालय परिसर में नहीं दिखाए जाने की मांग की है।
ABVP ने केंद्र सरकार से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन की ओर से संबंधित केंद्रीय मंत्रियों को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका की जांच और डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रोकने की मांग किए जाने की खबर है।
क्यों विवादों में हैं उमर खालिद?
उमर खालिद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता हैं। उन्हें सितंबर 2020 में दिल्ली दंगों से जुड़े एक कथित बड़ी साजिश के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA समेत अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया।
अभियोजन पक्ष ने खालिद पर 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़ी कथित साजिश में भूमिका के आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ खालिद इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनके समर्थकों और वकीलों का पक्ष रहा है कि उनके भाषणों और राजनीतिक गतिविधियों को गलत तरीके से आपराधिक मामले से जोड़ा गया।
मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है। इसलिए उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य के बजाय अभियोजन पक्ष के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
डॉक्यूमेंट्री में प्री-ट्रायल हिरासत पर फोकस
प्रस्तावित डॉक्यूमेंट्री में उमर खालिद की लंबे समय से जारी प्री-ट्रायल हिरासत को प्रमुख विषय बनाया गया है। इसी फिल्म को NLSIU में दिखाने की तैयारी थी।
ABVP का आरोप है कि ऐसी स्क्रीनिंग के जरिए खालिद की छवि को सकारात्मक तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है। वहीं स्क्रीनिंग के समर्थक इसे अभिव्यक्ति और अकादमिक चर्चा से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। दोनों पक्षों के दावों के बीच विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित किया है।
NSUI ने किया स्क्रीनिंग का समर्थन
कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का समर्थन किया है। इसके बाद मामला छात्र संगठनों के बीच भी राजनीतिक टकराव का विषय बन गया है।
एक तरफ ABVP स्क्रीनिंग के खिलाफ है तो दूसरी तरफ NSUI इसे आयोजित किए जाने के समर्थन में है। इस वजह से विश्वविद्यालय परिसर से शुरू हुआ विवाद अब राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।
भाजपा ने भी कांग्रेस को घेरा
हरिप्रसाद के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने भी कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। भाजपा की ओर से उमर खालिद को “राष्ट्रवादी” कहे जाने की आलोचना की गई और कांग्रेस से इस पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करने की मांग की गई है।
वहीं हरिप्रसाद ने ABVP और RSS की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए अपने बयान का बचाव किया है। इस तरह विवाद में दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
फिलहाल टली है स्क्रीनिंग
NLSIU में प्रस्तावित डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग फिलहाल स्थगित है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक विश्वविद्यालय ने सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारणों को इसके पीछे वजह बताया है। इसे स्थायी रूप से रद्द किए जाने की घोषणा नहीं की गई है।
इस बीच हरिप्रसाद के बयान ने मामले को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। अब विवाद केवल विश्वविद्यालय में किसी डॉक्यूमेंट्री को दिखाए जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विचाराधीन आपराधिक मामलों और राष्ट्रवाद की राजनीतिक व्याख्या जैसे मुद्दे भी बहस के केंद्र में आ गए हैं।
उमर खालिद के खिलाफ चल रहे मामले का अंतिम फैसला अदालत को करना है। वहीं उन्हें “राष्ट्रवादी” बताना हरिप्रसाद का राजनीतिक मत है, जिसका ABVP और भाजपा विरोध कर रहे हैं। फिलहाल डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की नई तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।





