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'जंतर-मंतर' वाली लाइन से सियासी विवाद, जानिए शिवश्री के भजन की असली कहानी

Kavita2
1 Nov 2026 12:25 PM IST
जंतर-मंतर वाली लाइन से सियासी विवाद, जानिए शिवश्री के भजन की असली कहानी
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बेंगलुरु। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की पत्नी और शास्त्रीय गायिका शिवश्री स्कंदप्रसाद का एक भजन इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। 15वीं सदी के संत-कवि कबीर से जुड़ी एक रचना को गाते हुए शिवश्री का वीडियो वायरल हो रहा है। विवाद की वजह भजन में इस्तेमाल किया गया 'जंतर-मंतर' शब्द है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स इसे दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन से जोड़कर देख रहे हैं। चूंकि शिवश्री के पति तेजस्वी सूर्या भाजपा सांसद हैं और CJP के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी कर चुके हैं, इसलिए इस वीडियो को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, पड़ताल में सामने आया है कि यह वीडियो मौजूदा राजनीतिक विवाद से करीब तीन साल पुराना है और भजन में इस्तेमाल किए गए 'जंतर-मंतर' शब्द का अर्थ दिल्ली के प्रदर्शन स्थल से नहीं है।

भजन की किस पंक्ति पर हुआ विवाद?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में शिवश्री स्कंदप्रसाद कबीर से जुड़ा एक भजन गाती नजर आ रही हैं। इसमें वह कहती हैं:

'कहत कबीर सुनो भाई साधो, राम मिलत है भक्ति, जंतर-मंतर लटपट से नहीं, राम भजन से है मुक्ति।'

इस पंक्ति को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने इसे दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले राजनीतिक प्रदर्शनों से जोड़कर देखा। उनका सवाल है कि भजन में जंतर-मंतर का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है और क्या यह मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर कोई टिप्पणी है।

25 अक्टूबर को एक्स पर एक यूजर ने इस वीडियो को साझा करते हुए भी सवाल उठाए थे। इसके बाद क्लिप को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और इस पर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने इसे राजनीतिक व्यंग्य बताया, जबकि अन्य ने भजन के वास्तविक अर्थ को समझने की जरूरत बताई।

तीन साल पुराना निकला वीडियो

विवाद बढ़ने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने वीडियो के मूल स्रोत की तलाश शुरू की। पड़ताल में पता चला कि शिवश्री के इस भजन का पूरा कार्यक्रम जून 2024 में कोयंबटूर स्थित श्री जगन्नाथ पेरुमल मंदिर के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर लगे बैनर से इसकी रिकॉर्डिंग का समय वर्ष 2023 का बताया गया है। यानी यह प्रस्तुति CJP के हालिया विरोध-प्रदर्शनों से लगभग तीन साल पहले की है। इतना ही नहीं, शिवश्री वर्ष 2021 में भी इसी भजन को गा चुकी हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह रचना उनके पुराने संगीत कार्यक्रमों का हिस्सा रही है और इसे मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ने का दावा समयरेखा से मेल नहीं खाता।

आखिर भजन में 'जंतर-मंतर' का क्या मतलब है?

इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भजन में इस्तेमाल किए गए 'जंतर-मंतर' शब्द का वास्तविक अर्थ है। आमतौर पर दिल्ली में स्थित जंतर-मंतर को लोग राजनीतिक धरने और विरोध-प्रदर्शनों के स्थल के रूप में जानते हैं। लेकिन भजन में इस शब्द का इस्तेमाल बिल्कुल अलग संदर्भ में किया गया है।

भक्ति साहित्य की भाषा में 'जंतर-मंतर' का संबंध तंत्र-मंत्र, टोने-टोटके, यंत्रों और कथित चमत्कारी अनुष्ठानों से है। इस पंक्ति के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि केवल बाहरी कर्मकांड, तंत्र-मंत्र या जादुई उपायों से आध्यात्मिक मुक्ति नहीं मिल सकती। इसके बजाय ईश्वर की भक्ति, सच्चे चिंतन और आत्मिक साधना को अधिक महत्व दिया गया है।

यहां जंतर-मंतर का दिल्ली स्थित राजनीतिक प्रदर्शन स्थल से कोई सीधा संबंध नहीं है। शब्दों के समान होने के कारण ही सोशल मीडिया पर गलतफहमी पैदा हुई।

कौन हैं शिवश्री स्कंदप्रसाद?

