कर्नाटक

7,561 वोटरों की जांच पर सियासी घमासान

Kavita2
5 Oct 2026 10:34 AM IST
7,561 वोटरों की जांच पर सियासी घमासान
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बल्लारी। कर्नाटक के बल्लारी में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा के बूथ लेवल एजेंट (BLA-1) और बल्लारी नगर निगम के पार्षद मोटकर श्रीनिवास के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने अदालत से उनके खिलाफ सर्च वारंट हासिल किया है। भाजपा ने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक दबाव में निशाना बनाया जा रहा है।

यह विवाद बल्लारी शहर विधानसभा क्षेत्र के 7,561 मतदाताओं से जुड़ा है। श्रीनिवास ने चुनाव अधिकारियों के समक्ष इन मतदाताओं की पात्रता की दोबारा जांच की मांग की थी। दूसरी ओर कांग्रेस के BLA-1 गौतम एस. ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर एक अक्टूबर को ब्रूसपेट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत में श्रीनिवास के साथ कुछ चुनाव अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं।

मामले में सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म-7 आवेदनों को लेकर है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 7,561 मतदाताओं के नामों से संबंधित फॉर्म-7 आवेदन दिए गए थे। वहीं भाजपा का कहना है कि उसने किसी समुदाय को निशाना बनाकर मतदाताओं के नाम हटाने की मांग नहीं की थी, बल्कि मतदाताओं की पात्रता का सत्यापन करने के लिए चुनाव अधिकारियों को पत्र दिया गया था। दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच अभी जारी है।

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने अदालत का रुख किया और मोटकर श्रीनिवास के खिलाफ सर्च वारंट हासिल किया। रिपोर्ट के अनुसार वारंट के आधार पर उनके तालूर रोड स्थित कार्यालय की तलाशी की कार्रवाई से जुड़ी प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद भाजपा नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई।

भाजपा नेताओं का कहना है कि वे सर्च वारंट से डरने वाले नहीं हैं। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस जानबूझकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है। भाजपा ने चेतावनी दी है कि यदि उसके कार्यकर्ताओं को परेशान किया गया तो संबंधित पुलिस स्टेशन के साथ जिम्मेदार अधिकारी के आवास का भी घेराव किया जाएगा। यह बयान भाजपा नेताओं की ओर से दिया गया राजनीतिक दावा और चेतावनी है।

पार्टी ने इस मामले को लेकर बल्लारी में बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान भी किया है। भाजपा की योजना रॉयल सर्किल से विरोध मार्च निकालने और इसके बाद ब्रूसपेट तथा एपीएमसी पुलिस स्टेशनों के सामने प्रदर्शन करने की है। पार्टी इन मामलों में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है।

दूसरी तरफ कांग्रेस की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाने की कोशिश की गई। शिकायत के अनुसार बल्लारी शहर विधानसभा क्षेत्र के हजारों मतदाताओं को लेकर फॉर्म-7 आवेदन प्रस्तुत किए गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हालांकि इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।

मामले में राजनीतिक टकराव इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि दोनों दल 7,561 मतदाताओं की सूची को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं। कांग्रेस पक्ष इसे मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश से जोड़ रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि उसने केवल पात्रता की दोबारा जांच की मांग की थी और किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने का उद्देश्य नहीं था।

एफआईआर में केवल मोटकर श्रीनिवास का ही नाम नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बल्लारी सिटी कॉरपोरेशन के सहायक आयुक्त नंदीश, बीएलओ सुमलता और शरणबसवा समेत अन्य लोगों को भी मामले में नामजद किया गया है। शिकायत के आधार पर पुलिस अब पूरे घटनाक्रम और फॉर्म-7 आवेदनों से संबंधित प्रक्रिया की जांच कर रही है।

मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया चुनावी व्यवस्था का संवेदनशील हिस्सा है। फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति या मौजूदा नाम को हटाने के अनुरोध के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में चुनाव अधिकारियों की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दावे की जांच की जाती है और संबंधित पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है।

बल्लारी का विवाद अब प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया है। भाजपा पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से मतदाता सूची में कथित अनियमितता का आरोप लगाया गया है। फिलहाल दोनों ही पक्षों के दावों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले नहीं निकाला जा सकता।

इस मामले के साथ कर्नाटक के अन्य जिलों में भी SIR और फॉर्म-7 आवेदनों को लेकर विवाद सामने आए हैं। बेलगावी और बीदर समेत कुछ स्थानों पर मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिशों को लेकर मामले दर्ज किए गए हैं। इससे राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है।

अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि 7,561 मतदाताओं से संबंधित आवेदन किस प्रक्रिया के तहत जमा किए गए, उनमें नियमों का पालन हुआ या नहीं और इस मामले में नामजद लोगों की वास्तविक भूमिका क्या थी। दूसरी ओर सर्च वारंट के बाद भाजपा ने आंदोलन तेज करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में बल्लारी में SIR को लेकर शुरू हुआ विवाद आने वाले दिनों में भी राजनीतिक और कानूनी स्तर पर चर्चा में रह सकता है।

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