
बेंगलुरु। कर्नाटक में कथित वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले को लेकर सियासी विवाद तेज होता जा रहा है। मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर बीजेपी ने सोमवार को विधान सौधा के बाहर विरोध प्रदर्शन तेज किया। इसके जवाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया और बीजेपी पर ही भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सवाल उठाए। दोनों दलों के आमने-सामने आने से राजधानी में राजनीतिक माहौल गरमा गया।
बीजेपी का आरोप है कि वाल्मीकि कॉर्पोरेशन में कथित तौर पर 187 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है और इस मामले में मंत्री बी. नागेंद्र को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा देना चाहिए। विपक्ष के नेता आर. अशोक के नेतृत्व में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विधान सौधा का घेराव करने का प्रयास किया। इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी अलग प्रदर्शन शुरू कर दिया।
विधान सौधा के बाहर आमने-सामने आए कार्यकर्ता
बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कथित घोटाले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और सरकार को पूरे मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
बीजेपी के प्रदर्शन के जवाब में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने राज्य सरकार का बचाव करते हुए बीजेपी पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कहा कि बीजेपी को पहले अपने नेताओं और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों पर जवाब देना चाहिए, उसके बाद ही राज्य सरकार पर आरोप लगाने चाहिए।
इस तरह विधान सौधा के आसपास कुछ समय के लिए दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
बीजेपी ने मंत्री के इस्तीफे पर बढ़ाया दबाव
वाल्मीकि कॉर्पोरेशन से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के मामले को लेकर बीजेपी लगातार सरकार पर दबाव बना रही है। पार्टी का कहना है कि सरकारी संस्था में इतनी बड़ी राशि से जुड़ा मामला सामने आने के बाद संबंधित मंत्री की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
विपक्ष के नेता आर. अशोक समेत बीजेपी नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की। बीजेपी का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
विपक्ष इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाने की रणनीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। विधान सौधा के बाहर हुआ प्रदर्शन भी इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया पलटवार
बीजेपी के आरोपों के जवाब में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी केवल राजनीतिक लाभ के लिए सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के बजाय बीजेपी पर भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप लगाए। उनका कहना था कि बीजेपी नेताओं को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलने से पहले अपने कार्यकाल और पार्टी से जुड़े मामलों पर भी जनता को जवाब देना चाहिए।
इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक विरोध का भी सहारा लिया। उन्होंने कर्नाटक के प्रमुख बीजेपी और जेडीएस नेताओं के मास्क पहनकर प्रदर्शन किया। इससे प्रदर्शन स्थल पर लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ।
मास्क पहनकर किया अनोखा प्रदर्शन
कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से बीजेपी और जेडीएस नेताओं के मास्क पहनना विरोध प्रदर्शन का एक प्रमुख आकर्षण रहा। कार्यकर्ताओं ने इसके जरिए विपक्षी दलों पर राजनीतिक और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों को लेकर निशाना साधने का प्रयास किया।
कांग्रेस का संदेश था कि बीजेपी को केवल कांग्रेस सरकार से जुड़े मामलों पर सवाल उठाने के बजाय अपने नेताओं से जुड़े आरोपों पर भी स्पष्टीकरण देना चाहिए। इस प्रतीकात्मक प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के खिलाफ नारे भी लगाए।
187 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला
पूरा राजनीतिक विवाद वाल्मीकि कॉर्पोरेशन में कथित 187 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। विपक्ष का दावा है कि निगम से संबंधित धनराशि में कथित अनियमितता हुई और इस मामले में सरकार की जवाबदेही बनती है।
बीजेपी इस मुद्दे को लगातार उठा रही है और मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रही है। पार्टी का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट कदम उठाने चाहिए।
वहीं, कांग्रेस का रुख है कि मामले में जांच की प्रक्रिया को अपना काम करने देना चाहिए और बीजेपी को राजनीतिक आरोपों के बजाय तथ्यों के आधार पर बात करनी चाहिए।
बढ़ सकता है राजनीतिक दबाव
कर्नाटक में इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक दबाव और बढ़ने की संभावना है। विपक्ष पहले ही सरकार को घेरने के लिए प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपना चुका है। वहीं, कांग्रेस भी बीजेपी के आरोपों का जवाब देने के लिए आक्रामक रुख अपना रही है।
विधान सौधा के बाहर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि कथित वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाला अब केवल प्रशासनिक या कानूनी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक टकराव का बड़ा विषय बन चुका है।
जांच और कार्रवाई पर टिकी नजर
अब इस मामले में जांच की दिशा और सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सबकी नजर है। विपक्ष लगातार मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक जवाब देने में जुटा है।
कथित घोटाले की वास्तविक जिम्मेदारी और दोषियों को लेकर अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और इस मुद्दे ने कर्नाटक की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
विधान सौधा के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों ने यह साफ कर दिया है कि वाल्मीकि कॉर्पोरेशन से जुड़ा कथित 187 करोड़ रुपये का मामला आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में अहम मुद्दा बना रह सकता है।