शिवश्री स्कंदप्रसाद कर्नाटक की शास्त्रीय गायिका हैं। वह भारतीय शास्त्रीय संगीत और भक्ति संगीत से जुड़ी प्रस्तुतियों के लिए जानी जाती हैं। वह भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की पत्नी हैं। उनके गाए भजन और संगीत प्रस्तुतियों के वीडियो सोशल मीडिया पर भी उपलब्ध हैं।

तेजस्वी सूर्या बेंगलुरु दक्षिण लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद हैं। वह CJP और उससे जुड़े विरोध-प्रदर्शनों को लेकर पहले भी अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया दे चुके हैं। यही राजनीतिक पृष्ठभूमि शिवश्री के पुराने भजन के वायरल होने के बाद चर्चा का एक प्रमुख कारण बनी। हालांकि, शिवश्री ने यह भजन जिस समय गाया था, उस समय मौजूदा CJP विरोध-प्रदर्शन का घटनाक्रम सामने नहीं आया था।

कौन थे संत कबीर, जिनकी रचनाओं पर छिड़ी बहस?

संत कबीर 15वीं सदी के प्रमुख संत-कवि और भक्ति आंदोलन के महत्वपूर्ण विचारक थे। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से धार्मिक आडंबर, अंधविश्वास, जातिगत भेदभाव और बाहरी कर्मकांडों की आलोचना की। कबीर की वाणी में ईश्वर के प्रति सच्ची आस्था, मानवता, समानता और आत्मचिंतन को विशेष महत्व दिया गया है।

उनकी रचनाएं आज भी भजन, दोहे और लोकसंगीत के रूप में गाई जाती हैं। कबीर की भाषा सरल होने के बावजूद उनके संदेशों में गहरा आध्यात्मिक और सामाजिक अर्थ छिपा होता है। उनकी कई रचनाओं में यह विचार मिलता है कि ईश्वर की प्राप्ति बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति और मन की शुद्धता से होती है।

इस भजन की पंक्ति भी इसी आध्यात्मिक विचारधारा को सामने रखती है। इसमें तंत्र-मंत्र जैसे बाहरी उपायों की तुलना रामभक्ति से करते हुए आध्यात्मिक मुक्ति के लिए आस्था और साधना को महत्वपूर्ण बताया गया है।

CJP के विरोध-प्रदर्शन से कैसे जुड़ा मामला?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के कारण हाल के दिनों में यह स्थान राजनीतिक चर्चाओं में रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं।

इसी राजनीतिक माहौल के बीच शिवश्री के पुराने भजन का वीडियो दोबारा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। तेजस्वी सूर्या की राजनीतिक पहचान और भजन में जंतर-मंतर शब्द के इस्तेमाल ने इस क्लिप को राजनीतिक रंग दे दिया।

हालांकि, उपलब्ध वीडियो रिकॉर्ड और कार्यक्रम की समयरेखा से यह स्पष्ट होता है कि गायिका की प्रस्तुति को हालिया CJP आंदोलन पर टिप्पणी मानना सही नहीं है। भजन में प्रयुक्त शब्द का धार्मिक और आध्यात्मिक संदर्भ है, न कि दिल्ली के विरोध-प्रदर्शन स्थल का।

फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, उसके पुराने होने के तथ्य और कबीर की रचना के वास्तविक अर्थ को लेकर चर्चा में है। इस घटनाक्रम से एक बात स्पष्ट होती है कि किसी वीडियो के छोटे हिस्से को उसके मूल संदर्भ से अलग करके देखने पर गलतफहमी पैदा हो सकती है। इसलिए किसी भी वायरल क्लिप पर राय बनाने से पहले उसकी तारीख, मूल कार्यक्रम और संदर्भ की जांच करना जरूरी है।

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